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नासा के मून मिशन ने चंद्रमा के 4 रौशनी की तस्वीरें लीं | नासा मून मिशन; आर्टेमिस-1 चांद के सबसे करीब की तस्वीरें लेता है

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ओरियन अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा की सबसे करीबी तस्वीरें खींची हैं। हाल ही में नासा ने अपना सबसे शक्तिशाली रॉकेट ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ चांद का चक्कर लगाकर भेजा है। यह आर्टेमिस-1 मिशन का हिस्सा है, जो नासा के ह्यूमन मून मिशन ‘आर्टेमिस’ का पहला चरण है।

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चांद के 4 कार्यक्षेत्र की फोटोजजाएं
चंद्रमा की तस्वीर ओरियन के ऑप्टिकल नेविगेशन सिस्टम ने ली है। नासा के इंस्टाग्राम पोस्ट के मुताबिक, यह सिस्टम पृथ्वी और चांद के चित्र अलग-अलग दूरी और जगहों से अलग-अलग हैं। ये रंग नहीं, बल्कि काले और सफेद होते हैं। पोस्ट में चांद के 4 क्षेत्रों की फोटोज शेयर की गई हैं। ये 1975 में अपोलो मिशन खत्म होने के बाद ली चांद की सबसे शानदार तस्वीरें हैं।

देखिए चांद की सबसे साफ तस्वीरें…

ओरियन अपोलो मिशन की याद
नासा की आर्टेमिस-1, प्रमुख मिशन के लिए एक परीक्षण उड़ान है। यह चांद के करीब का खुलासा अंतरिक्ष एजेंसी के पुराने मिशन अपोलो की याद दिला रहा है। पोस्ट में नासा ने बताया कि ओरियनक्राफ्ट स्पेस उन जगहों के पास से गुजरा है, जहां अपोलो 11, 12 और 14 मिशन की लैंडिंग साइट्स हैं।

ओरियन 11 दिसंबर को धरती पर वापस आएगा
बता दें कि यह 50 साल में पहली बार है जब कोई अंतरिक्ष कैप्सूल चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। अभी इसमें किसी अंतरिक्ष यात्री को नहीं भेजा गया है। मिशन 25 दिन 11 घंटे और 36 मिनट का है, जिसके बाद यह 11 दिसंबर को प्रशांत महासागर में आ गिरेगा। अंतरिक्ष यान कुल 20 लाख 92 हजार 147 किलोमीटर की यात्रा तय करेगा।

आर्टेमिस मिशन क्या है?

  • अमेरिका 53 साल बाद एक बार फिर आर्टेमिस मिशन के जरिए चांद पर चांद लगाने की तैयारी कर रहा है। यह तीन कनेक्शनों में है। आर्टेमिस-1, 2 और 3। आर्टेमिस-1 का रॉकेट चंद्रमा की कक्षा तक जाएगा, कुछ छोटे उपग्रह छोड़ देंगे और फिर स्वयं की कक्षा में ही स्थापित हो जाएंगे।
  • 2024 के आसपास आर्टेमिस-2 को लॉन्च करने की योजना है। इसमें कुछ एस्ट्रोनॉट्स भी झिझकते हैं, लेकिन वे चांद पर नहीं दिखते। वे सिर्फ चांद की कक्षा में घूमते हुए वापस आ जाएंगे। इस मिशन की अवधि बहुत अधिक होगी।
  • इसके बाद अंतिम मिशन आर्टेमिस-3 को रवाना किया जाएगा। इसमें जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स चांद पर उतरेंगे। यह मिशन 2025 या 2026 में लॉन्च किया जा सकता है। पहली बार महिलाएं भी ह्यूमन मून मिशन का हिस्सा बनीं। इसमें रंग पर्सन (श्वेत से अलग नस्ल का व्यक्ति) भी क्रू मेंबर होंगे। एस्ट्रोनॉट्स चांद के साउथ पोल में मौजूद पानी और बर्फ पर नजर डालेंगे।

खबरें और भी हैं…

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