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पीएम बोले- देश के वास्तविक इतिहास को व्याख्यान: विदेशियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम हुआ; हम ऐसी भ्रम को सुधार रहे हैं

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  • लचित बरफुकन की 400वीं जयंती समारोह में पीएम मोदी ने कहा, भारत औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आ रहा है

नई दिल्ली2 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वास्तविक इतिहास को चिंतित किया है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसा इतिहास पढ़ाया जाता है, जो विदेशियों के एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का नहीं है। देश के वीरों की भी खूब कहानियां हैं। ऐसे लोगों के बारे में बताया ही नहीं गया। हम सभी अब उन सभी को सुधार रहे हैं, जो पहले की गई हैं।

दिल्ली के विज्ञान भवन में पीएम ने लचित बरफुकन की 400वीं जयंती कार्यक्रम के समापन समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने सेनापति लचित के योगदान को याद किया।

ये तस्वीर दिल्ली के विज्ञान भवन की है।  यहां पीएम मोदी ने वीर को श्रद्धांजलि दी।

ये तस्वीर दिल्ली के विज्ञान भवन की है। यहां पीएम मोदी ने वीर को श्रद्धांजलि दी।

पीएम ने सेनापति लचित के चयन आयोग
पीएम ने कहा कि मैं असम की धरती को प्रणाम करता हूं, जिसने जैसे वीर दिए। वीर लचित ने अपने जीवन में विराट रूप और वीरता प्रकट की है। असाम की धरती इसके गवाह हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी तलवार के आगे से हमें झुकना चाहिए, हमारी पहचान को पाना चाहता है तो हमें उसका जवाब देना आता है।

पीएम मोदी ने वीरता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित की और उनकी चमक को प्रभातफेरी।

पीएम मोदी ने वीरता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित की और उनकी चमक को प्रभातफेरी।

सेनापति लचित को कहा जाता है शिवाजी
लचित बरफुकन का जन्म 24 नवंबर 1622 को हुआ था। वे अहोम साम्राज्य के प्रसिद्ध सेनापति थे। लचर को भूत की शिवाजी भी कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने शिवाजी की तरह मुगलों की कई बार रणनीति से हराया था। मुगलों को हराने वाले लचित की याद में हर साल असम में 24 नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है।

पीएम मोदी की अहम बातें…

1. कोई भी रिश्ता देश से बड़ा नहीं होता
पीएम मोदी ने कहा कि सेनापति लचित का जीवन प्रेरणा देता है कि हम परिवारवाद से ऊपर उठते हुए देश के बारे में बयान करते हैं। उन्होंने कहा था कि कोई भी रिश्ता देश से बड़ा नहीं होता।

2. देश की पहचान को हम सुधार रहे हैं
पीएम ने कहा कि लच्छित का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि हम व्यक्तिगत स्वार्थों को देश हित की प्राथमिकता नहीं देंगे। इतिहास को लेकर, पहले जो गलतियां हुई हैं। अब देश में सुधार हो रहा है।

3. संस्कृति को बचाने में भारत के हर युवा योद्धा
पीएम ने कहा कि जब कोई बाहरी ताकतें अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की बात करती हैं तो भारत का हर युवा योद्धा होता है।

4 रुपए के लिए बंधुआ मजदूर लचित के पिता थे

सेनापति लचित के पिता को 4 रुपए का कर्ज चुकाने के लिए बंधुआ मजदूर बनना पड़ा था। बाद में मोमाई के नेतृत्व की क्षमता को देखते हुए अहोम साम्राज्य के दसवें राजा प्रताप सिंहा ने उन्हें अपना कमांडर इन चीफ बनाया। इसके बाद ये परिवार पूरी तरह से अपने राजा और अहोम के लिए समर्पित हो गया। वीर लचित की पूरी कहानी पढिए ….

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