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चीनी, जर्मन हो या हिंदी; पर मां और पिता जैसे शब्दों का उच्चारण काफी समान होता है चीनी, जर्मन या हिंदी; लेकिन माता और पिता जैसे शब्दों का उच्चारण बहुत समान है।

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6 मिनट पहले

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दुनिया के किसी हिस्से में बोली जाने वाली आकाशगंगा में भले ही समानता न हो, लेकिन कुछ शब्दों की आवृत्ति लगभग एक सी होती है। चाहे वह जर्मन हो, चीनी या हिंदी। सभी आकाशगंगा में मां और पापा के बोलने का तरीका लगभग एक जैसा होता है। इतना ही नहीं, कुछ शब्द ऐसे भी हैं जिनका अक्षर का क्रम तो बदल जाता है, लेकिन शब्दों की ध्वनि एक जैसा होता है।

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हाल ही में एक अध्ययन में सामने आया कि पिता और माता के शब्दों की पुष्टि होती है। इसके बावजूद अंग्रेजी, ग्रीक, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन और इतालवी-भाषा में इनकी बोलने की विधि और ध्वनि एक सा है। कई आकाशगंगा में ‘मां’ में एम की ध्वनि एक जैसी है।

बच्चे स्वर जलदी समझते हैं
बच्चा कई बार बी या पी की ध्वनि सरणी में बोलता है। इसी तरह टी और डी की ध्वनियां भी तारों के समान होती हैं, जिनमें दांतों के बीच जीभ के टैप से बात की जाती है। इसलिए चिपकी, तागालोग में टास्क या क्वेशुआ में टायटा एक जैसा होता है। कुछ अफ्रीकी और इंडो-यूरोपीय समुद्री सीमा के जलचर (वो शब्द जो मुंह में हवा के दबाव का उपयोग करते हैं) एक जैसे होते हैं।

कुत्ते के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में बच्चे अक्सर बर्न-भौं, अंग्रेजी में बाउ-वाउ और स्पेनिश में गुआ-गुआउ कहते हैं। बच्चे के स्वर को समझने में अच्छे होते हैं, लेकिन अंग्रेजी बोलने वाले कांसोनेंट का बेहतर तरीके से उपयोग करते हैं। इसके बावजूद 5 साल की उम्र तक लिखे हुए शब्दों को बोलने में दृढ़ होता है। बच्चा सात साल तक स्पष्ट रूप से उच्चारित कर सकता है।

भाषा बदली, पर कुछ शब्द की सवृत्ति वैसी ही
इंसान का अफ्रीका से पलायन का घिनौनापन दुनिया में एक ही भाषा बन रहा होगा। एक लाख साल पहले अस्तित्व में आई। हजारों साल में कई बदलाव हुए। भाषा अलग-अलग हो गई, लेकिन कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति आज भी वैसी ही है।

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