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एक जिसके लिए सरकार दायर करें: एसके मिश्रा के साथ युवा आयकर अधिकारी, रविवार की जांच पर सोनिया-राहुल से पूछताछ हुई

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  • ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल मोदी सरकार द्वारा बढ़ाया गया | दिल्ली समाचार

नई दिल्ली3 मिनट पहले

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सेंटर गवर्नमेंट ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के निदेशक एसके मिश्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। 60 साल के संजय कुमार मिश्रा अब नवंबर 2023 तक इस पर बने रह सकते हैं। यह तीसरी बार है, जब सरकार ने उन्हें सर्वप्रथम जोड़ा है।

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1984 फाइल के इनकम टैक्स कैडर के एसके मिश्रा को 19 नवंबर 2018 को ईडी का डायरेक्टर बनाया गया था। नियम के मुताबिक, ईडी डायरेक्टर का कार्यकाल दो साल के लिए फिक्स होता था। इस बंधन से 19 नवंबर 2020 को उनकी सेवा पूरी हो गई थी, लेकिन सरकार ने 13 नवंबर 2020 को उन्हें एक साल का जुड़ाव दे दिया।

ईडी के पहले निदेशकों में एक्टेंशन मिला था
मिश्रा पहले ईडी के पहले निदेशक थे, जिनका सेवा विस्तार मिला था। इसके बाद 2021 में केंद्र सरकार एक पत्ते लेकर आई, जिसमें सीबीआई और ईडी के निदेशक का कार्यकाल दो साल के कार्यकाल के बाद भी अगले तीन साल के लिए सींक जा सकता है। इसी के तहत, मिश्रा को एक बार फिर से सेवा संबंधी जुड़ाव मिला, जो 18 नवंबर 2022 तक के लिए था।

दूसरा कार्यकाल खत्म होने से पहले फिर विस्तार
मिश्रा का तीसरा कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले, 17 नवंबर को केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया- कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने ED निदेशक के तौर पर संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक साल यानी 18 नवंबर 2023 तक बढ़ाने के लिए मंजूर दे दी है। ताजा घटना से जुड़कर अब मिश्रा का पांच साल का कार्यकाल पूरा होगा। सरकार पहले ही पहले केंद्रीय दफ्तरों के प्रमुख का कार्यकाल 2 साल से बढ़ाकर 5 साल करने को मंजूरी दे दी गई है।

आईटी के सबसे युवा अधिकारी, नेशनल हैराल्ड केस सम्भाले गए
एस के मिश्रा 1984 में इंडियन रेवेन्यू सर्विस यानी आईआरएस में चुने गए थे। वे करीब 34 साल से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में सर्विस दे चुके हैं। इसके अलावा वे विदेशों में धन छिपाने वाले भारतीयों के मामलों को देखने वाले सेंट्रल डायरेक्ट कर बोर्ड यानी सीबीडीटी के विदेशी कर विभाग में भी काम कर रहे हैं।

इन मामलों के अलावा, नेहरू-गांधी परिवार से जुड़े नेशनल हेरल्ड मामले, जिनमें यस बैंक के राणा कपूर के मामले शामिल हैं, आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के मामले की जांच भी उन्होंने ही लीड की थी।

मिश्रा के एसोसिएशन के विरोध में Congress-तृणमूल
केंद्र सरकार की ओर से ED और CBI के निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के लिए संशोधन का कांग्रेस और कांग्रेस सहित कई संगठनों ने विरोध किया था। 13 नवंबर 2020 को पहली बार मिश्रा से मिलने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार कर दिया।

दूसरा एक्टेंशन के खिलाफ कोर्ट संदेश था
मिश्रा को 2021 में दूसरी बार लिंक दिए जाने के बाद कॉमन कॉज नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में सेंटर के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि सरकार ईडी प्रमुख का कार्यकाल इस एजेंसी के सामने सभी अहम मामलों की जांच पूरी होने तक नहीं बढ़ा सकती। इसके बाद सरकार ने छवि लाकर मिश्रा का कार्यकाल अनुक्रमित किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी के अस्थाई अधिकार रखे थे
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जुलाई में ईडी के खिलाफ दायर सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया था और पीएमएलए के मामलों में जांच करना, तलाशी लेना, संपत्ति कुर्क करना, गिरफ्तारी और जमानत जैसे स्थायी अधिकार रखे गए थे।

घटना-मुफ्ती का आरोप- 26 मौका दें
दरअसल, कांग्रेस नेता और सांसद कार्ति ने जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि मोदी सरकार के आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग केसेस में ईडी की दावा 26 बहाना दिया है, जबकि अपराध साबित होता है की दर बहुत कम है।

वित्त मंत्रालय ने भी राज्यसभा में जानकारी दी थी कि पिछले 8 साल में मनी लॉन्ड्रिंग केसेस में 3010 छापामार कार्रवाई के लिए गए हैं। इनमें से केवल 23 मामलों में दोष सिद्ध हुआ है।

ईडी के सहयोगी नेताओं पर ही कार्रवाई के आरोप लगे
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा था कि ईडी ने 2014 में एनडीए के सत्ता में आने के बाद 121 नेताओं पर कार्रवाई की है। इन 121 में से 115 नेता विरोधी दल हैं। कई तरह के आरोप हैं कि ईडी ने 95% मामलों में एक-दूसरे के साथ संबंध बनाए। इसे यूपीए सरकार से तुलना करके देखें तो 2004 से 2014 के बीच यानी 10 साल के दौरान ईडी ने कुल 26 नेताओं के खिलाफ जांच की थी। इसमें से 14 विपक्षी पार्टियों से संबंधित थे। यह कुल मामलों का 54% है।

सरमा, शुभेंदू और मुकुल राय के खिलाफ कार्रवाई रुकी
द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि सीबीआई और ईडी ने 2014 और 2015 में शारदा चिटफंड घोटाले के मामले में असम के नंबर हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच की थी। सीबीआई ने 2014 में उनके घर पर छापा मारने की कोशिश की थी। वक्त वे कांग्रेस में थे, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सरमा की तरह सीबीआई और ईडी नेतृण मूल नेता शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय के खिलाफ नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में कार्रवाई की थी। 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु और मुकुल बीजेपी में शामिल हो गए थे। दोनों के खिलाफ इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, मुकुल रॉय बाद में कांग्रेस में लौटे।

वित्त मंत्रालय के तहत काम करता है ED
ईडी केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आता है। यह एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA-2018 के मुताबिक काम करती है। मोदी सरकार ने यह कानून भगोड़ा आर्थिक अपराधियों और फेमा केसेस में कार्रवाई करती है।

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