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कहा- बलोंवर देशों की साझेदारी, कल ब्रिटेन ने भी यही चाही थी | यूके फ्रांस भारत को UNSC की स्थायी सीट बनाना चाहता है | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

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न्यूयॉर्क4 मिनट पहले

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फ्रांस ने भारत को संयुक्त राष्ट्र परिषद की स्थायी सदस्य बनाने की पेशकश की है। इसकी पहली शुक्रवार 18 नवंबर को ब्रिटेन ने भी भारत के पक्ष में यह मांग उठाई थी। यूनाइटेड नेशन (यूएन) में फ्रांस के प्रतिनिधि ने कहा है कि समय आ गया है जब दावेदार शक्तियों की दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्था में भागीदारी। फ्रांस ने न सिर्फ भारत बल्कि जर्मनी, ब्राजील और जापान को भी करार परिषद में सदस्य बनाने की मांग की है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक में नैथिली ब्रोडहर्स्ट ने कहा, ‘फ्रांस लगातार यह मांग उठा रहे हैं। हम चाहते हैं कि काउंसिल दूसरे देशों को भी लेकर जाए जिससे यह संस्था और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि परिषद के काम को और बेहतर बनाने के लिए इसमें 25 सदस्य जा सकते हैं। अफ्रीकी देशों को भी शामिल किया जाएगा। नैथिली ने जियोग्राफिकल रिप्रेजेंटेशन के आधार पर विभिन्न परिषदों में सदस्यों को जोड़ने की बात कही है।

यूएन में फ्रांस की नैथिली ब्रोडहर्स्ट ने निरंतर परिषद में दूसरे देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

यूएन में फ्रांस की नैथिली ब्रोडहर्स्ट ने निरंतर परिषद में दूसरे देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

भारत कर रहा है UNSC में सुधार की मांग
गैर परिषद में असमंजस को लेकर यूएन में भारतीय राजनयिक हित कंबोज ने गुरुवार को उठाया था। जिसमें उन्होंने UNSC में सामान के प्रतिनिधियों की बात कही थी। देरी में देरी से उसे संस्था और दुनिया को उतना ही नुकसान होगा। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब भारत की तरफ से इस तरह के सुधारों की मांग उठाई गई। समय-समय पर UNSC में इन संबंधों का भारत समर्थन कर रहा है।

भारत UNSC का स्थायी सदस्य क्यों नहीं है?
भारत काफी समय से सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने का प्रयास कर रहा है, लेकिन भारत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन के अलावा फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन भारत की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अपनी सहमति प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन चीन अलग-अलग बहानों से भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध कर रहा है।

इसके अलावा कई बार यूएनएससी के ढांचे में बदलाव की मांग भी उठ रही हैं। तर्क दिया जाता है कि यूएनएससी में विकसित देशों का प्रतिनिधित्व कम होता है, लेकिन स्थायी सदस्य नहीं चाहते कि इसमें किसी तरह का बदलाव हो और किसी दूसरे देश को वीटो पावर मिले। भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील भी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनने का प्रयास कर रहे हैं।

फ्रांस से पहले अमेरिका भी भारत का समर्थन कर चुका है
वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री के अमेरिकी दौरे के समय वहां के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र परिषद की निर्धारित सीट पर भारत की वरीयता की गारंटी की थी। उस समय भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया था कि सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि सभी क्वाड मेंबर देश इस बात पर सहमत हैं।

परमानेंट सीट की दौड़ में भारत का पक्ष मजबूत क्यों?
परमानेंट सीट जापान और ब्राज़ील में भी चल रही है। एशिया, यूरोप, अफ्रीका और खाड़ी के अधिकांश देश हमारे फेवर में हैं। तीन और बातें हैं, इसलिए हमारा मामला मजबूत होता है।

1. भारत में दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा है।

2. भारत ने पहले कभी किसी देश पर हमला नहीं किया।

3. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। दुनिया में भारतीय सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

केवल चीन ही भारत के समर्थन में नहीं है
इसी साल जुलाई में सरकार ने 16 दिसंबर को जानकारी दी थी कि यूएनएससी के पांच सदस्यों में से केवल चार का ही समर्थन हासिल है। विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा था कि केवल चीन ही भारत के लिए सीट लेने का समर्थन नहीं है। वीजा लेकर लगातार उससे बात की जा रही है। UNSC के सदस्यों में अमेरिका, चीन, रूस, प्रशंसक और ब्रिटेन शामिल हैं। इसे दूसरे संबंधों की भागीदारी को लेकर लगातार मांग उठ रही है।

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