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कांग्रेस का झंझट: माकन ने गहलोत-पायलट विवाद के बाद जिन्न को फिर से जारी किया

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3 मिनट पहले

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कांग्रेस पार्टी महान है। इसका कोई भी सदस्य, नेता, पार्टी की राह में गड़बड़ी करता है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने राजस्थान प्रभार की अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी है। नए अध्यक्ष को चिट्ठी लिख कहा है कि कोई दूसरा प्रभार देखता है।

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पार्टी अध्यक्ष पद पर बैठने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने यह पहली बड़ी परेशानी है। वास्तव में, पिछले महीने खड़गे और माकन जब पायलट और गहलोत का व्यवस्थित प्रबंधन कर रहे थे, तब गहलोत समर्थकों ने इन पर्यवेक्षकों द्वारा बैठक में बुलाई गई बैठक में जाने की बजाय मंत्री शांति धारीवाल के घर एक समानांतर बैठक की थी और कुछ जजबाज़ी भी की थी।

बाद में जब विवाद बढ़ा और माकन कार्रवाई पर अड़ गए तो धारीवाल सहित तीन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस दिए गए थे। नोटिस दिए गए लेकिन कुछ दिनों में ही बात आई-गई हो गई और नेता, कार्यकर्ता, यहां तक ​​कि लोग भी इस वाकए या विवाद को लगभग भूल गए थे। पार्टी बैक ट्रैक पर आ रही थी।

गहलोत भी पिछले चुनावों की तरह अपनी जिम्मेवारी शाकाहारी गुजरात दौड़ रहे थे। स्वयं राहुल गांधी भी जोश के साथ अपनी भारत जोड़ो यात्रा को साथ राजस्थान में प्रवेश करने वाले हैं। ऐसे नाज़ुक वक्त में माकन साहब को ग़ुस्सा आ गया। उन्होंने राजस्थान के तीन नेताओं पर कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रभार पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

हालांकि राष्ट्रपति चिट्ठी आठवें को उन्होंने ही लिखा था, जो अब उजागर हुआ है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या होगा? गहलोत गुजरात में वैसी रुचि नहीं रखी जैसी किसी ने देखी थी। दूसरे, गहलोत और पायलट गुट की खेमेबाजी और बढ़ जाएगा। कंजेशनबाजी तो शुरू भी हो चुकी है। राहुल गांधी की यात्रा के आधार में प्रवेश पर भी यही विवाद छाया रह सकता है। बीजेपी तो ऐसे मुद्दों को जुने में लगाती ही है। उनके बयान भी शुरू हो जाएंगे। कुल मिलाकर ट्रैक पर आ रहा है एक विवाद फिर से ज़ोर पकड़ शपथ और नामांकन का मनोबल फिर से एक नकारात्मकता की ओर जाना तय है।

पायलट समर्थक कुछ नेताओं ने तो बयान शुरू कर ही दिए हैं। देखना यह है कि माकन के इस कदम को गहलोत ख़ेमा किस तरह लेता है। … और सबसे बड़ी बात यह है कि नए अध्यक्ष खडगे इसे किस तरह निबटाते हैं। मामला पेचीदा है क्योंकि जिस विवाद को लेकर यह सब हो रहा है कि माकन के अलावा खुद खड़गे भी हैं। किसी निर्णय पर पहुंचना इसलिए भी खटकने के लिए कठिन होगा। लगता है फिल्हाल इस विवाद को ताला जाएगा क्योंकि पार्टी गुजरात चुनाव के वक्त इस तरह के पचीदा मुद्दों में पड़कर नया विवाद खड़ा होने का रास्ता नहीं खुल रहा है।

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