HomeIndia Newsगायत्री देवी की हजारों करोड़ की संपत्ति पर साम: आपस में क्यों...

गायत्री देवी की हजारों करोड़ की संपत्ति पर साम: आपस में क्यों लड़ रहे हैं जयपुर राजघराने की भाई-बहन, जानिए क्या है इसकी जड़ें

Date:

Related stories

बंगालियों परेश के बयान, ममता के कहने का तंज: अभिषेक बनर्जी बोले- बीजेपी नेता सुवेंदु ने किया विरोध तो ED-CBI नोटिस भेजेंगे

हिंदी समाचारराष्ट्रीयपश्चिम बंगाल टीएमसी अभिषेक बनर्जी बनाम बीजेपी शुभेंदु...

रायपुर25 मिनट पहलेलेखक: नीरज शर्मा

- Advertisement -

जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी की वसीयत से जुड़े मामले में पिछले दिनों जयपुर की अदालत ने उनके पोते-पोती को बड़ी राहत दी है। इससे गायत्री देवी की वसीयत से आरबीआई संबंधी दिशानिर्देश में आ गया है। पहले पढ़ें, क्या है गायत्री देवी की वसीयत…

- Advertisement -

- Advertisement -

‘मैं जयपुर की राजमाता गायत्री देवी। यह पुष्टि करता हूं कि मेरे दादा-पोती महाराज देवराज और ललित्या से मेरे प्रेम और स्नेह के कारण मैं रामबाग पैलेस होटल प्राइवेट लिमिटेड, जय महल होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, एसएमएस इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, सवाई माधोपुर लॉज प्राइवेट लिमिटेड और जयपुर ताज उद्यमों को संयुक्त रूप से महाराज देवराज और राजकुमारी लीलिया को सर्वनाश करने के लिए पहले ही रद्द करना जरूरी डीड पर हस्ताक्षर कर अवरुद्ध कर रहा हूं। यह शेयर मेरे बेटे महाराज जगत सिंह के निधन पर जयपुर डिस्ट्रिक्ट जज के ऑर्डर से मुझे प्राप्त हुए हैं।

जीवन सक्रिय है, इसलिए मैं अपने परिवार में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अपनी जाम का प्रावधान करना चाहता हूं। पूर्व के सभी वासियों को पलटते हुए अब मैं घोषणा करता हूं कि इस अंतिम इच्छा के अनुसार मेरी मृत्यु पर मेरी सभी मृतक, ज्वेलरी, कैश, स्कूलों की कंट्रोलिंग देवराज और लालित्या को हमेशा के लिए मिल जाएंगे। मुझे विश्वास है कि मेरी इन सभी को सभी तरह से पूरा महाराजा भवानी सिंह, महाराज पृथ्वी सिंह और महाराज जय सिंह मेरे पोते-पोतियों को पूरा सपोर्ट करेंगे।’

11 साल की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद पिछले दिनों सिर्फ इस बात का फैसला आया कि वसीयत के वैध या अवैध साबित होने तक उनके पोते-पोती गायत्री देवी की नौकरी से जुड़े फैसले ले सकते हैं। गायत्री देवी के सौतेले बेटों की याचिका पर जयपुर के अपर जिला जज ने गायत्री देवी की संपत्ति को लेकर उनके पोते-पोती को किसी भी तरह के फैसले का फैसला करने से रोकने से इंकार कर दिया है। यह विवाद और पेचीदा हो सकता है क्योंकि याचिका दायर करने वाले गायत्री देवी के परिवार के सदस्य अब उच्च न्यायालय जा सकते हैं।

जानकारियों के मुताबिक यह पूरी संपत्ति करीब-करीब 30 हजार करोड़ की है, हालांकि इसका लेबल फॉर्मेशन तभी हो सकता है जब पूर्व राजपरिवार की सभी प्रॉपर्टी की डिटेल सामने हो।

जयपुर के पूर्व राजघरानों के सदस्यों के बीच मामला जितना गहरा है, उतना ही उलझा हुआ भी है। आज की संडे बिग स्टोरी इस झंझट के उलझे हुए दागों को एक-एक कर सुलझा लेंगे और आप का दावा है कि देश की संसद और राष्ट्रपति भवन जैसी इमारतों के लिए जमीन दान करने वाले जयपुर राजघराने में कौन-कौन सी बेशकीमतीज संपत्ति को लेकर कितना चल रहा है और चल रहा है। यह कैसे समाप्त हो सकता है?

जानिए करोड़ों की संपत्ति का सबसे पहला मौका किसकी संपत्ति के बीच है?

लड़ाई किस बात को लेकर है?
जगत सिंह की शादी थाईलैंड की राजकुमारी प्रियनंदना सिंह से हुई थी। जगत सिंह अक्सर लंदन में ही रहते थे, लेकिन कुछ ही सालों में दोनों का तलाक हो गया। प्रियनंदना तलाक के बाद थाईलैंड रहने लगी। दोनों की एक बेटी ज्यादातर कुमारी और बेटा देवराज भी मां के साथ हैं। 1997 में जगत सिंह की लंदन में मृत्यु हो गई, लेकिन जगत सिंह के निधन के बाद ग्रैंड गायत्री से मिलने जयपुर आते-जाते रहे।

जयपुर के आखिरी महाराज सवाई मान सिंह ने सबसे छोटे बेटे जगत सिंह को तोहफे में जयमहल पैलेस दिया था। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार जगत सिंह ने अपने भाई पृथ्वी सिंह व जय सिंह के साथ मिलकर एक कंपनी लॉन्च की और जयमहल पैलेस को फाइव होटल बनाने के लिए ताज ग्रुप को दिया। जयमहल पैलेस में जगत सिंह के 99 प्रतिशत शेयर थे और पृथ्वी सिंह व जय सिंह के पास 1 शेयर। वहीं संपत्ति बंटवारे में रामबाग पैलेस में जगत सिंह को 27 प्रतिशत शेयर मिले थे।

जगत सिंह ने प्रियनंदना सिंह और बच्चों को संपत्ति से बेदखल करते हुए 1996 में पूरी संपत्ति अपनी मां गायत्री देवी के नाम कर दी थी। उनकी मृत्यु के बाद गायत्री देवी ने इन दृश्यों की निगरानी विजित सिंह को सौंपी। इसकी भी एक बड़ी वजह थी। दरअसल, गायत्री देवी के भाई की बेटी यानी उनकी भतीजी देविका देवी की शादी सौतेले बेटे पृथ्वी सिंह से हुई थी। विजित देविका देवी और पृथ्वी सिंह के ही बेटे हैं।

सूत्रों के अनुसार इन सबके देवराज और लालित्या कुमारी ने संपत्ति पर हक के लिए अदालती लड़ाई लड़ी। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार प्रियनंदना सिंह ने आरोप लगाया कि पृथ्वी सिंह ने जयमहल पैलेस से जगत सिंह का शेयर घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया और अपने पास 93 प्रतिशत शेयर रख दिए। वहीं, रामबाग पैलेस में भी जगत सिंह के शेयर 27 से 4 प्रतिशत पर आ गए। 2006 में इन सबके खिलाफ देवराज और लालित्या कुमारी ने कोर्ट केस फाइल किया।

तमाम अदालती लड़ाईयों के बीच इस दौरान देवी-देवराज व गायत्री देवी के बीच रिश्ते और अच्छे हो गए। 2009 में गायत्री देवी ने अपनी वसीयत के माध्यम से सभी संपत्ति लालित्य-देवराज के नाम कर दी।

यहां से धमाका और बढ़ गया। गायत्री देवी देश के सबसे ऊंचे होटल रामबाग पैलेस के कैंपस में ही बनी लिली पूल में रहती थीं। यह महल फ्रेंच स्टाइल में बना है। गायत्री देवी के निधन के बाद देवराज का लिली पूल खाली करने का नोटिस दिया गया। इससे नाराज देवराज ने गायत्री देवी की पहली खबर मीडिया के सामने आकर कहा कि पृथ्वी सिंह उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। इसके बाद मामला आयोजन किया गया।

2011 में पृथ्वी सिंह, उर्वशी कुमारी ने जयपुर कोर्ट में गायत्री देवी की वसीयत पर सवाल और केस दायर करते हुए कहा कि जगत सिंह गायत्री देवी के बेटे नहीं थे। उन्हें पहले ही इसरदा जागीर के जागीरदार बहादुर सिंह को गोद दे दिया गया था। एक बार गोद लेने के बाद बेटा वापस नहीं आता।

देवराज के वकील एडवोकेट रजत रंजन ने बताया कि मैंने कोर्ट में जवाब दिया कि गायत्री देवी और महाराजा मान सिंह ने उन्हें बेटा माना है और इससे संबंधित दस्तावेज भी पेश किए। वहीं, पृथ्वी सिंह, उर्वशी कुमारी और विजित सिंह के वकील रामजी लाल गुप्ता ने बताया कि हम जगत सिंह के गोद में जाने की रस्म से जुड़े फोटो सहित कई दस्तावेज कोर्ट के अधिशासी थे।

11 साल पहले कोर्ट से अपील की गई थी कि जब तक केस कोर्ट में चल रहा है तब तक देवराज और लालित्या को पाबंद कर दिया जाए कि वो वसीयत के आधार पर मिले संपत्ति को बिक्री से जुड़े कोई जजमेंट नहीं लें। इसे पिछले दिनों कोर्ट ने खारिज कर दिया।

साल भर पहले रामबाग पैलेस और जयमहल पैलेस कोर्ट के बाहर हुआ समझौता
करीब साल पहले दोनों प्रॉपर्टी पर जय सिंह, विजित सिंह और देवराज-लालित्या कुमारी के बीच कोर्ट के बाहर समझौता हो गया है। सूत्रों के अनुसार कोर्ट केस से परेशान पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट की पहल और आपसी सामंजस्य से दोनों पक्षों ने एक-एक होटल का हक हासिल किया और दूसरे में से छोड़ दिया।

इस समझौते में जय सिंह व विजित सिंह को 48 एकड़ में फैला लग्जरी रामबाग पैलेस मिला तो देवराज-लालित्य को जयमहल पैलेस मिला। दोनों की संपत्ति करीब 15 हजार करोड़ की है, लेकिन इनमें से कई के अलावा और भी कई संपत्तियां हैं, जिन पर दोनों तरफ के बीच झगड़ रहे हैं।

यह संपत्तियां कौन सी हैं और क्या प्रपत्र है?
गायत्री देवी का घर लिली पूल रामबाग पैलेस होटल का ही हिस्सा है। लिली पूल बंगला सहित, एसएमएस इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, पर्ल डूंगरी किला, सवाई माधोपुर स्थित रॉयल फैमिली के विमान भवन सहित अचल जुआ पर कोई फैसला नहीं हुआ।

माना जाता है कि ये प्रॉपर्टी भी करीब-करीब 15 हजार करोड़ से ज्यादा हैं। हालांकि अधिकारिक रूप से इसका कोई डेटा नहीं है। इसके अलावा गायत्री देवी के शेयर, कैश, ज्वेलरी, बेंटले कार (गायत्री देवी के नाम), जगुआर कार (जगत सिंह के नाम) की कीमत अरबों में हैं, इसके साथ ही कई एंटीक आइटम ऐसे हैं, विशिष्ट पहचान भिन्नाना संभव नहीं है।

लिलीपूल से कई सामान चोरी के आरोप
करीब 11 साल पहले आरोप लगाए गए थे कि गायत्री देवी की मौत के बाद उनके घर लिली पूल से कई कीमती सामान चुरा लिए गए। इन छुट्टियों को लेकर खूब विवाद हुआ, हालांकि कुछ भी साबित नहीं हुआ।

क्या कोर्ट केस के बाहर समझौता संभव नहीं है?
सूचनाओं के मुताबिक भारत के कई राजघरानों के परिवार, सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर कई दशकों से कोर्ट में मामले चल रहे हैं। यह मामले बहुत पचीदा हैं जो इनमें से समय लगता है। जैसे देवराज, लालित्य कुमारी और जय सिंह व विजित सिंह के बीच कोर्ट के बाहर रामबाग पैलेस और जयमहल पैलेस को लेकर समझौता हुआ, वैसे ही समझौते का रास्ता अन्य जाम को लेकर भी खुला है। दोनों तरफ इसे लेकर इस साल कुछ दौर की बातचीत भी हुई है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है।

सूत्रों के अनुसार रामबाग पैलेस होटल का जुमला लिमिट पूल पर भी दावा कर रहा है, लेकिन देवराज का तर्क है कि जब पर्ल डुंगरी किला उनके पास नहीं है तो लिलि पूल के पास बने रहना चाहिए। गायत्री देवी पहले पर्ल डूंगरी किले में ही रहती थीं, परिवार की सलाह के बाद वे लिली पूल में आने लगीं। वर्तमान मोती डूंगरी किला विजित सिंह के पास है। हालांकि विजित सिंह के वकील रामजी लाल गुप्ता ने कहा कि इस मामले में अभी कोर्ट केस चल रहा है।

जयपुर राजपरिवार के अलावा बाहरी लोगों का भी दावा
जयपुर के पूर्व राजपरिवार की संपत्ति विवाद केवल उनके परिवार तक ही नहीं है। क्लैनाड देवराज, लालित्य, जयसिंह और विजित सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा अकूट पर बाहरी लोगों को भी प्राथमिकता दी जाती है।

ठाकुर श्यामसिंह और उनके पावर ऑफ अटॉर्नी बलवान सिंह ने भी कोर्ट में राजपरिवार से जुड़ी कुछ जमीनों पर अपना दावा जमा रखा है। श्याम सिंह ने खुद को पूर्व राजपरिवार के सेवक के रूप में काम करने का दावा किया था। श्याम सिंह ने दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन के पास करीब 1500 वर्ग गज जमीन और मानसरोवर के शिप्रापथ इलाके में 2700 वर्ग मीटर जमीन पर जमीन का दावा किया है।

ये भी पढ़ें-

जलती चिता के पास सोती है ये औरत:15 हजार शव जलाए, श्मशान में 9 बच्चों का जन्म

श्मशान में जलती चिताएं देखकर 8 साल की माया डरकर मां के आंचल में छिप गई थी। दिन के अंधेरे में जैसे अंधेरा होता है, सहम जाती थी, लेकिन मां की एक बात ने उसकी जिंदगी बदल दी। आज वही माया पिछले 60 सालों में श्मशान में 15,000 से ज्यादा लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं। (पूरी खबर पढ़ें)

खबरें और भी हैं…

Source link

- Advertisement -

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here