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‘काम पर जाने के देश निकले थे, फट कर हट’: धमाकेदार धमाके की पत्नी बोली- इतना बड़ा साजिश की भनक तक नहीं लगी

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तैयार21 मिनट पहलेलेखक: सतीश शर्मा

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पुलिस का खुलासा- सरकार ने रेलवे लाइन के लिए जमीन एक तरफ की तो धूलचंद ने ब्रिज के भरोसे की कोशिश की।

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ढोलचंद के पिता बोले– मेरा नाम तो कोई जमीन ही नहीं है। वो तो बड़े भाई का नाम था। उसे हर्जाना भी मिला। फिर भी बेटा नहीं पता चला कि फाइल लेकर क्यों रहते थे? इतना बड़ा धमाका कर दिया।

मजदूर रेलवे ब्रिज पर धमाके के मास्टरमाइंड के पिता का ये बयान, अब पुलिस के खुलासे पर सवाल कर रहा है। क्योंकि पुलिस ने अपने खुलासे में बताया कि धूलचंद ने जमीन का भाई नहीं मिलने से नाराज धमाका बताया। उसी समय, पिता ने कहा कि उनके पिता के बड़े भाई थे और उन्हें अधिग्रहित कर लिया गया था।

धूलचंद के पिता सवजी।  जिसने बताया- जिस जमीन के मुआवजे के लिए बेटा दुर्घटना-उद्देश्य घूम रहा था, वो उनकी नहीं थी।

धूलचंद के पिता सवजी। जिसने बताया- जिस जमीन के मुआवजे के लिए बेटा दुर्घटना-उद्देश्य घूम रहा था, वो उनकी नहीं थी।

धूलचंद के पिता सावजी ने कहा, ‘वह पिछले कई सालों से जमीन के कागज का नकल लेकर घूम रहा था। हमने कई बार उससे जमीन के दस्तावेज के बारे में पूछा लेकिन वह हर बार बात करता रहा। पुलिस भी 3 दिन पहले अपने कमरे से 1 पेटी लेकर आई है। जब मेरे पिता के नाम पर कोई संपत्ति का दस्तावेज ही नहीं था तो हमें स्वतंत्र रूप से कौन सा आधार मिलेगा।’ इसलिए कहते हैं सवजी फूट-फूटकर रोते हैं। बड़ी मुश्किल से उनसे आगे की बात हो पाई।

अब सवाल उठता है- क्या धूलचंद किसी के बहकावे में आकर ये फट गया?

गिरने से करीब 35KM दूर एकलिंगपुरा संदेश भास्कर, पढ़ाई-वर्ष के गांव से रिपोर्ट…

ये वही गांव है, जहां रेलवे ब्रिज विस्फोट के कई झटके रहते हैं। पूरे गांव में 30 के करीब घर होंगे। सभी सितारे-पक्के घर पर दूर-दूर बने हैं। एक दूसरे से करीब आधा किलोमीटर। 12 नवंबर को इसी गांव के धूलचंद ने अपनी दो भतीजों के साथ पटरी पर विस्फोट कर पूरे राजस्थान को हिलाकर रख दिया था।

सौ साल के घर के आसपास कोई दूसरा घर नहीं है।  वहां जाने के लिए पैदल चलना है।

सौ साल के घर के आसपास कोई दूसरा घर नहीं है। वहां जाने के लिए पैदल चलना है।

भास्कर रिपोर्टर पथरीले रजिस्टर होते हुए पैदल-फिलहाल धूलचंद के घर का संदेश, जो सड़क से करीब 200 फीट ऊपर पहाड़ी पर बना है।

यहां धूलचंद के माता-पिता, पत्नी, 3 बच्चे और भाई रहते हैं। धूलचंद की करतूत पर सब शर्मिंदा हैं। पिता ने कहा- ‘अगर उन्हें आसानी से हो जाता है कि उनका बेटा इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे रहा है तो वे उसे उसी ट्रैक पर बांध देते हैं।’ इसके बाद रिपोर्टर धूलचंद के साथ देने वाले उसके दोनों भतीजों के घर भी पहुंचे, लेकिन वहां ताला लगा था। पूरा परिवार घर छोड़कर कहीं भी जा चुका है।

धूलचंद का घर बना है पहाड़, वहां से सड़क भी ठीक से नजर नहीं आती।

धूलचंद का घर बना है पहाड़, वहां से सड़क भी ठीक से नजर नहीं आती।

गांव बोलेवाले- बहुत गलत किया, अब जेल की हवा खाऊंगा

धूलचंद के घर बने हमें एक-दो लोग सड़क पर नजर आए। रुककर धूलचंद की हरकत के बारे में पूछा तो बोले- ‘जो बहुत गलत किया। अब जिंदगी भर जेल की हवा खानी होगी। ऐसा करने से क्या हासिल हुआ?’ धूलचंद के घर के बाहर ही उनके बुजुर्ग पिता सवजी मिले। वह अपनी उम्र का सहारा था पर अब वह उसका नाम भी नहीं लेना चाहता।

सवजी का पूरा परिवार इसी घर में रहता है।  धूलचंद अपने परिवार के लोगों से ज्यादा बात नहीं करता था।

सवजी का पूरा परिवार इसी घर में रहता है। धूलचंद अपने परिवार के लोगों से ज्यादा बात नहीं करता था।

पिता बोले- धमाके की आवाज मैंने भी सुनी, बेटा घर आया तो नॉर्मल था

सवजी ने बताया- ‘बेटे की करतूत पर बड़ा अफसोस है। बेटे को फांसी पर चढ़ाना चाहिए। अगर ट्रेन का हादसा होता है तो सैकड़ों लोग मौत के घाट उतर जाते हैं। यदि ऐसा होता है तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाता। देर रात 12 नवंबर की शाम को ब्लास्ट की आवाज हम लोगों ने भी सुनी थी। घटना के बाद रात को धूलचंद घर आया तो सामान्य था। दो दिन घर में रहने के बाद भी हम भनक तक नहीं पाए पाए। जब पुलिस घर पहुंची तो मैंने पूछा कि बेटे को क्यों ले जा रहे हो। पुलिस ने बाद में लौटने को कहा था। दो दिन बाद पता चला कि बेटा तो ब्लास्ट कर चुका है।

जावर माइंस पुलिस ने गुरुवार को धूलचंद जैकेट के साथ उसकी दो भतीजों को पकड़ा था।  तस्वीर में दो ही झटके दिख रहे हैं क्योंकि धूलचंद का दूसरा भतीजा नाबालिग है।

जावर माइंस पुलिस ने गुरुवार को धूलचंद जैकेट के साथ उसकी दो भतीजों को पकड़ा था। तस्वीर में दो ही झटके दिख रहे हैं क्योंकि धूलचंद का दूसरा भतीजा नाबालिग है।

हम बेटे की पैरवी करने के लिए कोर्ट की शरण नहीं लेंगे। सरकार उसे कड़ी से कड़ी सजा दे। अब उनकी बस पत्नी और 3 बच्चों के भविष्य की चिंता है। अगर मुझे आसानी से हो जाता है कि बेटा इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे रहा है तो मैं खुद उसे उसी ट्रैक पर बांध देता हूं।’ बेटे के करतूत पर अब फूट-फूटकर रोना आता है।

थोड़ा संभलने के बाद वह आगे के कथन हैं, ‘धूलचंद करीब तीन साल पहले मानसिक रूप से बीमार हो गया था। एक साल तक देवी-देवताओं के चौखट पर ले गए उसका इलाज विवरण। पिछले दो साल से बिल्कुल ठीक था। उसके जिद्द के कारण हम सभी बातें करने में बचते थे। वह अपनी पत्नी से भी कम बात करता था।

बीमारी में वह कई तरह के करतब कर चुकी है। राह लोगों पर पत्थर फेंकना। मैं कभी रेलवे के अधिकारियों से नहीं मिला। परिवार की ज़मीन हिंदुस्तान की जीत अधिग्रहित हुई थी। जब हमारे परिवार के मुआवजे के लिए 1970 में अधिकारियों से पता चला कि पहले जमीन तो रेलवे में एक्वायर हुई है। इसके बाद से परिवार में कई बार चर्चा हुई तो धूलचंद बार-बार रेलवे कोसता था। जमीन में मेरे पिता के नाम पर कुछ नहीं था। मेरे पिता के बड़े भाई के रूप में मीणा को मिला था। इस बात से भी धूलचंद खासा नाराज रहते थे।’

धूलचंद के घर के पीछे वाले हिस्से में एक ट्रैक्टर पहाड़ था, सवजी इससे खेती-किसानी का काम करते हैं।

धूलचंद के घर के पीछे वाले हिस्से में एक ट्रैक्टर पहाड़ था, सवजी इससे खेती-किसानी का काम करते हैं।

सवजी ने बताया- ‘बचपन से धूलचंद अपने काम से काम रखता था। उसे किसी ने जमीन के नाम से उकसाया होगा। कुछ महीनों से वह अमरपुरा, पलोदड़ा में एक कपड़े की दुकान पर नौकरी कर रहा था। जब से काम करने लगा, उसने मोबाइल भी पिया था। उसकी किसी से दोस्ती भी नहीं थी, न किसी तरह खाने-पीने या नशे की लत।

हमने कई बार उससे जमीन के दस्तावेज के बारे में पूछा लेकिन हर बार बात करता रहा। असल में दादा की संपत्ति मेरे पिता के अन्य भाइयों के नाम पर थी। स्वयंभू। पैच के मुताबिक उन्हें हिंदुस्तान जीत में प्रति परिवार से एक व्यक्ति को भी नौकरी दी गई।

हमारे परिवार में दो बेटे भी हैं, वे इन चीजों से बचते हैं। धूल चंद चंद की उसी जमीन के बारे में मन में मुआवजा की चाहत होगी? उन्हें हिंदुस्तान जीत समेत अलग-अलग जगहों पर अप्लाई करने पर अब तक कोई नौकरी नहीं मिली थी। मैंने मेरे जीवन भर कभी भी किसी विभाग या हिंदुस्तान जीत से जमीन के मुआवजे की मांग नहीं की। धूलचंद को अधूरा किस पर मिलेगा?

धूलचंद की पत्नी सुशीला।  7 साल पहले हुई थी शादी।  3 बच्चे हैं, दो तो उठकर भी नहीं सीख पाते हैं।

धूलचंद की पत्नी सुशीला। 7 साल पहले हुई थी शादी। 3 बच्चे हैं, दो तो उठकर भी नहीं सीख पाते हैं।

पत्नी बोली- इतना बड़ा साजिश की भागक तक नहीं लगी

धूलचंद की पत्नी सुशीला ने कहा- घटना के दिन वह काम पर जाने वाले बहुत से निकले थे। देर रात को आए तो भी ज्यादा बात नहीं की। वह काफी जटील हैं। ज्यादा किसी से बात नहीं करते थे। वे कभी-कभी घर पर इतने बड़े साज़िश की भनक तक नहीं लगाते। पति ने इस तरह की खुन्नस पाल ली। इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया। यह मैंने सोचा तक नहीं था।

पिता कर पलक जीत में काम

धूलचंद के पिता सवजी मीणा हिन्दुस्तान जीत की माइंस में फिटर के रूप में 1981 से 2001 तक काम कर चुके हैं। उनकी नौकरी उनके पिता के बड़े भाई के रूप में दिलवाई थी। बाद में रूपाजी के बेटे हो गए तो उन्होंने शिकायत कर हटवा दिया। सावजी के पिता 5 भाई थे। उनके पिता सबसे छोटे थे, ऐसे में उनके पिता के नाम पर मालिकाना हक नहीं था।

पहले भी समना, लेकिन धूलचंद नहीं माना

उन्होंने कहा कि 1970 में जब हिंदुस्तान की जीत जावर माइंस के पास भरड़िया में करीब 5 बीघा में अधिग्रहित हुई। इस दौरान जीत ने वादा किया था, जो भी जमेगा, उसके परिवार के एक-एक व्यक्ति को कंपनी में नौकरी दी जाएगी। पिता या मेरे पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे, इस कारण से मैंने कभी दावा नहीं किया। 2 साल पहले भी धूलचंद ने जावर मां को इस थाने के बाहर रखा था। मैंने काफी समना, मगर वह नहीं माना।

बड़े भाई शिक्षक बनने की कर रहे हैं तैयारी, छोटा पटवारी

धूलचंद के घर में उनके पिता और मां रहती हैं। उनके पिता सावजी ने दो शादियां की हैं। बड़े भाई बीएड कर चुके हैं। सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी करते रहते हैं। छोटा भाई है। सारारा तहसील के एक गांव में उसकी पोस्टिंग है। धूलचंद के 4 सूखे हैं, सभी की शादी हो चुकी है बंद।

धूलचंद की पत्नी सुशीला सरद के निम्बोदा क्षेत्र की है। धूलचंद के तीन बच्चे हैं। पांच साल का बेटा गांव के ही बेलीबाड़ी में पढ़ा जाता है। एक बेटा और बेटी छोटा है।

डीसी विकास शर्मा ने बताया कि ढोलचंद की मानसिक स्थिति को लेकर भी कई चीजें सामने आई हैं। उनके परिवार के कुछ लोगों का दावा है कि वे लंबे समय तक मानसिक रूप से बीमार हैं। हालांकि अब तक हमें कोई मेडिकल अकाउंट या इलाज से जुड़े डॉक्युमेंट नहीं मिले हैं। अभी धूलचंद से सभी कोणों पर पूछताछ हो रही है।

सवजी के पिता के बड़े भाई की जमीन थी
धूलचंद जिस का जिक्र कर रहा था। वो असल में सवजी के पिता के बड़े भाई के रूप में थे। दरअसल, सवजी के दादाजी के कुल 4 बेटे हैं। सबसे बड़े थावराजी, वेलाजी, रूपाजी, ज्ञानाजी, मोगाजी। सवजी के पिता मोगाजी मीणा सबसे छोटे भाई थे। जावर माइंस की जमीन चार भाइयों के नाम पर थी। धूलचंद जिस जमीन का जिक्र कर रहा है वो बड़े भाई रूपाजी की थी। जो अब रूपाजी के 2 बेटे रामाजी और जीवाजी की है। सवजी अभी एकलिंगपुरा के जिस घर में रहते हैं, वो 1995 में बनाया गया था।

दैनिक भास्कर की व्यापकता में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए…सबसे बड़ा धूलचंद सिर्फ 32 साल का है और दसवीं पास है। रेल लाइन निकालने के लिए सरकार जमी ले ली। स्वतंत्र रूप से और सरकारी नौकरी नहीं मिली तो विस्फोट की योजना बनाई। पीएम नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को इस रूट से ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना हुए थे। इसके बाद से धूलचंद लाइन को झूठ का षड्यंत्र रचने लगा।

अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए धूलचंद ने यूट्यूब पर कई वीडियो देखे। पुलिस की जांच में YouTube में 24 से ज्यादा वीडियो हिस्ट्री मिली है। इससे समझ आता है कि वह किस तरह से साजिश रच रहा था। इस योजना में उन्होंने अपने 18 साल के ओपनिंग लाइट और 17 साल के दूसरे नाबालिगों को भी शामिल किया।

वीडियो देखने के बाद तीनों ने एक साथ 30 साल की सूचियां सुवालका से संपर्क किया और दो सम्मोहक विस्फोटक हासिल किए और कार्रवाई को अंजाम दिया। हालांकि अब तक की पूछताछ में चयनकर्ताओं ने कहा है कि उनका मकसद किसी को मारना नहीं था। इसी के साथ डूंगरपुर में मिले छिपे हुए धक्कों से इस घटना का कोई संबंध नहीं है।

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अंकल और दो भतीजों की करतूत ने पूरे राजस्थान को 6 दिन तक हिलाकर रख दिया। पुलिस के साथ देश की सभी सुरक्षा एजेंसियां ​​बनाने में रेल पुल पर धमाके के कारण ढूंढने में लगी है। आखिरकार ब्लास्ट के 3 सिलसिलेवार गिरफ्तार किए गए।

पुलिस जांच में कारण का तो खुलासा हो गया, लेकिन कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।

इस योजना को कैसे अंजाम दिया?

क्या ये पहले किसी आपराधिक गिरोह से जुड़े थे?

रेल लाइन पर ब्लास्ट करने के लिए साजिश रची कैसे? (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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