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कर्सर रिंदा की मौत बनी सस्पेंस: इंसान ने साधी चुप्पी; बंबिहा समूह ले रहा जिम्मेदारी, कोई नशे की लत बता रहा कारण

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अमृतसर3 मिनट पहले

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हरविंदर सिंह रिंदा के दो रूप।  - दैनिक भास्कर
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हरविंदर सिंह रिंदा के दो रूप।

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पाकिस्तान में आईएसआई की पाना लेकर भारत में नार्को-टेररिज्म फैलाने वाले विवाद हरविंदर सिंह की मौत की मौत पर सस्पेंस बना है। एक तरफ़ के नौजवान, जो उसकी मौत की ज़िम्मेदारी ले रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में बैठे उसका मौत के नशे का ओवडोज बता रहे हैं, लेकिन केंद्र व पंजाब सरकार ने अभी तक इस पर चुप्पी साध रखी है।

बंबिहा ग्रुप की तरफ से डाली गई पोस्ट।

बंबिहा ग्रुप की तरफ से डाली गई पोस्ट।

मिली जानकारी के अनुसार शनिवार देर शाम पंजाब में आरोप हरविंदर सिंह रिंदा की मौत की खबर पहुंची थी, लेकिन यह मौत कैसे हुई, इस पर किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की। कुछ देर बाद ही बंबिहा ग्रुप के जसप्रीत जस्सी ने फेसबुक पर पोस्ट डाल रिंदा के मरने की जिम्मेदारी उठा ली। उसका कहना था कि रिंदा को पाकिस्तान उसके दोस्त ही बनेंगे, लेकिन लगातार साथ मिलकर वह वहां चिट्टे का काम करने लगा। उनके दोस्तों को भी काफी नुकसान हुआ था। जिसके चलते उसका कटल करवा दिया गया।

एनआईए ने हरविंदर रिंदा पर 10 लाख रुपए का ईनाम रखा था।

एनआईए ने हरविंदर रिंदा पर 10 लाख रुपए का ईनाम रखा था।

किडनी फेलियर को कारण बताया गया है
बंबीहा ग्रुप के इकरारनामे के बाद पाकिस्तान में बैठे सूत्रों ने फैसला रिंदा की मौत रंजिशन होना नहीं बताया। मिली जानकारी के अनुसार रिंदा ने दो हफ्ते पहले हेरोइन की अधिक डोज ले ली थी। जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

रिंदा को लाहौर के जिन्ना अस्पताल में शेयर किया गया था। जहां उसका इलाज चल रहा था। उसका प्रभाव किडनियों पर पड़ा। कुछ दिनों में ही उसकी किडनी फेल हो गई। उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और शनिवार देर शाम उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

केंद्र व राज्य सरकार ने साधी मौन
इन दोनों तरकों के बीच रिंदा की मौत अभी भी सस्पेंस बनी हुई है। इंटरपोल की मदद से रिंदा को पकड़ने की कोशिश में जुटी भारत सरकार और विशिष्ट को बार-बार समझौते वाली पंजाब सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। न ही कोई पुलिस अधिकारी या सुरक्षा एजेंसी उसकी मौत की पुष्टि कर रही है, लेकिन इसी बीच किसी के मरने की सूचना भी नहीं दी जा रही है।

2016 के बाद से पंजाब के लिए नासूर बना था रिंदा
18 साल की उम्र में अपने ही रिश्ते का खून करने वाला रिंदा 2016 से भारत व पंजाब सरकार के लिए नासूर बना था। फिरौती, कतल और नशे का व्यापार करने वाला रिंदा नेपाल के रास्ते पहले दुबई गया और फिर पाकिस्तान में जाकर खालिस्तान आंदोलन का हिस्सा बन गया। बब्बर खालसा इंटरनेशनल की इंडिया विंग देख रहा था। इसी दौरान उसने भारत में अपने नशे के तस्करों को घटनाओं को अंजाम देने में प्रयोग करना शुरू कर दिया था।

नशेड़ियों को स्लीपर सेल बना दिया गया था
रिंदा ने पाकिस्तान में किया आपने तस्कर साथियों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया था। वह बॉर्डर बेल्ट, तरनतारन व पंजाब के अन्य हिस्सों में तस्करों की मदद से नशेड़ी ढूंढता था। इन नशेड़ियों को वह नशा करता है और हथियार भी। इन नशेड़ियों की मदद लेकर ही वह अपना नेटवर्क पंजाब में फैला रहा था। पंजाब में दुविधा की लत में बीते कुछ सालों में पकड़े गए 80 साल के युवा नशे के आदी थे और नशे की जांच के लिए ही उन्होंने रिंदा से हाथ भी लगाया था।

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