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नेपाली कांग्रेस ने संसद की कुल 275 में से 70 स्मार्टवॉचों को देखा, मतगणना जारी किया नेपाल के प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा डडेलधुरा से लगातार 7वीं बार चुने गए हैं

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काठमांडूकुछ ही क्षण पहले

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नेपाल आम चुनाव में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा लगातार 7वीं बार डडेलधुरा क्षेत्र से फिर से चुने गए हैं। 20 नवंबर को मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह से हो गई थी। इसके बाद 21 नवंबर को वोटों की गिनती की कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई थी।

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अब तक हुई मतगणना के मुताबिक देउबा की पार्टी- नेपाली कांग्रेस आगे चल रही है। संसद में नेपाली कांग्रेस ने 70 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी 40 सीटें हासिल कर पाई है।

प्रधानमंत्री और दस्तावेज नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने 25,534 मतों के साथ अपने गृह जिले की सीट पर जीत हासिल की।  उनके प्रतिद्वंद्वी सागर को 13,042 वोट मिले।

प्रधानमंत्री और दस्तावेज नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने 25,534 मतों के साथ अपने गृह जिले की सीट पर जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी सागर को 13,042 वोट मिले।

संसद और विधानसभा का चुनाव एक साथ
नेपाल की संसद की कुल 275 क्षेत्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं की 550 राज्यों के लिए मतदान हुआ था। श के 1 करोड़ 80 लाख से ज्यादा मतदाता अपनी सरकार को चुनेंगे। इसका रिजल्ट एक हफ्ते में आने की उम्मीद है।

देउबा की जीत से भारत को फायदा
प्रधान मंत्री बहादुर देउबा का कहना है कि उत्तेजक और शब्दों की लड़ाई की बजाय वो भारत के साथ दोस्ती और बातचीत के माध्यम से विवाद की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका और चीन की आर्थिक मदद पर भी राजनीतिक विशेषाधिकार
नेपाल की राजनीतिक गैर-बराबरी में अमेरिका और चीन से आर्थिक मदद पर जातियां हैं। देउबा की पार्टी ने अमेरिकी मिलेनियम चैलेंज कोऑपरेशन के तहत 42 हजार करोड़ रुपये की मदद स्वीकार की है। इसे संसद से भी पास किया गया है। जबकि केपी शर्मा ओली की पार्टी चीन के साथ BRI के दावों पर ज्यादा उत्सुकता दिखाई देती है। छोटे पापी ने विदेशी मदद पर चुनाव प्रचार में अपना रूख साफ नहीं किया है।

ओली सरकार के कार्यकाल में बढ़ा भारत-नेपाल तनाव
ओली का कहना है कि प्रधानमंत्री बने ही वो भारत के साथ सीमा विवाद हल कर देंगे। वे देश की एक इंच भूमि भी नहीं जाने देंगे। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि 2 साल से ज्यादा सत्ता में रहने के बावजूद ओली ने इस विवाद को हल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। अभ्यस्त पीएम ओली ने कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल में ऐसा करने से पहले नया आवेदन जारी किया था। भारत इन्हें अपने उत्तराखंड प्रांत का हिस्सा बनाता है। ओली ने इस अधिकार को नेपाली संसद में पास भी किया था।

नेपाल में राजनीतिक जोखिम

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता है। यहां 1990 में लोकतंत्र स्थापित हुआ था और 2008 में राजशाही को खत्म कर दिया गया था। 2006 में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद से कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। नेतृत्व में बार-बार बदलाव और राजनीतिक दलों के बीच आपसी विवाद का चलन धीरे-धीरे हो रहा है।

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