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पति को वर्जिनिटी गिफ्ट करने के लिए सर्जरी: बिहार में सर्जरी शुरू नहीं हुई 9 महीने की वेटिंग, 5 हजार ने किया संपर्क, ज्यादातर युवतियों

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पटना7 मिनट पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

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34 साल की कुसुम (बदला हुआ नाम) के पति की कार एक्सीडेंट में मर गई। वह पूरी तरह से टूट गया। बच्चा नहीं था, इसलिए जीना भी नहीं चाहता था। कई बार सुसाइड की भी कोशिश की। प्राइवेट नौकरी के दौरान 3 महीने पहले एक युवक से प्यार हो गया। अब दोनों ने शादी करने का फैसला लिया।

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कुसुम अपने होने वाले पति को वर्जिनिटी गिफ्ट देना चाहती हैं। इसके लिए वह पुणे में वर्जिनिटी सर्जरी के लिए रजिस्ट्रेशन रजिस्टर करती है। कुसुम की तरह इस सर्जरी के लिए पूरे बिहार में 150 से अधिक युवतियों और महिलाओं ने पंजीकरण पंजीकृत किया है। बिहार में पहली बार वर्जिनिटी सर्जरी शुरू होने वाली है। एक माह में 5 हजार से अधिक युवतियों और महिलाओं ने अस्पताल से वर्जिनिटी सर्जरी की और इससे जुड़े अन्य उपचार के लिए संपर्क किया। अभी सर्जरी शुरू नहीं हुई है, लेकिन सर्जरी के लिए 9 महीने की वेटिंग मिल रही है।

पहले जान लें वर्जिनिटी सर्जरी होती क्या है

रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु राय कथन हैं फीमेल के निजी हिस्से में हाइमन (पतली परत) होती है। फिजिकल रिलेशन बनाने या स्पोर्ट्स एक्टिविटी की वजह से डैमेज हो जाता है। पुरुष शादी के बाद हाइमन को लेकर काफी गंभीर होते हैं, और वह नहीं होने से सवाल करते हैं। इस तरह से सर्जरी की व्यवस्था की जाती है, जिससे वर्जिनिटी वापस आ सकती है। सर्जरी दो तरह से होती है, इसमें लेजर गन का भी इस्तेमाल किया जाता है। दोनों विधियों से ही फीमेल की वजाइना में हाइमन की मरम्मत की जाती है। सर्जरी के बाद इंटरकोर्स के दौरान हाइमन टूट जाता है, जिससे रक्त आता है। इसी कारण इसे ‘वर्जिनिटी सर्जरी’ भी कहते हैं। इस तरह की सर्जरी को हाईमेनो प्लास्टिक का नाम जानते हैं।

इन मामलों से वर्जिनिटी सर्जरी की मांग क्यों बढ़ी है

अब इस ग्रूम्स की चाहत देखिए…

मोतिहारी जिले के तुरकौलिया थाना के चारगाहा गांव में 16 नवंबर को बारात आई थी। इस बारात बेतिया के मझौलिया थाना क्षेत्र के अहवर गांव से निर्मल निर्णय के बेटे सूरज स्थिति की थी। ग्रूम्स ने विदाई के वक्त दुल्हन की वर्जिनिटी टेस्ट की मांग रखी। इस मांग पर लड़की वाले आगबबूला हो गए। वधु पक्ष के लोगों ने ग्रूम्स को कर्जदार बना लिया। उन्हें 2 दिन का ऋण दिया गया। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों में से सबसे पहले लड़कियों ने उन्हें छोड़ दिया, लेकिन दुल्हन ने ब्रेकअप के साथ जाने से इनकार कर दिया।

अफेयर टूटा, शादी से पहले हुई सर्जरी

दर्ज कराए गए आवेदकों के नाम का एक मामला मामला था। दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते थे, लदान साल में कई बार भौतिक रिलेशन भी बना। शादी का दबाव बना तो रिलेशन नहीं मिला। लड़के ने उसे छोड़ दिया। इस वजह से वह काफी परेशान रहने लगी। अब तो घर वाले शादी का जाद हो गया है, लेकिन उम्रदराज़ कौमार्य को लेकर काफी हद तक विवाद हो गया है। वह नहीं चाहती कि जिस लड़के से वह शादी करे वह कुछ समय बाद ही निकल जाए। डर यह भी है कि कहीं शादी के बाद वर्जिनिटी को लेकर उसका तलाक न हो जाए। अब बुजुर्ग वर्जिनिटी सर्जरी के लिए रजिस्ट्रेशन रजिस्टर करते हैं।

ताकि दूसरी महिला के पास नहीं जाएं पति

पूर्वांचल की एक सोशल वर्कर वजाइनल लूजनेस की वजह से परेशान हैं। शादी के 12 साल साथ रहने के बाद अब बीमारी के कारण रिश्ते में खटास आ रही है। डर पति के दूसरी महिला के पास जाने का है। इतनी ही नहीं बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि तेज से हंसने और खाने पर भी यूरिन पास हो जाता है। अब तो घनिष्ठता का उपयोग करना है। वजाइनल लूजनेस को लेजर से उचित परामर्श के लिए महिला की सर्जरी की जा रही है।

सर्जरी कराने वालों में ये ज्यादा…

दर्ज करने वालों में ऐसे युवा ज्यादा हैं, वास्तव में यही कारण से हाइमन के टूट गए हैं। ऐसी लड़कियों को डर होता है कि कहीं शादी के बाद वर्जिनिटी को लेकर वह सवालों में न कम होती है। डॉक्टर का कहना है कि बहुत सारी ऐसी महिलाएं भी रविवार को शादी कर लेती हैं, लेकिन वह नौकरी या विधवा होने के बाद दोबारा शादी करना चाहती हैं। ऐसे में उनकी इच्छा होती है कि वह वापस अपनी कौमार्य अवस्था में आ जाएं। अब इसी तरह की सर्जरी को हाईमेनो प्लास्टी का नाम जानते हैं।

जानिए क्यों हुआ इतना लंबा वेटिंग

पुणे की क्रिएट फर्टिलिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड के गायनाक डॉ. हिमांशु राय ने महिला दिवस पर 8 मार्च 2022 को पूत में वर्जिनिटी सर्जरी की घोषणा की थी। अस्पताल की तरफ से दावा किया गया था कि राज्य में पहली बार वर्जिनिटी के लिए सर्जरी होगी।

अस्पताल की इस घोषणा के बाद युवतियों और महिलाओं ने पंजीकरण दायर किया और जानकारी के लिए कॉल भी आने लगी। हॉस्पिटल ने मशीन के लिए भी ऑर्डर दे दिया, लेकिन सप्लाई चेन में दिक्कत की वजह से समय नहीं मिला। ऐसे में मशीन आने से पहले 500 से अधिक महिलाओं ने पंजीकरण करा लिया है और वह 9 महीने की सेटिंग पर हैं।

यूक्रेन युद्ध से पाइते की युवाओं की वेटिंग

डॉ हिमांशु राय का कहना है कि चीन में लॉकडाउन और यूक्रेन में युद्ध के कारण फिल्मों की डिलवरी को काफी हद तक छोड़ दिया गया। ऑर्डर तो 8 से 9 महीने पहले किया गया था, लेकिन समय से शीट का सप्लाई ब्रेक हो गया था। मशीन जर्मनी की है, इस पर 30 लाख से अधिक की लागत आती है।

विदेश में कोई मामला नहीं था जिससे जर्मनी से इंटरनेट अपने समय पर आ जाए। ऑर्डर देने के बाद उसका इंतजार किया जा रहा था, लेकिन कंपनी के एजेंट का सीधा कहना था कि यूक्रेन युद्ध के कारण पूरी तरह से व्यवस्था अतिसंवेदनशील हो गई है। डॉक्टर का कहना है कि अगर मशीन टाइम से आई होती तो वेटिंग की समस्या नहीं होती। डॉक्टर का कहना है कि जर्मनी की मशीन को इसलिए ऑर्डर दिया गया क्योंकि खतरा काफी कम होता है।

पेपर आई, ट्रायल शुरू

डॉ हिमांशु राय का कहना है कि हालात कुछ सामान्य हो गए हैं तो मशीन अक्टूबर महीने में पूरब आ गई है। ऐसा कुछ किया गया, अब इसका मुकदमा भी चल रहा है। डॉ हिमांशु राय का कहना है कि अस्पताल में अंडर क्लिटिंग असम्मेंट कर रहा है। इसमें ऐसी महिलाओं का परीक्षण किया जा रहा है जिनके पास पैसा नहीं होता है, वह इस तकनीक का लाभ लेना चाहती हैं। ऐसी युवतियों और महिलाओं से पहले उनकी सहमति ली जाती है, फिर उनका इलाज किया जाता है। इसमें महिलाओं में यूरिन लीक होने के साथ प्राइवेट पार्ट्स के कसाव के साथ वर्जिनिटी के लिए सर्जरी की जा रही है।

डॉ हिमांशु का कहना है कि परीक्षण में मशीन के काम करने की क्षमता और उसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सभी तकनीक ऐसी होती हैं वास्तव में नाम और मार्केटिंग अधिक होती है, लेकिन पता चलता है कि वह इतना प्रभावशाली नहीं है। इस कारण से मशीन का पहले हर स्तर से परीक्षण किया जाएगा, इसके बाद ही पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का इलाज किया जाएगा।

जनवरी से वर्जिनिटी के लिए होगी सर्जरी

फर्स्ट मशीन का एक-दो माह का ट्रायल देखा जाएगा। इसके बाद ही इस मशीन से इलाज को सार्वजनिक किया जाएगा। मशीन आने के बाद इलाज परीक्षण में शुरू हो गया है, लेकिन अभी पंजीकरण करने वाले युवाओं को जनवरी के बाद से ही इलाज की सुविधा मिल जाएगी। डॉ हिमांशु अंश हैं कि अलग-अलग संकेतों में जब यह तय हो जाएगा कि मशीन पूरी तरह से सक्सेस है। इसके बाद जनवरी से आम लोगों की वर्जिनिटी की सर्जरी और निजी हिस्सों के कसाव के साथ अन्य उपचार किए जाएंगे। इसके बाद पंजीकृत होने वाले आवेदकों को वेटिंग के होश से कॉल किया जाएगा।

वर्जिनिटी खोने की और वजह

वर्जिनिटी को शारीरिक संबंध से जोड़कर देखा जाता है। इसका मतलब एक ऐसी अवस्था से है जिसमें व्यक्ति कभी भी कोई शारीरिक संबंध नहीं बनाता है। वर्जिनिटी को सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा में विशेष रूप से अविवाहित महिलाओं को लेकर समाज में अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है। पुरुषों में यह धारणा है कि महिला की वर्जिनिटी पूरी तरह से हाइमन के सही होने पर ही समाप्त होती है। हालांकि विशेषज्ञ वर्जिनिटी को हाइमन से जोड़कर देखने को गलत विवरण हैं। जानकार का कहना है कि शारीरिक संबंध के अलावा इससे नुकसान की और कई वजहें हो सकती हैं। डॉ हिमांशु का कहना है कि चोट लगने या फिर खेलने के दौरान भी हाइमन डैमेज हो सकता है। हालांकि हर कोई शारीरिक संबंध से क्वाड है, इस कारण से युवा भी इसे लेकर डेरी रहते हैं।

लेजर थेरेपी की मांग

डॉ. हिमांशु राय विवरण हैं कि आधुनिक आधुनिक जीवन शैली में अधिकतर महिलाओं की निजी समस्या के लूज होने की है। वजाइना के लूज होने के कई कारण होते हैं, इसमें कई नार्मल डिलीवरी से लेकर मांसपेशियां होती हैं। इस समस्या के बाद भागीदारी में निराशा होती है, इसके साथ ही हंसते खांसते यूरिन पास होने की समस्या होती है। इसके लिए लेजर थेरेपी की काफी मांग है। इस प्रक्रिया से यह समस्या काफी जल्दी ठीक हो जाती है। अगर रोगी की स्थिति बहुत खराब नहीं है तो 4 सत्र में ही उसकी यह समस्या ठीक हो जाती है। यह एक तरह का व्यायाम होता है, दो से चार सीटों में इसका असर दिखता है।

विश्वास रखने वालों की जानकारी

डॉ. हिमांशु राय का कहना है कि यह काफी हद तक व्यक्तिगत और संवेदनशील मामला है। इस कारण से काफी सावधानी बरती जा रही है। पंजीकरण वाले युवाओं और महिलाओं का डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा रहा है। अस्पताल में इसके लिए अलग से टीम बनाई गई है।

देश के कई राज्यों में लेजर वर्जिनिटी का इलाज

देश के 8 राज्यों में इस हाईटेक मशीन से इलाज हो रहा है। इसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ अब बिहार में भी यह संभव होगा। बिहार में पहली बार वर्जिनिटी का इलाज किया जा रहा है। विचित्र असमंजस के बाद जनवरी 2023 से आम लोगों के लिए इसकी सुविधा दी जाएगी। जिन रोगियों ने पंजीकरण पंजीकरण किया है, वे जनवरी के बाद से इलाज कर सकते हैं।

शादी में देरी और सोशल मीडिया से जुड़ा मामला

एजिंग तो हर जगह होती है, इसी तरह से वजाइनल लूजिंग के मामले में भी दी जाती हैं। खान-पान और गलत लाइफ स्टाइल से समस्या मिलती है। जनसंख्या के 5 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं कि जिन्को लेजर थेरेपी की आवश्यकता है। वर्जिनिटी की बात करें तो हजारों मिलियन मामले हैं, इसका कारण समाज बदल रहा है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से ही सोसायटी बदल रही है। ऐसी लड़कियों की संख्या काफी अधिक है जो वर्जिनिटी के लिए थेरेपी की आवश्यकता महसूस कर रही हैं। जागरुकता नहीं होने के कारण भी बहुत सी लड़कियां जागरुकता में इस तरह के उपचार में आगे नहीं आती हैं।

हालांकि ऐसी लड़कियों और महिलाओं की संख्या भी अधिक होती है जो विश्वास से भरी होती हैं। इसके बारे में सोचती भी नहीं हैं। लड़का भी ऐसे हेंग जो शादी के पहले शारीरिक संबंध बनाए हुए हैं, वह सचेत हैं तो वह वर्जिनिटी को लेकर बहुत गंभीर नहीं रहते। हालांकि ऐसे लड़कों की संख्या कम होती है। अधिकतर लड़के लड़कियां वर्जिन ही चाहते हैं। डॉक्टर का कहना है कि शादी में भी देरी हो रही है। करियर बनाने में ज्यादा समय लगा रहे हैं, शादी होने दें सोशल मीडिया और डेटिंग साइट से गड़बड़ी हो जाती है। ऐसे प्लेटफॉर्म पर खुलासे होते हैं, इससे बच पाना भी मुश्किल होता है।

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