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चीन से बड़ी हुई भारतीय छात्रों की संख्या, सुनक ने किया जल्द समाधान का वादा | यूके इमिग्रेशन बनाम ऋषि सुनक; चीनी छात्र बनाम भारतीय छात्र सांख्यिकी

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लंदन3 मिनट पहले

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ब्रिटेन में दूसरे देशों से आने वालों की संख्या 5 लाख पार कर ली गई है। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (ONS) ने साल 2021 से जून 2022 तक के आंकड़े जारी किए हैं। ONS के मुताबिक इस समय यूरोप से बाहर आने वाले लोगों की तादाद काफी हद तक देखी जा सकती है। इन आंकड़ों पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के प्रवक्ता ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नामांकन की संख्या को कम करने के लिए पूरी तरह से डेडिकेटेड हैं।

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प्रमाणन की संख्या रिकॉर्ड पर बढ़ने के पीछे चिंताओं के बारे में दी गई छूट को बताया गया है। ONS के आंकड़ों में यह भी सामने आया कि इस दौरान ब्रिटेन में बाहर से रीडिंग आए छात्रों में सबसे ज्यादा भारत के रहे। इससे पहले चीन के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा थी। भारतीय छात्रों को दिए गए वीजा में 273 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

हाल ही में जारी आंकड़ों के बाद अब ब्रिटेन में बाहर से पढ़ने वाले छात्र सबसे ज्यादा भारतीय हैं।

हाल ही में जारी आंकड़ों के बाद अब ब्रिटेन में बाहर से पढ़ने वाले छात्र सबसे ज्यादा भारतीय हैं।

बाल मजदूर वीजा हासिल करने वाले सबसे ज्यादा भारतीय

सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि स्कूली कामगारों की श्रेणी में भी ब्रिटेन से सबसे अधिक वीजा प्राप्त करने वाले भारतीय ही हैं। एक साल में भारत के 56042 शिल्ड वर्कगारों को ब्रिटेन का वीजा मिला। वहीं हेल्थ एंड केयर सेक्टर में भी वीजा हासिल करने वाले भारतीय ही रहे। इस श्रेणी में कुल वीजा का 36 फीसदी हिस्सा भारतीयों का है। ONS ने यह भी बताया कि एक साल में जुड़ गए उन लोगों की जोड़ी नहीं बनी है जो छोटी नावों में समुद्र के रास्ते से आए हैं। इससे पहले साल 2015 में ब्रिटेन में सबसे ज्यादा 3,30,000 अचल संपत्ति का रिकॉर्ड था।

ब्रिटेन में रहने वाले सबसे ज्यादा यूरोपीय संघ के लोग हैं

एनओएस के आंकड़ों में यह भी मिला की एक साल के दौरान ब्रिटेन को छोड़ने वाले सबसे ज्यादा लोग यूरोपीय संघ के रहे। पिछले एक साल में ब्रिटेन आने वाले प्रवेश में यूक्रेन, अफगान और हांग-कांग के लोग भी शामिल हैं। जिसने युद्ध और चीन की प्रताड़नाओं से परेशान होकर अपना देश छोड़ा है। इन देशों से ब्रिटेन के करीब 1,38,000 लोग आए।

इसकी एक वजह ब्रेकजिट डील भी होने जा रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की बात तो ब्रेक्जिट के बाद मार्च 2022 से केवल नौकरी सेक्टर से 7000 जॉब लंदन से दूसरे यूरोपियन देश की ओर स्विच कर गई। एक दूसरे रिपोर्ट के मुताबिक 440 बेरोजगार कंपनियां भी ब्रिटेन छोड़ चुकी हैं।

समझौते को ब्रिटेन में आने से रोकने पर नाकामयाब रहे डेविड कैमरून को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

समझौते को ब्रिटेन में आने से रोकने पर नाकामयाब रहे डेविड कैमरून को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

ब्रिटेन में काफी पुराना समझौता है

ब्रिटेन में अनन्य काफ़ी पुराना है। ब्रेक्जिट से पहले लेबर पार्टी के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने एक साझेदारी की संख्या कम करने का वादा किया था। उनसे मिलने के हिसाब से एक साल में आने वाली प्रविष्टियों की संख्या को एक लाख से कम करना था।

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