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देश में अमेरिका के संभावित राजदूत नहीं: भारत-अमेरिकी व्यापार हो सकता है प्रभावित, कई मसलों पर टकराव संभव है

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एक मिनट पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली

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यह फोटो दिल्ली में अमेरिकी एम्बेसी की है।  - दैनिक भास्कर
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यह फोटो दिल्ली में अमेरिकी एम्बेसी की है।

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भारत में अमेरिका के संभावित राजदूत दो साल से नहीं हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास इतने ज़ब्त तक संभावित रूप से राजदूत के रूप में रहा है। हालांकि राष्ट्रपति जो बाइडेन लॉस एंजिल्स के मेयर एरिक गार्सेटी के राजदूत के रूप में नियुक्ति की अनुमति पिछले साल दे चुके हैं।

कई विशेषज्ञ इसे बाइडेन के जरिए भारत की अहमियत दिखाने के संदेश के रूप में देख रहे थे, लेकिन इस पर रिपब्लिकन पार्टी के दो सांसदों ने रोक लगा दी थी, जिसके बाद सीनेट में मंजूरी नहीं मिली थी। गार्सेटी बाइडेन के करीबी दोस्त हैं, वह हिंदी और उर्दू भी जानते हैं।

जानकार ने कहा कि भारत जैसे अहम देश में संभावित राजदूत के न होने से दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका के भारत में पिछले राजदूत रहे केनेथ जस्टर ने भास्कर को बताया- राजदूत की नियुक्ति में देरी ठीक नहीं है।

राजदूत के न होने से गड़बड़ियाँ हो सकती हैं
राजदूत को अहम मुद्दों पर स्थानीय नजरिए की समझ होती है, जिससे दोनों देशों के बीच विवादों के हल में मदद मिलती है। भारत-अमेरिका संबंध अभी भी अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन राजदूत के न होने से समस्याएँ उलझ सकती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजदूत की कमी से व्यापार में परेशानी आती है। शिकायत आगे बढ़ने में इसी कारण आ रही हैं।

भारत में अमेरिकी राजूदत एरिक गार्सेटी

भारत में अमेरिकी राजूदत एरिक गार्सेटी

जॉर्ज एसोसिएशन यूनिवर्सिटी में सिगुर सेंटर फॉर एशियन स्टडीज में प्रोफेसर दीपा ओलापाली कहती हैं कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यावसायिक संबंध और हथियार आपूर्तिकर्ता है। जब जापान, ऑस्ट्रेलिया, द. कोरिया, श्रीलंका और पाकिस्तान के देशों में अमेरिका के राजदूत मौजूद हैं तो भारत में अमेरिकी राजदूत का ना होना एक बड़ी चूक है।

चीन को रोकने के लिए संभावित राजदूत जरूरी
इससे भी भारत के साथ डिफेंस, ट्रेड और एनर्जी से लेकर हेल्थ सर्विस के क्षेत्र तक कई लॉन्ग टर्म इंटरेस्ट प्रभावित होंगे। चीन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संभावित रूप से राजदूत बनाना जरूरी है। हाल ही में अमेरिका ने भारतीय दूतावास का 5वां अस्थायी प्रभार नियुक्त किया है। स्थायी राजदूत न होने से ये दौर अमेरिका-भारत का सबसे अधिक अभ्यार्थी-पुथल होने वाला है।

भारत के वंशज अमेरिकी सांसद पर नागरिकता भी राजदूत की नियुक्ति को समय की आवश्यकता होने पर यह कहा गया है कि चीन को अपनी मजबूत मजबूती और रणनीतिक साझेदारी की आवश्यकता है। वहीं एक अन्य विशेषज्ञ रौनक देसाई ने बताया कि अफगानिस्तान से सेना बुलाने, रूस-यूक्रेन युद्ध और पाकिस्तान से रक्षा समझौते जैसे मुद्दों पर भारत-अमेरिका के बीच टकराव दिखता है। स्थायी राजदूत होने से ऐसी कार्यक्षेत्र में मदद मिलती है।

50 देश अमेरिका के संभावित राजदूत नहीं हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि सीनेट की विदेशी संबंध समिति ने एकमत गारसेटी को चुना है। जल्द ही नियुक्ति को मंजूरी मिलने के आसार हैं। कई राजदूत ने राष्ट्रपति द्वारा नामित राजदूतों को सीनेट में अधिकृत न मिलने के लिए राजनीतिक रूप से अटपटा रूप से जिम्मेदार ठहराया है। सऊदी अरब, कतर, कतर और स्थिति सहित अमेरिका के 50 देश के संभावित राजदूत नहीं हैं।

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