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Friday, March 10, 2023
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जिनपिंग के ताउम्र चीनी राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ: संसद के तीसरे कार्यकाल में रमजान, 2018 में राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल की शर्त खत्म हुई थी

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झा2 मिनट पहले

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल में आज मुबारक मुबारक हो गया। माना जा रहा है कि अब वो ताउम्र राष्ट्रपति रह सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 69 साल के जिनपिंग ने 2018 में राष्ट्रपति पद के लिए दो टर्म या 68 साल की उम्र होने पर होने की बाध्यता खत्म कर दी थी। किस वजह से वो अब आने वाले सभी राष्ट्रपति चुनाव में राेक सकते हैं।

चीन की संसद- नेशनल पीपल्स कांग्रेस की बैठक जिनपिंग के कार्यकाल में मुबारक पर शुरू हुई। अक्टूबर 2022 में चाइना कम्युमिस्ट पार्टी (CCP) की बैठक में वे तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति चुने गए। तब उन्होंने कहा था- दुनिया के बिना चीन का इवोल्यूशन नहीं हो सकता और दुनिया को भी चीन की जरूरत है।

लगातार अपनी ताकतें बढ़ा रहे हैं शीपिंग जिनपिंग
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार शी जिनपिंग चीन के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं। उन्हें ये सारी ताकतें राष्ट्रपति होने की वजह से नहीं बल्कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का जनरल सेक्रेटरी होने की वजह से मिली है।

कम्युनिस्ट पार्टी और चाइना सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। जिसके 89 करोड़ मेंबर हैं। चीन की पॉलिटिकल सिस्टम्स की सभी शाखाएँ पर इसका दबदबा रहता है। पिछले साल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने उस नियम को खत्म कर दिया था, जिसमें कोई भी नेता केवल दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है। इस बदलाव के बाद शी जिनपिंग के जीवन भर राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो गया था। जिनपिंग चीन के वे नेता शामिल हो गए हैं जिनके विचार को संविधान में शामिल किया गया है।

जिनपिंग के राष्ट्रपति बने रहना भारत के लिए खतरा कैसे है…

1. भारत-चीन सीमा पर टकराव बढ़ सकता है
भारत और चीन के बीच चार हजार किलोमीटर से ज्यादा ऊंची सीमाएं हैं। इसमें कई जगह विवाद है। डोकलाम और गलवान घाटी के विवाद भी इसी तरह के थे। जिनपिंग को स्थायी अध्यक्ष बने रहने की स्वतंत्रता से असीमित शक्तियां मिल जाएंगी। ऐसे में सीमाओं के साथ लाइन ऑफ कंट्रोल पर अपनी ताकत दिखा सकता है। इससे भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

2. बीआरआई और पाकिस्तान में कॉरिडोर को बढ़ावा देना
चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव यानी BRI प्रोजेक्ट के दौरान प्रेसिडेंट के रहने के दौरान शुरू हुआ था। इसके जरिए वन बेल्ट वन रोड के जरिए चीन दुनिया भर के देशों को जोड़ रहा है। भारत के पड़ोसी देशों में इस सड़क से चीनी सेना के ढेर की आसान हो जाएगी। वहीं, जिनपिंग की अगुआई में चीन-जापान इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसका भारत विरोध कर रहा है।

3. भारत को तीन तरफ घिनौनी रणनीति
चीन का कर्ज डूबकर श्रीलंका बदहाल हो गया है। अब उसका चाइना हंबनटोटा पोर्ट उपयोग कर रहा है। हाल ही में चीन का जासूसी जहाज भी पहुंचने वाला था। अटलांटा, पाकिस्तान को चीन लगातार सैन्य सहायता दे रहा है। ये आधुनिक हथियार भी शामिल हैं, वास्तव में स्थिर रहते हैं भारत ही है। वहीं, नेपाल में भी चीन BRI के जरिए अपना दखल बढ़ा रहा है। इससे भारत की ओर से घेराबंदी होने का खतरा बढ़ गया है।

4. इंडो-पेसिफिक और हिंद महासागर में दखल
हिंद महासागर में चीनी नौसेना का दखल तो है ही, साथ ही दक्षिण चीन सी (दक्षिण चीन सागर) में उसका जापान, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया से भी टकराव है। शेनकाकू आईलैंड्स को लेकर उसका जापान से पुराना विवाद है। चीन इन द्वीपों पर कब्जा करके वहां के फाइटर जेट्स को रोकना चाहता है। इससे भारत की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

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