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बेटी का जन्म तो पत्नी को 14 साल का, फिर लिटाया: 5 बार अबॉर्शन रिसर्च, मर्डर के बाद नाबालिग बेटियों पर ही मामले

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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आफताब अमीन पूनावाला ने लिव इन पार्टनर श्रद्धा वॉकर की हत्या कर दी और उसके शव के 35 टुकड़े कर जंगल में फेंक दिए। देश को बंदी बनाने वाला यह मामला इकलौता नहीं है।

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हम आपको ‘खूनी पार्टनर’ सीरीज में ऐसी ही सड़क दास्तां सब्सक्राइब करते हैं, जिसमें प्यार करने वालों ने न सिर्फ एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने, बल्कि कटल की ऐसी तहरीर लिखी कि सुनने वाले कांप गए। इसी श्रृंखला के माध्यम से हम यह भी सब्सक्राइब करते हैं कि ऐसी स्थिति में सावधानी, गोपनीयता या बचाव के तरीके क्या आज जा सकते हैं।

‘खूनी कलाकार’ सीरीज के हिस्से-1 में हम हैं दिखावटी- रोशन शहर की अनु बंसल की कहानी, जिनके पति ने सिर्फ बेटे की चाहत में बेटियों के सामने जिंदा जला दिया।

14 जून, 2016 की सुबह। जब बेटियां जगीं तो बेली में मां को पिटते देखा। पीटने वालों में पति और सुसुराल के बाकी सदस्य शामिल थे। बेटियों रोईं और मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन पत्नी पीट रहे शख्स ने बेटियों को जबरन कमरे में बंद कर दिया। फिर लगा पत्नी पर मिट्टी का तेल छिड़कने से आग लग गई। कमरे में बंद बेटियाँ झिड़की से जलती माँ को टैग कर रही हैं और उन्हें देखने के लिए चिल्ला रही हैं। जब तक पड़ोसी आए, तब तक उनकी मां 95 साल तक जल चुकी थी और पति सहित सुसुराल वाले भाग चुके थे।

महिला का पहले रोशनशहर और फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चला। एक हफ्ते चले इलाज के बाद महिला ने दम तोड़ दिया, लेकिन मरने से पहले बेटियों को फुसफुसाकर ने बताया कि उसे छोड़ना मत!

दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान अनु बंसल और उनकी बेटियां- लतिका बंसल और तान्या बंसल।  लतिकाएं कहती हैं कि मां के अंतिम शब्दों ने दी लड़ी की हार।

दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान अनु बंसल और उनकी बेटियां- लतिका बंसल और तान्या बंसल। लतिकाएं कहती हैं कि मां के अंतिम शब्दों ने दी लड़ी की हार।

सात जन्म का वादा कर बनाया था घर
अब जरा फ्लैशबैक में फैल रहे हैं। उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल शहर में रहने वाले मनोज बंसल की शादी 31 जून 2000 को अनु बंसल से हुई। सात जन्म साथ का वादाकर मनोज अनु को अपना घर लाया। शादी के दो साल बाद अनु ने बेटी लतिका को जन्म दिया। पहला बच्चा ही बेटी है, इससे सुसुराल वाले खफा हो गए। मनोज बंसल प्राइवेट जॉब करते हैं और अनु बंसल पति का बंटवारा करने के लिए साड़ी करते हैं। अपनी बेटी को अच्छी से पाल रही थी।

दूसरी बेटी हुई तो घर से निकाल दिया
लतिका के जन्म के तीन साल बाद अनु बंसल के घर में फिर से खुशियां आने वाली थीं। सुसुराल के बेटे का आसियान था, लेकिन जब दूसरी बार भी बेटी हुई तो सुसुराल के सूत्रों ने दोनों बेटियों के साथ अनु को घर से निकाल दिया।

अनु अपने मायके चले गए। मनोज ने दूसरी शादी करने की बात शुरू की। तब अनु बहुत रोई थी। इस बीच अनु के भाई ने समझदारी दिखाते हुए अपनी बहन और सुसुराल साझा को समना दिखाया। तब मनोज ने अपने घर के पास ही मकान किराए पर ले लिया, जहां पत्नी और दोनों बेटियों के साथ रहने लगी।

मनोज और अनु साथ रहते हैं, लेकिन यहां भी अनु की सास-ननद और जेठ-जेठानी आने लगते हैं। ये लोग जब तब अनु को ताने देते हैं। मनोज ने भी शराब पीकर पत्नी को पीटना शुरू कर दिया। इस बीच वह फिर से गर्भवती हो गई, लेकिन अवैध तरीके से गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग पता लगाकर उसका गर्भपात कर दिया गया। अबॉर्शन एक-दो बार नहीं, पूरे पांच बार किया गया।

शादी के 16 साल बाद 2016 तक स्थिति नहीं बदलेगी। अनु की बड़ी बेटी लतिका बंसल 14 साल और छोटी बेटी तान्या बंसल 11 साल की हो चुकी थीं। मनोज ने बेटियों और पत्नी के खर्च के लिए पैसा देना बंद कर दिया था। अनु बेटियों की पढ़ाई और घर के खर्च के लिए सिलाई-कढाई करती है। 14 जून, 2016 को शॉन ने मिट्टी का विवरण अनु को जिंदा जला दिया।

अनु बंसल मामलों में जब पुलिस ने दो महीने तक जांच नहीं की, तब बेटियों ने खूब से जोर पकड़ा।

अनु बंसल मामलों में जब पुलिस ने दो महीने तक जांच नहीं की, तब बेटियों ने खूब से जोर पकड़ा।

लतिका ने बताया कि जिस रोज मां को जलाया गया, उस पर ही दादी ने मां से कहा- ‘तू एक लड़का पैदा नहीं कर सका। दो-दो लड़कियां पैदा होती हैं और इन पर लाड तो ऐसा करती है, जैसे कहीं की राजकुमारी हो। इन अंतियों का हम क्या करें, इनसे हमारा वंश तो आगे नहीं बढ़ेगा। पैदा कर या इस घर से इन दोनों को लेकर चला जा।’ इस पर मेरी मां ने दादी का विरोध किया, जिससे पापा नाराज हो गए। वे मां को मार रहे हैं। हम दोनों को कमरे में बंद कर दिया।

मैं दौड़कर कमरे की खिड़की खोल रहा हूँ। बाहर देखा तो दादी ने मां के बाल पकड़ रखे थे। मेरी दोनों बुआ-फूफा और ताई-ताऊ भी आ चुके थे। मेरी मां को बचाने के बजाय वो लोग पापा और दादी का साथ दे रहे थे, उन्हें उकसा रहे थे। बहस बढ़ने पर पापा ने मेरी मां के ऊपर मिट्‌टी का तेल छिड़का। दादी ने उन पर माचिस की जलती तिली फेंक दी। मेरी मां हम लोगों के सामने जल रही थी। वो चीख रही थी। दोनों कमरे से मां को बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन वे लोग मां को छोड़कर भाग गए।

चीख-पुकार पड़ोसी पड़ोसी आए। पड़ोसियों ने मां को बचाने की कोशिश की। तान्या और मी रूम से आउट आउट। पुलिस और एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं आई। मां को कॉल कर मां को जलाने की जानकारी दी। 10 मिनट के अंदर मामा और नानी घर आ गए। मां को जिला अस्पताल ले जाया गया, वहां से सफदरजंग भेजा गया, जहां 8वें दिन उनकी मौत हो गई।

अस्पताल में तड़पती अनु बोली- छोड़कर छोड़ना नहीं
लतिका बताती है कि ‘मेरी और तान्या की जिंदगी रुक गई। पिता का प्यार भी कभी नहीं मिला। मां का साया पापा और बाकी घर को खोल लिया। हम दोनों गुमनाम हो गए। जब मां का अस्पताल में इलाज चल रहा था, उस वक्त मैं और तान्या हर वक्त मां के आसपास रहती थी। मां बहुत तकलीफ में थीं। शक्ल भयानक हो गई थी। मैं उन्हें छू भी नहीं सकता था। गले लगकर उनका दर्द नहीं फैल सकता था।’ अस्पताल में मरने से पहले मां फुसफुसाई- ‘छोड़ नहीं सकती। पढ़-लिखकर कुछ करना, जिससे लोग जाने की तुम मेरी बेटियाँ हो। 20 जून को डॉक्टर ने बताया कि मां नहीं चल रही है।’

उसी दिन मैंने कहा था कि कुछ लोग अपने पिता और उनके साथ रहने वालों को जेल में डाल देंगे। पहली मां का अंतिम संस्कार। उसके मामा के साथ जाने पर पिता, दादी, ताई-ताऊ, दो बुआ और फूफा समेत 8 लोगों की हत्या करने के आरोप लगाए गए।

जब न पुलिस सुन रही थी, तबिका बंसल ने अपना उंगली काटकर खून से लिखा, जो मीडिया में खूब वायरल हुआ।

जब न पुलिस सुन रही थी, तबिका बंसल ने अपना उंगली काटकर खून से लिखा, जो मीडिया में खूब वायरल हुआ।

खून से लिखा सीएम का पत्र, तब हुई पिता की गिरफ्तारी
मां का अंतिम संस्कार कर दोनों नाबालिग बेटियों ने पिता का घर छोड़ दिया। पहले दो महीने तक पुलिस ने जांच शुरू ही नहीं की। लतिका ने आईडी से मदद की शिकायत कई लेटर लिखे हैं। फिर तंग आकर अपनी उंगली काटी और खून से लेटर लिखा, जो वायरल हो गया। मीडिया में खबरें छपी। उस वक्त के सभी मुख्यमंत्री यादव ने 13 अगस्त 2016 को मिलने को बुलाया। इसके बाद उनके पिता मनोज बंसल और उनके घर को हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस ने जांच में मनोज बंसल को छोड़ सबका नाम निकाल दिया। पुलिस ने जब कोर्ट में चार्ज साइज पैर की तो इसमें शामिल आईपीसी की धारा 302 (हत्या करने) को आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) कर दी। पैसे नहीं थे, इसलिए किसी भी वकील ने लड़ाई को राजी नहीं किया। दोनों लड़कियां बुलंदशहर के एडवोकेट संजय शर्मा के यहां पहुंचें। एडवोकेट संजय शर्मा बिना लाइसेंस के केस लड़ने को राजी हो गए।

नाबालिग बेटियों को ही भ्रम हो जाता है
एडवोकेट संजय शर्मा ने बताया कि ये दोनों बच्चे अपनी मां के साथ मुझसे मिलने आए और अपनी मां की दुखद दास्तां सुनी। इन बच्चियों ने अपने मामा और नानी के खिलाफ धमकाने और आरोपों के आरोप में मुरादाबाद थाने में मामले किए। पुलिस इन बच्चों को धमकाने लगी, ताकि बच्चे डरकर मर्डर के मामले वापस ले लें। जब मैंने बच्चो की पूरी बात सुनी, उसके बाद इस मामले को लड़ने का फैसला किया।

लतिका तान्या की चिट्ठी वायरल हो के बाद उस वक्त देर से अखिलेश यादव ने दोनों को मिलने के लिए फोन किया।

लतिका तान्या की चिट्ठी वायरल हो के बाद उस वक्त देर से अखिलेश यादव ने दोनों को मिलने के लिए फोन किया।

पापा को भरोसेमंद के पीछे
एडवोकेट संजय ने कोर्ट में मामले की जांच हत्या के आरोप में याचिका दायर की। इसके बाद संजय शर्मा को केस में वापसी की धमकी मिली, पैसे का लालच भी दिया गया, लेकिन उन्होंने नाबालिग बेटियों की कानूनी लड़ाई लड़ी।

आखिरकार 6 साल की लंबी लड़ाई के बाद 27 जुलाई, 2022 को कोर्ट कोर्ट का फैसला आया। मनोज बंसल की पत्नी अनु बंसल की हत्या का दोषी करार देते हुए मूल कारावास की सजा सुनाई गई। 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। पिछले 6 साल से दोषी मनोज बंसल जेल में है।

अनु बसल की बेटियां, उनकी मां के कातिल और उनके दोषी पिता सजा में हैं। वे मां के कत्ल में शामिल होने के लिए लड़ाई करने के लिए कानूनी के दायरे में अन्य बांधों को शामिल करते हैं।

बाप से नहीं मां के लिए जुड़ा
लोग मुझसे पूछते हैं कि पिता के खिलाफ लड़ने की कमजोरी नहीं पड़ी है? मां की मौत के बाद मैंने घर छोड़ दिया। तारीखों पर कोर्ट जा रहा था। कभी पिता के चेहरे पर या बाकी घर वालों के चेहरे पर अपने लिए कोई इमोशन नहीं देखा। अकेले हमको ताने सुनाए जाते-मिलते संतुष्टि। अपने ही बाप को जेल भेजा। फैसले के बाद मैंने जवाब दिया- मां की मौत के साथ ही मेरे पिता भी मर गए। मैं कभी बाप से नहीं लड़ रहा था। मैं सिर्फ अपनी मां के लिए लड़ाई कर रही थी।

अपनी मां और नानी के साथ लतिका और तान्या बंसल।  6 साल की लंबी लड़ाई के बाद दोनों ने अपने पिता को सजा दी।

अपनी मां और नानी के साथ लतिका और तान्या बंसल। 6 साल की लंबी लड़ाई के बाद दोनों ने अपने पिता को सजा दी।

एसपीडी से पीड़ित होती हैं घटना, सिर्फ खुद की खुशी प्रा​योरिटी
मनोचिकित्सक डॉ. सुनील अवाना कहते हैं कि इस तरह के मामले में पंच एंटी सोशल पर नैलाइट डिसऑर्डर (एएसपीडी) का शिकार होता है। वे अपनी खुशी के लिए दूसरी परेशानियां देते हैं। किसी को चोट करने वाला या मर्दर कर उन्हें जरा भी अफसोस नहीं होता है। इस तरह के लोग सही और गलत की भावना वाली बात भूल जाते हैं, बस अपनी खुशी का ख्याल रखें।
बचाव: सतर्क रहें और नजरें करें
पीड़ित को चोट लगने से उसके अभिनय में जलन होने के बाद भी अफ़सोस नहीं होता। परेशान होने के बाद भी अगर बार-बार गली-गलौज और प्रभावित कर रहा है, चोट पहुंचा रहा है तो सतर्क रहें। अपनी और अपने अभिनय की शुरुआत करें। हालांकि, इस आदेश से पीड़ित लोग जल्दी से नोटिस के लिए तैयार नहीं होंगे, इसलिए परिवार व बुजुर्गों को शामिल करें। अगर फिर भी सुधार नहीं हो रहा है तो ऐसे हाथों से निकल जाएं, क्योंकि मनुष्य अपने मूल स्वभाव को नहीं बदल सकता और उससे बदलने की उम्मीद पाल लेना भी गलत है।

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