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दिल्ली एम्स से चार करोड़ पीड़ितों का डेटा चोरी: अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज, 36 घंटे बाद भी सर्वर रिकवर नहीं

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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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दिल्ली एम्स के ऑनलाइन सिस्टम पर बड़े साइबर अटैक का खुलासा हुआ है। एमएमएस सिस्टम से लगभग चार करोड़ व्यक्तियों का डेटा चोरी हो गया है। यह देश के मेडिकल सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी हैकिंग है। दो दिन से एनआईसी सहित सीबीआई, सीबीआई, डीएमडीओ और दिल्ली पुलिस जांच में जुटी हैं। एमएमएस के दो सिस्टम एनालिस्ट को सस्पेंड कर दिया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक, डेटा हैक में इंटरनेशनल साइबर क्राइम का कनेक्शन होने की आशंका है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ये साइबर टेरर से लाइसेंस का मामला है। इस संबंध में गुरुवार को स्थिति दर्ज की गई है।

ऑनलाइन सेंट्रल सिस्टम से जुड़े कंप्यूटरों की जांच
जांच एजेंसियां एम.एस ऑनलाइन सेंट्रल सिस्टम से जुड़े सभी कंप्यूटरों को खंगाल रहे हैं। साइबर विशेषज्ञ और सॉफ्टवेयर इंजीनियर डेटा हैक के शोधकर्ता और रिसीवर की तलाश में जुटी है। इसी के साथ साइबर हमले के खतरों से निपटने के उपाय भी किए जा रहे हैं।

एम.एस के शेयरधारकों का डेटा स्टोर था
आठ साल पहले एम्स के डेटा को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया था। तब से एम्स में कई पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी समेत कई संस्थाओं का उपचार हो गया है। ये सभी व्यक्तिगत डेटा एम्स के सर्वर हैक हो जाते हैं।

इंटरनेट बंद कर दिया गया है, सभी काम कर रहे हैं
एमएमएस में इंटरनेट बंद कर दिया है। ई-हॉस्पिटल डेटाबेस और लैब सूचना प्रणाली (एलआईएस) के डेटा बेस को बाहरी हार्ड ड्राइव में लिया गया है। चार अतिरिक्त सर्वर दिए गए हैं। ओपीडी और आईपीडी में सभी काम कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस रैनसमवेयर हमले की आशंका जता रही है

  • पुलिस शुरूआती जांच में रैनसमवेयर अटैक मान रही है। जबरन कटाव में स्थिति दर्ज की गई है।
  • फार्मा कंपनियाँ, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट कंपनियाँ और अन्य मेडिकल कंपनियाँ इस डेटा का लाभ उठा सकती हैं।

सर्ट इन उत्तरदाताओं की टीम भी शामिल हुई…
एम्स के कंप्यूटर से डेटा हैक की जांच में क्राइम इनवेस्टिगेशन अलर्ट के साथ भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम भी शामिल है। सर्ट इन की टीमें साइबर हैकिंग के तकनीकी हर पहलू की जांच कर रही हैं। अब तक एम्स के सिस्टम को खराब नहीं किया जा सकता है।

देश में हर महीने 3 लाख साइबर अटैक…
इंडसफेस की चमक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर महीने सेक्टर में करीब 3 लाख साइबर हमले होते हैं। ये दुनिया में दूसरे सबसे अधिक साइबर हमले हैं। अमेरिकी हेल्थ सेक्टर में हर माह लगभग पांच लाख साइबर अटैक होते हैं।

2021 में ज्यादा मामले मिले
2020 में कम से कम 130 अलग-अलग रैनसमवेयर एक्टिविटीज थीं और 2021 की पहली परियोजना में मालवेयर के 30,000 ग्रुप मिले थे। जो समान रूप से दिखते और संचालित होते थे। इनमें से 100 रैनसमवेयर ऐसी घटनाएँ हैं जो कभी-कभी नहीं बोली जाती हैं। साथी अपने रैनसमवेयर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए जाने-माने बॉटनेट मालवेयर और अन्य लिंक ऐक्सेस ट्रोजन (RAT) सहित कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ज्यादातर मामलों में ये नए रैनसमवेयर का इस्तेमाल करते हैं। हालाँकि, Google का कहना है कि उसका Google क्रोम ओएस क्लॉड-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रोफेशन, एजुकेशन या कस्टमर के क्रोम ओएस डिवाइस पर रैनसमवेयर हमले नहीं होते हैं।

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