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नेताओं की नियुक्तियों को न्यायालय में चुनौती: केरल उच्च न्यायालय ने पूछा- आप सियोस रोप रहे थे, तो टीचिंग का अनुभव मिला था

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तिरुवनपुरम2 मिनट पहले

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केरल में शिक्षा विभाग में नेताओं के करीबियों को नियुक्ति देने का मामला लगातार पकड़ में आ रहा है। बुधवार को केरल हाई कोर्ट ने अजमेर पिनराई विजयन के करीबी और पूर्व राज्यसभा सदस्य केके रागेश की पत्नी प्रिया को लेकर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब आप संयंत्र रोप रहे थे, तो आपको टीचिंग का अनुभव कैसे मिला।

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कन्नूर यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर प्रिया हैं
प्रिया कन्नूर यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इस पद के लिए उनका अधिक अनुभव एक अन्य संबंध से जुड़ा था, लेकिन उन्हें प्राथमिकता दी गई। उनके वकील ने तर्क दिया कि प्रिया ने राष्ट्रीय सेवा निर्धारण (एनएसएस) के तहत विश्वविद्यालय स्तर के समन्वयक के रूप में 6 साल काम किया। इस अनुभव को टीचिंग अनुभव में जोड़ा जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा-NSS ट्री लगाने के लिए गड्ढा खोदने का काम करता है। ये टीचिंग का अनुभव नहीं है। प्रिया को ये पोस्टिंग सरकार की मदद से मिली है।

दरअसल, कई नेताओं ने राजनीतिक रसूख के दम पर अपनी जिम्मेदारियों को एक इकाई में नियुक्त किया है। पूर्व सांसद पीके बीजू की पत्नी को केरल विश्वविद्यालय में शिक्षिका का पद मिला। राज्य के उद्योग मंत्री राजीव की पत्नी कोचीन यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं। अब्कारी मंत्री एमबी राजेश की पत्नी कलादी के श्री शंकर संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं। इन सभी नियुक्तियों को कोर्ट में चुनौती दी गई है।

करीबियों को नियुक्ति देने का पहला मामला 2016 में आया
इससे पहले, केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष एन शमसीर की पत्नी पीएम शाहला की कन्नूर विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। विजयन सरकार पर पिछले 6 साल में बार-बार सरकारी भर्तियां करने के आरोप लग रहे हैं। करीबियों को नियुक्ति देने का पहला मामला साल 2016 में सामने आया था।

आधिकारिक उद्योग मंत्री ईपी जयराजन की पत्नी और सीपीआई (एम) की नेता पीके श्रीमती के बेटे सुधीर नांबियार को चेतावनी के खिलाफ नियुक्ति देने का आरोप लगा था। इसके बाद जयराजन को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

मेयर ने जिला सचिव से स्वास्थ्य विभाग के 249 पद भरने के लिए नामांकन मांगे
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम शहर के CPI(M) के मेयर आर्य राजेंद्रन ने हाल ही में पार्टी के जिला सचिवों को चिकित्सक, नर्सों और स्वास्थ्य नामांकन के लिए 249 पद भरने के लिए एक पत्र से नामांकन मांगे थे। इसके बाद ये पत्र सार्वजनिक हो गया। इसी हफ्ते सीपीआई(एम) के दो अन्य नेताओं के पात्र भी सामने आए।

कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने इसका विरोध जताना शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि सत्ताधारी दल के नेता संदेश का उल्लंघन करते हुए अपने कैडर के लोगों को नियुक्ति दे रहे हैं।

राज्यपाल को लेकर वाम दलों के नेता बोले- उच्च शिक्षा विभाग में दखल दे रहे हैं
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान लगातार कहते हैं कि अपने करीबी लोगों को शिक्षा विभाग में नियुक्ति दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कुछ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक दबाव के तहत की गई है। जबकि माकपा का आरोप है कि राज्यपाल उच्च शिक्षा विभाग में लगातार दखल दे रहे हैं।

वहीं, राज्यपाल का कहना है कि मैं सरकारी कामकाज में तब तक दखल नहीं देता, जब तक कि संवैधानिक प्रशासन पूरी तरह से झांसे में नहीं आ जाता।

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