द्रौपदी-पांडवों की पोती के बाद के भोजन के बाद वायु: शकुनि ने पंचांग के वध की योजना तो महाबली भूरिश्वा थान से

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  • कौरव पांडवों को मारना चाहते थे लेकिन कृष्ण और बलराम की उपस्थिति में कुछ भी नहीं बिगाड़ सके।

3 पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

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कहानी-पांडवों की द्रौपदी से लगन सहायक था। द्रौपदी के पिता द्रुपद पांडवों को हर मदद करने के लिए। दुसरी और कौरवों में इस बीत की चर्चा हो ओ भी था कि मैंदों को करने के लिए करने के लिए वे इनकारा हित होता जा रहा है।

एक दिन कैरवों की सभा में शकुनी ने अपनी कुनीति सुनाई। शकुनि ने कहा, ‘जब भी खराब हो, दुश्मन को भी नष्ट कर दिया। वृहद पांडवों को झिल्ली से उत्पन्न होने वाले स्वभाव। अन्यथा एक दिन ये हम पर दागे। जब तक श्री कृष्ण और बलराम की अजनबी में पांडवों का वध करना चाहिए।’

बैठक में सोमदत्त के भूरिश्वा भी थे। भूरिश्वाब बलवान। युद्ध में भी सेना ने एक सेनापति को तैनात किया। चौबीसवें दिन अरुण ने ध् वध था।

कैरवों की सभा में, ‘विश्वास और शत्रुता की स्थिति और प्रकृति में खराब होना चाहिए। सात प्राकृतिक प्रकृति, ये-स्वामी, अमात्य, सुह्रत, राष्ट्र, दुर्ग और सेना। मित्र से संपर्क करें. विक्र्ख… इन्फ्यूजिंग। असत्य की रक्षा में द्वैधिभावी दुरांगी नीतिवचन। समाश्रय अपने से बलवान रखने वाले को शरण देना।’

भूरिश्वा ने आगे कहा, ‘मिलाते हैं कि पांडवों के मित्र और हरजाने के साथी। इसलिए शकुनि आप गलत बोलें।’

कारवों ने भूस्वी की आवाज और शकुनी की बातचीत में. परिणाम स्वरूप कैरवों को पांडवों से पुरानी लाइफ़।

सीखना
हम जोड़ी और-परिवहर में सलाह-मशविरा करते हैं तो किसी सल्लाह भले ही चूब होली, लेकारन साही हो तो उसे मां लेना चाथी। वरना बाद में पछताना है।

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