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बाहरी बातों से फर्क नहीं मिलेगा, पढ़ाई का मौका मिलेगा और ज्यादा मौका मिलेगा हार्दिक पांड्या बनाम विराट कोहली कप्तानी; भारत बनाम न्यूजीलैंड टूर

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नेपियर4 मिनट पहले

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टी-20 वर्ल्ड कप के बाद बीसीसीआई लिमिटिड-लंबे अटैचमेंट की साझेदारी के लिए अलग-अलग कप्तान बनाने का मन बना रहा है। पिछले साल आईपीएल की नई नवेली टीम गुजरात टाइटंस को चैंपियन बनाने वाले हार्दिक पांड्या को टी-20 टीम का कप्तान माना जा रहा है। वैज्ञानिक भी कह रहे हैं कि पांड्या को टी-20 टीम के कमांडर नियुक्त किए जाते हैं।

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29 साल के पांड्या दोनों मौकों पर बोर्ड की उम्मीद पर खरे उतरे हैं। उनके नेतृत्व में टीम इंडिया ने मंगलवार को न्यूजीलैंड को उसी के घर में टी-20 सीरीज में 1-0 से हराया। उनकी कप्तानी में टीम ने आयरलैंड से दो मैचों की श्रृंखला बनाई थी।

नेपियर में 3 मैचों की सीरीज के आखिरी पायदान पर पांड्या ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने गेंदबाजी और कप्तानी पर बात की। इन सवालों के जवाब के जरिए हम जा रहे हैं- कैसा होगा भविष्य का कप्तान पांड्या.ह धोनी की तरह कैप्टन कूल साबित होगा या फिर कोहली जैसा एग्रेसिव। पढ़ें एक कप्तान के तौर पर पांड्या का विजन…फिलॉसफी…और प्लांस…

सबसे पहले पंड्या के शब्द एग्रेसिव क्रिकेट में हैं
‘एग्रेशन, एक बॉलिंग यूनिट के तौर पर एग्रेशन हर बॉल में विकेट के लिए जाने या फिर हर बॉल पर बाउंड्री जामने की बात नहीं है। यह आपकी बॉडी लैंग्वेज और बिहेवियर से जुड़ी बातें जानना चाहता है।’

अब पांड्या एक कप्तान के तौर पर…

1. एक विजन : यह सीरीज एक नई जर्नी की शुरुआत
प्रश्न –
एक कप्तान के तौर पर इस सीरीज की खाते कैसे देखते हैं?
काफी छोटा दौरा था। सबसे अहम यह था कि हमने दूसरा मैच जीता, वह कॉन्फिडेंस देता है। दूसरी बात कि आगे हमें जो करना है या हम जो करना चाहते हैं, यह उसका एक कदम है। धीरे-धीरे जाने के लिए क्योंकि हमारे पास काफी समय है। यहां से एक जर्नी शुरू हुई है। कोशिश करेंगे कि अब भी उतनी ही श्रंखलाएं लिखें। खुद को बेहतर करें।

2. फिलासीपी : खिलाड़ी को उसके तरीके से खेलने की आजादी मिली
प्रश्न-
विश्व कप में टीम इंडिया को कंजर्वेटिव क्रिकेट के लिए क्रेज किया गया। यहां एग्रेसिव ईशान-पंत को आजया। एक कप्तान के तौर पर पांड्या की फिलॉस्फी क्या है?
उत्तर: खिलाड़ी को सबसे ज्यादा फ्रीडम दे स…दूं। एक अच्छा माहौल दून, ताकि खिलाड़ी बिंदास खेले। जैसा वह चाहता है। और उस पर किसी तरह का दबाव भी न हो। आगे भी वही रहेगा… हम एक तरह से नहीं खेलेंगे। कोशिश करें कि इंजॉय करें। गो, बिंदास अगर आपको लगता है कि पहली गेंद से गिरा है तो बिंदास गो और मारो। हम आपको हमेशा सपोर्ट करेंगे और कोशिश करेंगे कि प्लेयर खुल कर देखें।

3. सिलेक्शन : कोच और मैं जो ठीक करेंगे…करेंगे
प्रश्न- यहां आने से पहले कई बातें हो रही थीं। जैसे- संजू को मौका मिलना चाहिए, तो कोई उस्मान की बात कर रहा था। आप यंग कैप्टन हैं, चीजों को कैसे डील करते हैं?
उत्तर : बाहर कौन क्या कह रहा है उससे इस स्तर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। जहां तक ​​सिलेक्शन की बात है- यह मेरी टीम है, कोच और मैं जो ठीक है। जो साइड हमें चेक कर लेगी… बहुत समय है। सब को मौका मिलेगा और सकोच मिलेगा। ज्यादा कठिन नहीं है। सीरीज छोटी थी। इसलिए कुछ लोगों को मौका नहीं मिला। मैच ज्यादा होते तो मौका मिलता है।

गेम कम थे और मैं ज्यादा चिप और चेंज में विलीव नहीं करता हूं और आगे भी बिलीव नहीं करूंगा।

4. कप्तानी का तरीका: जिस तरह से मैं खेल देखता हूं, मैं उस तरह से कप्तानी करूंगा
सवाल: हर कोई कह रहा है कि पांड्या को कप्तानी दी जाए। क्या आपने उस जोन में डाकिया शुरू कर दिया है कि मैं टीम को कहां ले जाना चाहता हूं?
उत्तर : मेरा मानना ​​है कि जब तक चीजें होती नहीं हैं, मैं नहीं मानता।
मेरा फंडा सिंपल है…चाहे मैं एक सीरीज…दो सीरीज बदली या फिर एक मैच में…जिस तरह से मैं क्रिकेट खेलता हूं, जिस तरह से मैं खेल देखता हूं, मैं उस तरह से कप्तानी करूंगा। मेरा पॉइंट क्लियर है… जब-जब मौका मिलेगा, मैं कोशिश करूंगा कि उस तरह से जाऊं। जिस तरह का क्रिकेट खेल रहा है। एज ए यूनिट उस तरह का क्रिकेट दिखाता है। उसी का पहलू है।

5. नेतृत्व क्षमता: मेरा नेचर ही ऐसा है कि मैं हर साल साथ लेकर चलता हूं
सवाल: पिछले साल में एक बदला पांड्या दिखा है। अपने चयन से सभी को खुश रखना कठिन या सरल?
उत्तर : मुश्किल नहीं होता। यह अंत में करता है कि आप कैसे संभालते हैं। मेरा सिंपल है, मेरा रिलेशन हर खिलाड़ी के साथ बराबर अच्छा है और अगर मैं किसी को नहीं खिला रहा हूं, तो उसे भी पता चल जाएगा कि इसमें कुछ पर्सनल नहीं है। किसी सिचुएशन की वजह से नहीं मिला…और वे भी मेरी मदद करते हैं। क्योंकि, मैं बंदा ऐसा हूं कि जो हमेशा लोगों के पास रहा है और हमेशा लोगों को अपने पास रखा है। अगर किसी को मेरी जरूरत है तो मेरे दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले हैं।

कोशिश करता हूं कि उनके जोन में जाता हूं… मैं उनसे लगातार बात करता हूं, क्योंकि उनकी धारणा हूं। मुझे पता है कि मैं भी वर्ड बोल दूं। उनके लिए मुश्किल ही होगी। क्योंकि, जब आप लगातार सटीक बैठते हैं तो बुरा लगता है। उसी समय जब लगातार बात करें तो वो अपनी बात मुझसे शेयर कर सकते हैं। यदि उसे बुरा लग रहा है तो। उनके पास कोच से बात करने का भी अधिकार है। मुझे नहीं लगता कि मेरी टीम में वो परेशानी होगी। क्योंकि, मेरा बिहेवियर और नेचर ऐसा हो रहा है कि मैं निश्चित ही हूं कि सब साथ में हूं।

संजू सैमसन के सिलेक्शन में बोले- ‘ जहां तक ​​संजू सैमसन की बात है वो अनफॉरचुनेट था हमें उसे खिलाना था लेकिन, किसी वजह से नहीं खेला जा सकता था।’

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