HomeIndia Newsदल बदले अधिकारियों का भी कटेगा टिकट: केंद्र सरकार दल-बदल कानून में...

दल बदले अधिकारियों का भी कटेगा टिकट: केंद्र सरकार दल-बदल कानून में बदलाव की तैयारी में, कई राजनीतिक दलों पर सहमति बनी

Date:

Related stories

बंगालियों परेश के बयान, ममता के कहने का तंज: अभिषेक बनर्जी बोले- बीजेपी नेता सुवेंदु ने किया विरोध तो ED-CBI नोटिस भेजेंगे

हिंदी समाचारराष्ट्रीयपश्चिम बंगाल टीएमसी अभिषेक बनर्जी बनाम बीजेपी शुभेंदु...

19वीं सदी में बनी 2 मंजिला इमारत जल कर खाक हुई | 19वीं शताब्दी में बनी दो मंजिला इमारत जलकर खाक हो गई

प्रत्यक्षएक मिनट पहलेकॉपी लिंकअमेरिका के प्रत्यक्ष में रविवार सुबह...
  • हिंदी समाचार
  • राष्ट्रीय
  • भारत का दलबदल कानून; दल-बदल विरोधी कानून में बदलाव की तैयारी में केंद्र सरकार, कई राजनीतिक दलों ने जताई सहमति

नई दिल्लीएक मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
- Advertisement -
- Advertisement -

केंद्र सरकार दल-बदलते कानून में जल्द ही नया प्रावधान जोड़ा जा रहा है। अब इस कानून के दायरे में पंजीकृत सभी प्राधिकरणों को शामिल किया जाएगा, भले ही वे निर्वाचित प्रतिनिधि न हों। अगर पार्टी सहकर्मी चुनाव में खराब हुए हैं तो वे अगले पांच साल के चुनाव में नहीं लड़ेंगे। सूत्रों के अनुसार कानून मंत्रालय आगामी बजट सत्र के दौरान यह संशोधन की तैयारी में है। दल-बदल कानून में संशोधन का मकसद चुनाव के वक्त पार्टी अलग-अलग रिकॉर्ड हासिल करने की परिधि पर फैसला लेना है।

- Advertisement -

कानून मंत्रालय की सूत्रों की मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी चुनाव के वक्त दल-बदल को लेकर चिंताजाते रहे हैं। यह कहना है कि यह खरीद-फरोख्त के साथ ही स्वतंत्र और पूरे चुनाव के खिलाफ है। भय या लालच की वजह से पार्टी बदलने की परंपरा कुछ सालों में दी गई है।

छह महीने से कम समय पर पार्टी नहीं बदल सकते हैं
अब कानून मंत्रालय ऐसा प्रावधान कर रहा है, जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधि और पार्टी सहभागी विधानसभा या सप्ताह का कार्यकाल समाप्त होने में छह महीने से कम समय में पार्टी नहीं बदलेगी। कानून में संशोधन होने के बाद यदि कोई सहयोगी ऐसा करता है तो 5 साल के लिए किसी दूसरी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ना संभव नहीं है।

हालांकि, निर्दलीय चुनाव लड़ने की छूट बरकरार है। ज़ोरदार है कि राजनीतिक दलों के अधिकारियों की सूची निर्वाचन आयोग के पास रहती है। किसी का पद बदला जाता है तो उसकी सूचना आयोग को दी जाती है। यदि किसी चुनाव के समय पार्टी बदलेगी तो पार्टी की सूचना पर आयोग उसका चुनाव लड़ने पर रोक लगाएगा।

बगावत से सभी दल परेशान
सभी पार्टियों को चुनाव के दौरान जाग्रत से कर्कश होता है। कई बार मिलने पर सदस्य और निर्वाचित प्रतिनिधि दूसरे दल में जाते हैं। ऐसे में कई भ्रम दल-बदल कानून में बदलाव की मांग है।

दल-बदल कानून क्या है?
1967 में हरियाणा के विधायक लाल ने एक दिन में तीन बार बदली पार्टी की। बाद में उनकी राजनीति में राम की कहावत प्रसिद्ध हो गई। पद और पैसे के लालच में होने वाले दल-बदल को रोकने के लिए राजीव गांधी सरकार 1985 में दल-बदल कानून लेकर आई। इसमें कहा गया है कि अगर कोई विधायक या सांसद अपनी मर्जी से पार्टी की सदस्यता को छोड़कर दूसरा पक्ष ज्वाइन कर लेता है तो वो दल-बदल कानून के सदन के तहत उसकी सदस्यता ली जा सकती है। यदि कोई सदस्य सदन में किसी मुद्दे पर मतदान के समय अपनी पार्टी का व्हिप का पालन नहीं करता है, तो उसकी सदस्यता भी ली जा सकती है।

खबरें और भी हैं…

Source link

- Advertisement -

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here