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पायलट के विरोध में किस हद तक होगा गहलोत गुट?: विरोध बढ़ा तो विधानसभा भंग भी हो सकती है आजाद से तुलना का जवाब गद्दार

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रायपुर28 मिनट पहले

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50 साल के राजनीतिक करियर में अशोक गहलोत का एक नया रूप देख रहा हूं। साल 2020 में पायलट खेमे की बगावत के बाद गहलोत ने पहली बार अपने धुर विरोधी पर फ्रैंक अटैक बोला। गहलोत ने कहा- पायलट को कैसे सीएम बना सकते हैं। वह बगवत की हो, लोग उसे कैसे स्वीकार कर सकते हैं। इस हमले से 10 दिन पहले राहुल गांधी की राजस्थान यात्रा से गहलोत ने सियासी अतिरिक्त का नया अध्याय शुरू कर दिया है।

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गहलोत के बयानों से ये 5 बड़ी बातें निकलकर सामने आ रही हैं

1. गहलोत ने 25 सितंबर की बगावत को क्लीन चिट दे दी है

2. गहलोत करेंगे ग्रुप पायलट को लीडरशिप पोजीशन नहीं चुनना

3. माकन का राजस्थान का रुकना मुश्किल

4. गहलोत-पायलट खेमों में टकराव बढ़ने की संभावना

5. हाईकमान कोई बड़ा फैसला ले सकता है

अब जानिए राजस्थान में क्या चल रहा है

अब तक पायलट पर जो हमले गहलोत के विधायक विधायक और मंत्री बोल रहे थे, अब खुद गहलोत ने उन पर मुहर लगाई है। गहलोत ने 25 सितंबर की बगावत को क्लीन चिट देकर खुद की सियासी लाइन साफ ​​कर दी है। इससे हाईकमान के फैसले पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

कांग्रेस अब दो महीने बाद वहीं आकर खाने लगी है। गहलोत ने अवैध संबंधों के संबंध में स्पष्ट संकेत दिया कि पायलट को अब किसी भी रूप में नेतृत्व की स्थिति नहीं मिलेगी। गहलोत और पायलट खेमों के बीच झिंझोड़ की सबसे बड़ी जड़ यही है।

राहुल की यात्रा से पहले गहलोत के विस्फोटक साक्षात्कार को राजनीतिक सूचना बड़े संदेश के लिए सोच समझी रणनीति मान रहे हैं। पायलट पर हमले की टाइमिंग और सियासी लाइन क्लीयर करने के बाद अब कांग्रेस में टकराव बढ़ता जा रहा है।

गहलोत ने विधायक दल की आमसहमति के असहमति के विकल्प के कदम का पहली बार फ्रैंक समर्थन करके पायलट के खिलाफ बगावत का आरोप लगाते हुए नई लड़ाई का ऐलान किया है। अब तक गहलोत बैठक के बहिष्कार पर नपा-तुला का जवाब देते आए थे। अब जाकर गहलोत ने हाईकमान की राय के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले तेवर-मंत्रों का फ्रैंकफ्रेंस करने के साथ ही इस घटना के बाद हुए दस्तावेज पर भी सवाल उठा दिए हैं।

गहलोत के नेताओं से यह साफ संकेत है कि उन्होंने अपने समर्थक नेताओं के खिलाफ 25 सितंबर की घटना को लेकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की चेतावनी दी है। उस घटना को पायलट के खिलाफ बगावत करार देते हुए जस्टिफाई करने का मतलब जरूरी है तो फ्रैंक टकराव भी हो सकता है।

बोगावत को लीड करने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज राजस्थानी आरोप अजय माकन के साझेदारों को भी गहलोत ने इशारों में गलत करार दिया है। अजय माकन पर गहलोत के विधायक मंत्रियों ने साझेदारी की और पायलट के समर्थन में टेलीफोन करने के आरोप लगाए।

गहलोत ने उन झूठों को सही बताया माकन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अब मौजूदा स्थिति में माकन के लिए प्रदेश का प्रभार बने रहने के आसार कम हैं, ऐसे में राजस्थान का प्रभार किसी दूसरे नेता को दिया जा सकता है।

25 सितंबर को हुआ बगावत का वक्त गहलोत खुद अलग थे और उनके विधायक विधायक आगे थे, इस बार पायलट पर हमले की कमान खुद गहलोत ने संभाली है। यह भी स्पष्ट है कि गहलोत और पायलट खेमों के बीच पराकाष्ठा मनभेद में बदल गए हैं, उनमें से पानी अब आसान नहीं है।

ही बने चाप राजनीति का सबसे बड़ा हथियार
25 सितंबर को गहलोत समर्थक 90 के दशक में पायलट के विरोध में स्पीकर सीपी जोशी के साथ गए थे। स्पीकर जोशी के पास अब भी गहलोत के साथ गठबंधन के समझौते चल रहे हैं। माना जा रहा है कि ये ही झटका राजनीति का सबसे बड़ा हथियार है।

गहलोत पर अगर दबाव बढ़ता है तो गठबंधन के सहयोगी गठबंधन कर सकते हैं। ऐसे हालात में विवाद और बढ़ने पर बात विधानसभा भंग होने पर जा सकती है, इस्तीफों का सियासी मकसद यही माना जा रहा है। बताया जाता है कि हाईकमान इसी कारण से राजस्थान को लेकर हस्ती करने के मूड में नहीं है।

सचिन पायलट को लेकर अशोक गहलोत अचानक अलग तरह के टीवी आए हैं, इसके पीछे कई तरह की खबरें आ रही हैं। एक अनुमान यह भी है कि राजस्थान को लेकर हठमान आगे बड़ा फैसला करने वाला हो और इसकी भनक गहलोत को लग गई। गहलोत के इंटरव्यू की टाइमिंग और पायलट को किसी भी रूप में लीडरशिप पोजीशन पर स्वीकार नहीं करने की बात हाईकमान के लिए भी एक चेतावनी के तौर पर चुनी जा रही है।

गुलाम नबीआजाद से तुलना का जवाब गद्दार
1 नवंबर को मानगढ़ धाम के कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम गहलोत एक मंच पर थे। पीएम ने गहलोत को मुख्यमंत्रियों में सबसे सीनियर सितारे गहलोत की आकांक्षा की थी।

सचिन पायलट ने 2 नवंबर को जयपुर में मीडिया से बातचीत में कहा था कि मानगढ़ में जिस तरह से पीएम की इच्छाएं थीं, ऐसी ही सेवानिवृत्ति दास नबियां की भी थी। उसके बाद क्या हुआ, दास नबी कहाँ हैं, यह सब जानें। इस उम्मीद को हलके में नहीं लेना चाहिए। गहलोत ने नौकर नबीआज़ाद से उनकी तुलना का अब गद्दार बड़े पायलट को जवाब दिया है।

2 नवंबर को गहलोत ने गाइडलाइन का हवाला दिया था, अब खुद तोड़ा
पायलट ने जब 2 नवंबर को गहलोत पर तंज कसते हुए दास नबी आजाद से तुलना की थी, उस वक्त गहलोत ने कहा था कि ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गाइडलाइन जारी की है, उस अनुशासन का पालन करना चाहिए। अभी बीजेपी का प्रतिस्पर्धी ही मकसद होना चाहिए। उसके 20 दिन बाद ही गहलोत ने पायलट को गद्दार देश किसी भी हालत में सीएम नहीं बनने देने की चुनौती देकर खुद गाइडलाइन तोड़ दी।

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कैसे गहलोत बोले-पायलट ने गद्दारी की, सीएम बन सकते हैं:कहा- उनके पास 10 विधायक नहीं; बोले- कोई हमेशा एक पद पर नहीं रहता

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान आगमन से पहले कांग्रेस में एक बार फिर से बहुत अधिक विस्तार शुरू हो गया है। प्लॉट अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि पायलट को सीएम कैसे बनाया जा सकता है। जिस आदमी के पास 10 विधायक नहीं हैं, जो बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)

4 दिन से मिल रहे थे इस बवंडर के संकेत:जानिए- हादसे कैसे हुए एक के बाद एक घटना, क्यों पायलट पर खतरे हुए गहलोत?

बढ़ती ठंड के बीच राजस्थान की सियासी सीढ़ी चढ़ी हुई है। भोपाल अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर जो सीधे हमले बोले, उससे आने वाले दिनों में राजस्थान का सियासी ड्रामा निर्णायक मोड़ पर आने के संकेत मिल रहे हैं। सब कुछ इस बात पर टिका रहेगा कि गहलोत के इस जमा को सोनिया गांधी सहित कांग्रेस हाईकमान किसके रूप में लेते हैं। (पूरी खबर पढ़ें)

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