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तूफान के बीच लॉन्चिंग की तैयारी, आज 11.34 बजे उड़ान भरेगा रॉकेट | नासा आर्टेमिस 1 मून मिशन लॉन्च फ्लोरिडा वीडियो अपडेट | मून मिशन लॉन्च

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फ्लोरिडा4 मिनट पहले

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने चंद्रमा मिशन ‘आर्टेमिस-1’ को आज तीसरी बार लॉन्च करने की कोशिश कर रही है। रॉकेट सुबह 11.34 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा। इससे पहले 29 अगस्त और 3 सितंबर को भी लॉन्चिंग के प्रयास किए गए थे। हालांकि तकनीकी गड़बड़ी और मौसम खराब होने के कारण ये संभव नहीं हुए थे।

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नासा के मुताबिक, हाल ही में फ्लोरिडा में आए तूफान निकोल ने मिशन को नुकसान पहुंचाया है। अंतरिक्ष यान का एक टुकड़ा टूटा है। इसकी वजह से लिफ्ट ऑफ में परेशानी हो सकती है। वैसे तो लॉन्च से पहले इसे फिक्स कर दिया जाएगा, लेकिन परेशानी पर नई तारीख 19 या 25 नवंबर तय की जाएगी।

आगे पढ़िए आर्टे मिस मिशन क्या है, यह अपोलो मिशन से अलग है और इसकी कीमत कितनी होगी। इससे पहले आप हमारे पोल में हिस्सा ले सकते हैं…

नासा के आर्टे मिस मिशन को 5 पॉइंट्स में समझें…

1. चंद्रमा को चांद पर भेजेगा आर्टेमिस मिशन

  • अमेरिका 53 साल बाद एक बार फिर आर्टेमिस मिशन के जरिए चांद पर चांद लगाने की तैयारी कर रहा है। यह तीन कनेक्शनों में है। आर्टेमिस-1, 2 और 3। आर्टेमिस-1 का रॉकेट चंद्रमा की कक्षा तक जाएगा, कुछ छोटे उपग्रह छोड़ देंगे और फिर स्वयं की कक्षा में ही स्थापित हो जाएंगे।
  • 2024 के आसपास आर्टेमिस-2 को लॉन्च करने की योजना है। इसमें कुछ एस्ट्रोनॉट्स भी झिझकते हैं, लेकिन वे चांद पर नहीं दिखते। वे सिर्फ चांद की कक्षा में घूमते हुए वापस आ जाएंगे। इस मिशन की अवधि बहुत अधिक होगी।
  • इसके बाद अंतिम मिशन आर्टेमिस-3 को रवाना किया जाएगा। इसमें जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स चांद पर उतरेंगे। यह मिशन 2025 या 2026 में लॉन्च किया जा सकता है। पहली बार महिलाएं भी ह्यूमन मून मिशन का हिस्सा बनीं। इसमें रंग पर्सन (श्वेत से अलग नस्ल का व्यक्ति) भी क्रू मेंबर होंगे। एस्ट्रोनॉट्स चांद के साउथ पोल में मौजूद पानी और बर्फ पर नजर डालेंगे।

2. आर्टेमिस-1 मिशन नासा के लिए परीक्षण उड़ान

  • आर्टेमिस-1 प्रमुख मिशन के लिए एक परीक्षण उड़ान है, जिसमें किसी अंतरिक्ष यात्री को नहीं भेजा जाएगा। इस उड़ान के साथ वैज्ञानिकों का मकसद चांद पर एस्ट्रोनॉट्स के लिए सही स्थिति सुनिश्चित करना है। मिशन के तहत नासा का ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) मेग्रेकेट’ और ‘ओरियन क्रू सैप्स’ चंद्रमा पर पहुंचेंगे।
  • आमतौर पर एस्ट्रोनॉट्स में क्रूज के नमूने पाए जाते हैं, लेकिन यह खाली समय है। मिशन 42 दिन 3 घंटे और 20 मिनट का है, जिसके बाद यह धरती पर वापस आ जाएगा। अंतरिक्ष यान कुल 20 लाख 92 हजार 147 किलोमीटर की यात्रा तय करेगा।

3. 50 साल पुराने अपोलो मिशन से अलग है आर्टेमिस

  • अपोलो मिशन की आखिरी और 17वीं फ्लाइट 1972 में उड़ान भरी थी। इस मिशन की परिकल्पना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जे.एफ. कैनेडी ने सोवियत संघ को मात देने के लिए की थी। उनका लक्ष्य अमेरिका को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में पहले स्थान पर स्थापित करना था। हालांकि करीब 50 साल बाद माहौल अलग है।
  • अब अमेरिका आर्टे मिस मिशन के जरिए रूस या चीन को मात नहीं देना चाहता। नासा का मकसद पृथ्वी के बाहर स्थित चीजों को अच्छी तरह एक्सप्लोर करना है। चांद पर जाकर वहां के वैज्ञानिक बर्फ और मिट्टी से ईंधन, खाना और इमारतें बनाना चाहते हैं।

4. आर्टे मिस मिशन की लागत 7,434 अरब रुपए है
नासा ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल के मुताबिक, 2012 से 2025 तक इस प्रोजेक्ट पर 93 बिलियन डॉलर यानी 7,434 अरब रुपये का खर्चा आया। वहीं, हर फ्लाइट 4.1 बिलियन डॉलर यानी 327 अरब रुपए की धारा। इस प्रोजेक्ट पर अब तक 37 अरब डॉलर यानी 2,949 अरब रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

5. दशकों से चल रहा नासा का ह्यूमन मून मिशन

  • SLS योजना की योजना 2010 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में बनी थी। वे एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर झुकना चाहते थे, लेकिन मिशन में देरी के बाद सरकार ने इसे बंद करने का फैसला लिया।
  • हालांकि अमेरिकी संसद ने मिशन को जिंदा रखा है। नासा को SLS रॉकेट और ओरियन क्रू कैप्सूल को जारी रखने की योजना के लिए कहा गया था। इसके तहत लॉन्चिंग 2016 में लॉन्च की गई थी। फिर देरी के बाद डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने 2017 में आर्टेमिस मिशन को निगमित नाम दिया।
  • 2019 में नासा ने बताया कि रॉकेट को एक साल में तैयार किया जा सकता है। इसी साल एक सरकारी रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि नासा के मिशन में देरी से सरकार को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद कला मिशन को सफल बनाने के प्रयास जारी हैं।

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