HomeWorld Newsइसकी वजह से दुख और अंग बढ़ते जा रहे हैं | ...

इसकी वजह से दुख और अंग बढ़ते जा रहे हैं | बचपन में हिंसक टीवी शो देखने का 10 साल का असर

Date:

Related stories

7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
- Advertisement -
- Advertisement -

टीवी पर अपराध की दुनिया से जुड़े कार्यक्रम, हिंसा के दृश्य वाले शो और खून-खराबे वाली एक्शन फिल्मों को पसंद करने वालों की संख्या काफी मिलती है। कई बार माता-पिता अपने बच्चों के साथ ऐसे शो और फिल्मों का आनंद लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए एक अलर्ट कॉल है।

- Advertisement -

मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण शोध यह है कि मारधाड़ फिल्में और अपराध से जुड़े हिंसक टीवी शो से बच्चों का बचपन ही नहीं, धारणा भी बिगड़ने का खतरा होता है। बचपन में देखे हिंसक कार्यक्रम का असर उन पर 10 साल तक रहता है। उनकी सीखने की क्षमता घटती है।

छोटी उम्र में हिंसक चीजें देखना खतरनाक
जर्नल ऑफ अंटार्कटिक एंड बिहेवियरल पीडियाट्रिक्स में स्क्रैप खोज में बताया गया है कि ऐसे बच्चे, जिनकी तीन साल की छोटी उम्र में हिंसक चीजें हैं, वे सोच-समझकर सीधे तौर पर भी परेशान रहते हैं। सर्च की प्रमुख लिंडा पगानी बोलती हैं, ‘बच्चे छोटी उम्र में स्कूल जाने से पहले टीवी पर जिन चरित्रों को देखते हैं, वे बोलने वाले हैं।

वे चरित्रों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं, जो फिल्मों या शो में किसी समस्या का समाधान हिंसा से करते हैं। फिर चाहे वह हीरो हो या विलेन। बच्चा हिंसा को सामान्य समझ लेता है। वह स्कूलों में फिट नहीं होता। मिडिल स्कूलिंग में वह किशोर होता है। लेकिन ऐसे किशोर जो बचपन में हिंसा को सहज मान रहे हैं, वे पर उदास और एंग्जाइटी हावी रहते हैं।’

बच्चे समझाते हैं कि दुनिया डरावना नहीं है
पगानी कहते हैं, ‘किशोरों के लिए बड़े अजीब हालात हैं।’ उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे किस चीज से जूझ रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता उनमें सामाजिक मूल्य जैसे कि कैसे मिले-जुलें, किस तरह की बात करें, सामान्य शिक्षाएं। उनके दिमाग से यह आभास होता है कि दुनिया डरावनी है।’

खोज में 3.6 से 4.6 साल के उन बच्चों को लिया गया, जिनके माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे हिंसक शो देखते हैं। फिर उनके व्यवहार को तब सीखा, जब वे 12 साल के हो गए। शिक्षकों से फिक्र की गई और बच्चों से भी बात की गई। खोज में 978 लड़कियां और 998 लड़के शामिल हुए थे।

खुद की पसंद पर डर लगता है, आप जो देखते हैं वह बच्चा भी वही देखता है

  • 12 साल से कम उम्र के बच्चों को पर्सनल मोबाइल देने से बचें।
  • ध्यान दें कि वे टीवी, लैपटॉप या संबंधों में क्या देख रहे हैं।
  • आप जिस तरह की चीजें देखेंगे, बच्चे उसका भी नकल करेंगे।
  • बच्चे बताते हैं कि हिंसक व्यवहार कतई बयान नहीं है।

खबरें और भी हैं…

Source link

- Advertisement -

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here