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इंटिग्रेटर्स, कॉमर्स की रोशनी से बीमार नहीं हो रहे हैं; इससे चीन में 90 हजार लोग डायबिटिक | गैजेट्स, बाजारों की लाइटें रहीं बीमार; इससे चीन में 90 हजार लोग डायबिटिक हो जाते हैं।

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झा4 मिनट पहले

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त्योहारों पर रोशनी से जगमगाता शहर या बाजों में चकाचौंध करता है तेज रोशनी अच्छी लगती है, लेकिन ये बहने की बीमारी भी दे रही है। हर तरह की आर्टिफिशियल लाइट, मोबाइल-लैपटॉप जैसे व्यवसाय, शोकेस के बाहर शुरू होने वाला चिपकू, कार की हेडलाइट या फिरर्ड होिंग्स की ड्रू करता है रोशन भी आप लाइन का शिकार बना सकते हैं।

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आर्टिफिशियल लाइट से लाइट की आशंका 25%
चीन में 1 लाख लोगों का पता चला है कि स्ट्रीट लाइट और स्मार्टफोन जैसे आर्टिफिशियल लाइट्स दाखिल होने की आशंका 25% तक बढ़ सकती है। दरअसल, रात में भी बताए गए ये रोशन इंसान के बॉडी क्लॉक को बदलने लगती हैं, जिससे शरीर के ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने की क्षमता कम हो जाती है। शंघाई के रुईजीन अस्पताल के डॉक्टर यूजू कहते हैं, दुनिया की 80% आबादी रात के अंधेरे में रोशनी की जद में है।

चीन में रोशनी रोशनी लापरवाही के मरीज
जरूरत से ज्यादा रोशनी ही लाइट पॉल्यूशन है। सिर्फ चीन में ही 90 लाख लोग लाइट पॉल्यूशन की वजह से दाखिल हो गए हैं। ये लोग चीन के 162 शहरों में रहते हैं। चीन के नॉन कम्युनिकेबल डिजीज सर्विलांस से पता चला कि उसकी पहचान हो गई थी। इसमें उनकी पूरी लाइफ स्टाइलिंग का डाटा दर्ज है। यहां तक ​​कि उनकी आय, शिक्षा और पारिवारिक इतिहास भी।

खोज के दौरान जो लोग अंधेरे में लगातार लंबे समय तक कृत्रिम रोशनी में रहे उनमें से 28% लोगों को खाना पचाने में परेशानी होने लगी क्योंकि रोशनी की वजह से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बनना कम हो गया। यह हार्मोन हमारा मेटाबॉलिक सिस्टम सही रखता है।

लाइट से शरीर के ग्लूकोज स्तरों में
दरअसल, जो लोग हर घंटे आर्टफिशियल लाइट्स के संपर्क में रहते हैं, उनके शरीर का ग्लूकोज लेवल बिना कुछ खाए ही बढ़ता रहता है। इससे हमारे शरीर में बीटा की सक्रियता कम हो जाती है। इस सेल की सक्रियता की वजह से ही पैंक्रियाज से लाइन हार्मोन रिलीज होता है। डॉ जू कहते हैं, आर्टिफिशियल लाइट का सबसे अधिक संपर्क सभी दुनिया के आधुनिक समाज की समस्या है और यह वायरल होने की एक और बड़ी वजह बन गई है।

लाइट पॉल्यूशन से कीड़े-मकोड़े असमय मर रहे हैं
डॉ जू कहते हैं, अमेरिका और यूरोप के 99% लोग प्रकाश वाले आकाश के नीचे रहते हैं। पृथ्वी के 24 घंटे का दिन-रात का क्लॉक होता है। यह सूरज की रोशनी और डार्कनेस से तैयार होता है। यह इस ग्रह पर रहने वाले हर जीव पर लागू होता है, लेकिन इंसान इसमें छेड़छाड़ कर देता है।

लाइट पॉल्यूशन की वजह से कीड़े-मकोड़े, परिंदों और कई जानवरों का जीवन चक्र ही बदल गया है। इसमें समय से पहले ही उनकी मौत हो रही है और इससे दुनिया भर में जैव विविधता को भी बहुत अधिक नुकसान हो रहा है।

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