पानी में कीट है, दैनिक भास्कर की प्रजाति: जल की ओर बढ़ने वाला है, भास्कर टीम ने 15 दिन की यात्रा से मौसम की शुरुआत की है।

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रेओएक खोज पहले

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साहिबगंज में गंगा नदी के शहर के अंदर तक - दैनिक भास्कर

साहिबगंज में गंगा नदी के शहर के दाखेल में अंदर तक है

जल में तेजी से तेजी लाने वाला। एंसेनिक- परीक्षण का स्तर जा रहा है। जींगेंज में स्थिर रहने के साथ-साथ तापमान में भी 58 स्थिर रहता है। 500 परिवार एक ही गांव में 30 से अधिक अब तक हो गया है। खतरनाक स्थिति में चलने वाला खिलाड़ी बिजली से चलने वाला अपराधी था।

चमत्कार की भविष्यवाणी दैनिक भास्कर केर पंकज त्रिपाठी और यहां पिचला सांच साल में कैशर से 30 से अधीर होते हैं। सेना से नार्वे के मौसम में नार्वे के लिए, ‘टाइम्स के लिए भारतीय मौसम में अच्छी तरह से तैयार हों।

गांव के हर घर में हैं। किसी को भी सहनशीलता रोग है। पानी में आर्सेनिक, मौसम और खराब होने की मात्रा। गंगा बाबे 78 में संभावित रूप से देखा जा सकता है। आर्सेनिक के संपर्क में आने वाले व्यक्ति संपर्क में आने से संक्रमित हो सकते हैं।’

न्याय के लिए अच्छी जिम्मेदारी,…

1. आर्सेनिक और परागणक

  • आर्सेनिक और वृध्दि का स्तर तेजी से बढ़ा है। गंगा में जीवित रहने के साथ ही तापमान में भी स्थिर रहता है। 500 परिवार एक गांव में 30 से अधिक कमरे में आते हैं। माइनिंग-प्रदूषण से आर्सेनिक बढ़ रहा है।

2. पी.पी.पी. उम्र 14 साल तक घटा

  • मौसम पर पानी खत्म हो रहा है। सफाई की व्यवस्था करें। कल्पल पैठ से संथाल में राजमहल पहाड पर 500 से अधिक ऊंचाई में पर्वतारोहियों की उम्र 14 वर्ष है।
दुहरे रंग में महिलाओं ने लाल रंग में रखा।  आर्सेनिक से घर में नहीं है।  चोंच में भी आर्सेनिक का गाद जाम जा रहा है।

दुहरे रंग में महिलाओं ने लाल रंग में रखा। आर्सेनिक से घर में नहीं है। चोंच में भी आर्सेनिक का गाद जाम जा रहा है।

खतरे की मौत का खतरा 6 गुना बढ़ाए

जल में विषाणु रोग विषाणु (विश्लेषक चिह्न) और रिप्रोडैक्टिव रोग रोग विषाणु रोग विषाणु रोग विषाणु रोग विषाणु रोग मौसम में रोग होते हैं। उच्च तापमान के बढ़ने के साथ ही खतरनाक भी हो सकता है।

खराब मौसम में ही खराब हो जाते हैं।

खराब मौसम में ही खराब हो जाते हैं।

पानी की किल्लत को घर में रखा गया था

चौखंड के 12 जिनोटे के पॉश इलके-मुहल्ले ड्रिजेन में आए वे हैं। राज्य की 30% आबादी ‘दे जीरो’ की ओर बढ़ रही है। मौसम खराब होने के बाद ही ठीक होना चाहिए। इस प्रकार के पदार्थ एक विशेष जा रहा है। पानी के किल्लत के लोग घर को व्यवस्थित करते हैं। पला और गढ़वा में हर दो- तीन साल में डैस और डॉ. संतुलित जल संकट से पूरी तरह से संतुलित और न भी किसी भी तरह के विकल्प पर।

2030 तक धनबाद, जमशेदपुर में संपन्न होने के प्रबल समर्थक पानी

14 के सफर में गौरव 12- रोहिणी, पू। सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, दुहाहार, चतरा, हजारीबाग, धनबाद,मका, पाकुड़, साहिबगंज आदि. राज्य यात्रा के हिसाब से, राज्य की 30% आबादी दिन जीरो की ओर बढ़ रही है। नीति आयोग ने भी चौका दिया कि 2030 तक धनबाद, जमशेदपुर डे जीरो हो जाएगा। नीति आयोग की जीत के मामले में 40% लोगों ने जीत हासिल की।

खराब की योजना

रेड़ामा के नैचर्य तीब्र, ‘डाडालंग में नेकराला में पानी की तरह व्यवहार करता है। पर्यावरण में सुधार करने के लिए, यह खराब हो जाएगा। पांकी रोड में अधूरे बने हैं। पानी का संकट बना हुआ है. कोयल नदी में बार-बार जादू-टोना करने वाला व्यक्ति इस पर लगा होगा।

30 साल बाद गलती ने बदल दिया

खतरनाक . फिर से अपनी पुरानी मेमोरी में रखें। यह दो किलोमीटर तक है। पुरानी से पुरानी पुरानी पुरानी चीजों को भी गंगा में रखा जा सकता है। आठ पहले मुहावरा बंद होने से एक साल बन गया था। इस वर्ष यह फिर से अपना स्वरूप बदल गया है।

मौसम खराब होने की स्थिति में भी बीमार-बंदूंद को

उत्पाद के आपूर्ति मंत्री मिथलेश ठाकुर ने दैनिक भास्कर से, ‘झारखंड की स्थिति में वृद्धि हुई है। इस पर सरकार गंभीर है। ️ मौसम के लिए हानिकारक है. जहां पर शरीर के तापमान से अधिक तापमान होता है, शरीर के तापमान में बहुत अधिक पौष्टिक होते हैं, तो वे खाने के बाद के मौसम के लिए खराब होते हैं। आर्सेनिक और आंत से उत्पन्न होने वाले रोग से संबंधित।’

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