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बिना ब्रीफ के वकील जैसे बिना बैट के युगल: CJI चंद्रचूड़ युवा वकील से बोले-कहते हैं पर कागज नहीं

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4 मिनट पहले

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जस्टिस चंद्र चूड़ ने 9 नवंबर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का पद संभाला है।  उनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक होगा।  - दैनिक भास्कर
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जस्टिस चंद्र चूड़ ने 9 नवंबर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का पद संभाला है। उनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक होगा।

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सीजेआई दीवाना चंद्रचूड़ अपने डॉक्युमेंट और कोर्ट रूम में जाने वाले यूनिक कमेंट्स के लिए मशहूर हैं। शुक्रवार को भी एक मामले की सुनवाई के लिए पहुंचे यंग एडवोकेट को उन्होंने डांटा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस वकील को मामले से जुड़े पेपर के साथ न रखने के लिए फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बिना ब्रीफ एडवोकेट ऐसा है, जैसे बिना बैट के सचिन युगल।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा- “यह बुरा लगता है। आप अपने जोड़े और बैंड में हैं लेकिन आपके पास कोई कागज नहीं है। आपके पास हमेशा अपना ब्रीफ होना चाहिए।”

सितंबर में पहली ग्रीन बेंच बना चुके हैं सीजेआई
दो महीने पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली और केंद्र सरकार के एक मामले की सुनवाई के दौरान ग्रीन बेंच बनाई थी। उन्होंने केस से जुड़े हुए 27 सितंबर की सुनवाई में कोई दस्तावेज या भौतिक दस्तावेज दस्तावेज नहीं आने की बात कही। एससी की रजिस्ट्री और उसके सेल के अधिकारियों ने कहा था कि सभी तकनीक का उपयोग करने की शिक्षा देने के लिए।

शुक्रवार को ही संशोधित विकल्प
CJI चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को ही पूर्ण न्यायालय में झूठे फैसले के लिए सबसे बड़ा फैसला साझा किया है। उन्होंने घोषणा की कि सर्वोच्च न्यायालय की हर पीठ रोज़ 10 याचिका याचिकाएँ और 10 याचिका याचिकाएँ सुनवाई करेंगी। CJI चंद्रचूड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में आवंटन याचिका के 13 हजार मामले लंबित हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ की से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

जस्टिस चंद्रचूड़ बोले- हमें सांस लेने दो

चार महीने पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक याचिका दायर करने को लेकर नाराज हो गए। उन्होंने यहां तक ​​कहा था कि मैंने हाल ही में एक न्यूज आर्टिकल पढ़ा, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई में देरी कर रहा है। हमें भी तो एक ब्रेक दें! आप जजों को कितने बनाए जा सकते हैं। इसकी भी एक सीमा है। पढ़ें पूरी खबर…

कोरोना ने आत्मनिर्भर बना दिया, खुद ऑर्डर टाइप कर रहा हूं

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड ने कहा था कि कोरोना ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया। अब अपना नंबर खुद टाइप ही कर लेते हैं। जस्टिस चंद्रचूड ने कहा, “पहले मैं अपने कोर्ट मास्टर को डिक्टेट करता था, लेकिन कोरोना काल में कोर्ट कर्मचारियों की अनदेखी के कारण मैंने खुद को अपने लैपटॉप पर लिखना शुरू किया। पढ़ें पूरी खबर…

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