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कठुआ रेप-मर्डर केस: SC ने हाई कोर्ट का आदेश रद्द किया; नाबालिग पर अब एडल्ट कोर्ट में मुकदमा चलेगा

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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कठुआ रेप-मर्डर मामलों के सप्ताह शुभम सांगारा पर नए मुकदमे चलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग के मुकदमे को खारिज कर दिया और अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने उसे एडल्ट यानी बालिग माना है।

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जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि वास्तविकता और मेडिकल सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट है कि शुभम चल रहा है नाबालिग नहीं था। वह 18 साल की उम्र में पूरा कर चुका था। कोर्ट के मुताबिक ऐसा कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है जो उसकी उम्र नाबालिग साबित करे।

क्या है पूरा मामला
जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के एक गांव में 10 जनवरी, 2018 को 8 साल की बच्ची को अगवा किया गया। 12 जनवरी को हीरानगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। बच्ची को चार दिन तक बंधक बनाकर गलत काम किया। बाद में उसकी हत्या कर दी गई। 17 जनवरी को उसका शव मिला।

22 जनवरी, 2018 को यह केस क्राइम को राइट किया गया। जांच के बाद 7 आवंटन, जिसमें सांझी राम (तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रधान), उनके बेटे विशाल, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया अर दीपू, सुरेंद्र कुमार, परवेश कुमार उर मन्नू, हेड कांस्टेबल तिलक राज और उपनिरीक्षक आनंद दत्ता को किया था। 8वीं सदी के रूप में सांझी राम का शुभम सांगरा को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसके मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में स्थानान्तरित कर दिया गया था।

बच्ची को इंसाफ के लिए पूरे देश में प्रदर्शन किए गए थे।

बच्ची को इंसाफ के लिए पूरे देश में प्रदर्शन किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पठानकोट ने किया मामला
16 अप्रैल को कठुआ की सेशन कोर्ट में मुकदमा शुरू हुआ, लेकिन 7 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को कठुआ से करीब 30 किमी दूर पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट की जिला एवं सत्र न्यायालय में आवंटित कर दिया। क्योंकि, जम्मू कश्मीर सरकार और कुछ लोगों ने कठुआ में फेयर सुनवाई नहीं होने की आशंका की आशंका की थी। जून, 2018 के पहले हफ्ते में सुनवाई शुरू हुई।

2018 में 7 ज़िपसेट जेल भेजे गए
जून, 2018 में 7 फास्टैग के खिलाफ कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की सट्टेबाजी संहिता के तहत गड़बड़ी पर धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या) और 376 डी (गैंगरेप) के तहत आरोप तय किए। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद किशोर को छोड़कर सभी को गुरदासपुर जेल में भेज दिया गया।

3 को उम्रकैद, 3 को 5 साल की सजा
3 जून, 2019 को केस का ट्रायल पूरा हुआ। सेशन कोर्ट में लगातार 245 दिन तक सुनवाई चली। सार्वजनिक अभियोजकों की ओर से 114 गवाहों को पेश किया गया, जबकि उनके बचाव में रक्षा की ओर से 18 गवाहों को केवल 20 दिनों में पेश किया गया। 10 जून को विशेष अदालत ने प्रधान सांझी राम, दीपक खजूरिया और दाखिले कुमार को 25 साल की उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, सुरेंद्र कुमार, आनंद दत्ता, तिलक राज को पांच साल की सजा सुनाई गई थी, जबकि सांझी राम के बेटे को बड़ा कर दिया।

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