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भाई के स्टोर बैग में थी आयुषी की लाश: बुजुर्ग दादी-नानी फोटो देखते हुए खड़े हुए, पड़ोसियों ने गोली की आवाज नहीं सुनी

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दिल्ली/गाजियाबाद2 मिनट पहलेलेखक: सचिन गुप्ता

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इसके अलावा यामा एक्सप्रेस-वे के किनारे ट्रॉली बैग में बीसीए होस्ट आयुषी यादव की हत्या उसके पिता ने ही की थी। आयुषी के मां-बाप को जेल भेज दिया गया है। घर में अब बस हत्यारे दंपती की बड़ी मां-बाप और एक बेटा रह गया। मर्डर के टाइम एजरी का ब्रदर ऐज स्कूल गया था।

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  • आइए अब आपको दिल्ली के बदरपुर में आयुषी के मकान तक को लेकर चल रहे हैं…
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आयुषी के दादाजी बोले- हमें आभास नहीं था, नहीं तो पढ़ाई करते

ये आयुषी का मकान है, जो दिल्ली के बदरपुर में है।  घर के बाहर आयुषी की दादी और अन्य महिलाएं बैठी हैं।

ये आयुषी का मकान है, जो दिल्ली के बदरपुर में है। घर के बाहर आयुषी की दादी और अन्य महिलाएं बैठी हैं।

22 साल की उम्र में यादव दिल्ली के बदरपुर इलाके में मुड़कर सड़क-65 में रहता था। यहां करीब लदान सौ से ज्यादा ऐसी गालियां हैं। इनमें से 65 नंबर वाली गली में 100 मीटर घुसते ही बाएं हाथ पर आयुषी की तीन मंजिला मकान है।

डेली भास्कर की टीम सोमवार शाम करीब 6:00 बजे इस गली में पहुंची। यहां सन्नाटा पसरा था। कुछ महिलाएं एक घर के गेट पर रोमांटिक होने-जाने वालों को एकटक देख रही थीं। आयुषी की बूढ़ी दादी गेट पर ही दो और महिलाओं के साथ उदासी बैठी मिलीं। पिछले तीन चार दिनों से रोते-रोते उनके आंसू पोंछ रहे हैं।

आयुषी के दादा गामा प्रसाद यादव एमसीडी से नाराज हैं। वो घर के एक कमरे में अंदर बैठे थे। बोले- “अब कुछ नहीं बचा। सब खत्म हो गया। भगवान ने ये दिन दिखाया कि पहले हमें क्यों नहीं लिया। हमें जरा-सा भी आभास नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है, वरना परिवार को भटकने से पहले बचाओ। “

बदरपुर की गली नंबर-65 में इसी के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।

बदरपुर की गली नंबर-65 में इसी के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।

‘दीदी बहुत अच्छी थीं’
मुलाकात हमारी इसी गली में एक लड़का हुआ। उम्र करीब 16 साल। वो आयुषी को दीदी बुल्लाता था। स्टेट्स है, “दीदी बहुत अच्छी थीं। अपने बाजार के सारे काम मेरे करती थे। वो घर से बहुत कम छतें थीं। भैया और अंकल (नितेश यादव) भी बहुत अच्छे हैं। भैया ही दीदी को स्कूटी से कोचिंग सेंटर तक छोड़कर और फिर। वापस आए थे। इस घटना के बाद मैं सदमे में हूं। मैंने कल से खाना तक नहीं खाया। दीदी के साथ ये क्या हो गया?”

पड़ोसी बोला- जब पुलिस घर आई, तब हमें कांड का पता चला
आयुषी के एक और पड़ोसी ने बताया, “बच्चे अक्सर कहीं भी घूमते चले जाते हैं। इसलिए हमें कुछ पता नहीं चला। न किसी गोली की आवाज आई, न आयुषी के लापता होने का पता चला। हमें तो उस वक्त खबर मिली, जब रविवार को मथुरा पुलिस वालों के घर पर आई। दिल्ली पुलिस भी साथ में थी। बदरपुर थाने के कुछ पुलिसवाले मेरे नोटिफिकेशन थे। मैंने उनसे पूछा। तब पता चला कि आयुषी की हत्या हो गई है। इस मामले में स्थिति बदलती जो रही हो, लेकिन उम्रषी और उनका परिवार बेहद अच्छा था।”

नितेश यादव और पत्नी बृजबाला।  बेटी की हत्या के आरोप में दोनों जेल में हैं।

नितेश यादव और पत्नी बृजबाला। बेटी की हत्या के आरोप में दोनों जेल में हैं।

आयुषी के परिवार की गली में दो घर
आयुषी परिवार की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है। नितेश यादव मूल रूप से जिला देवरिया के भलुअनी के गांव में रहने वाले हैं। नितेश के पिता एमसीडी दिल्ली में नौकरी करते थे। इसलिए कई दशक पहले पूरा परिवार दिल्ली के बदरपुर इलाके में शिफ्ट हो गया था। गली नंबर-65 में नितेश के 2 घर हैं। 1 मकान खाली रहता है। दूसरे घर में फ्लोर पर दादा-दादी रहते हैं।

पहली फ्लोर पर नितेश, पत्नी बृजबाला, बेटी आयुषी और बेटा आयुष यादव रहते हैं। नितेश की नोएडा में इलेक्ट्रॉनिक शॉप है, जहां वो फोर्ड कार से रोजाना अप-डाउनिंग करते थे। आयुषी देहली ग्लोबल इंस्टीट्यूट एंड टेक्नोलॉजी जनकपुरी दिल्ली में बीसीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही थी, जबकि भाई आयु 11वीं में पढ़ें। मां बृजबाला गृहिणी है। देवरिया जिले में इस परिवार की पुश्तैनी जमीन है।

लाल रंग का वही ट्रॉली बैग है, जिसमें आयुषी का शव पैक किया गया था।  ये बैग उनके भाई आयुष यादव स्टारर में यूज करता था।  फोटो जिला देवरिया की है, जब वो अपने माता-पिता गांव गए थे।

लाल रंग का वही ट्रॉली बैग है, जिसमें आयुषी का शव पैक किया गया था। ये बैग उनके भाई आयुष यादव स्टारर में यूज करता था। फोटो जिला देवरिया की है, जब वो अपने माता-पिता गांव गए थे।

लाल पोर्टफोलियो को स्टोर तक लेकर जाता था आयुष
दंपती ने बेटी की हत्या करने के बाद लाश को पैक करने के लिए लाल रंग के जिस ट्रॉली बैग का इस्तेमाल किया। वो घर में पहले से ही मौजूद था। उनका उम्र का बेटा यादव अक्सर इस बैग को लेकर अपने टूर पर जाता था। ‘दैनिक भास्कर’ को इस ट्रॉली बैग का एक वीडियो मिला है, जब वो जुलाई में घूमने के लिए इसी ट्रॉली बैग को लेकर गया था। नितेश के बेटे आयुष के दोस्त ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ये वही पोर्टफोलियो है, जिसमें आयुषी यादव की लाश पैक की गई है।

अफेयर की बात पर मोहल्लेवाले हैरान
मथुरा पुलिस के अनुसार, “आयुषी का बॉयफ्रेंड छत्रपाल नाम का लड़का है। मोहल्ले के लोगों को ये बात जरा भी हजम नहीं होती। वे कहते हैं कि आयुषी ऐसी लड़की नहीं थी। न उसकी ऐसी कोई बात आज तक सुनने में आई।”

21 साल की उम्र में यादव बीसीए का दूसरा साल होस्ट कर चुके थे।  17 नवंबर को उसकी हत्या कर लाश ट्रॉली बैग में पैक करके फेंक दी गई थी।

21 साल की उम्र में यादव बीसीए का दूसरा साल होस्ट कर चुके थे। 17 नवंबर को उसकी हत्या कर लाश ट्रॉली बैग में पैक करके फेंक दी गई थी।

पढ़ें 17 नवंबर की दोपहर से अगली सुबह तक क्या हुआ?
उम्रषी एक साल पहले भरतपुर के रहने वाले छत्रपाल के साथ लव मैरिज कर चुकी थी। ये शादी दिल्ली के शाहदरा स्थित आर्य समाज मंदिर विवाह बंधन ट्रस्ट स्कूल में हुई। इसने आयुषी-छत्रपाल को विवाह प्रमाण पत्र भी दिया था।

ये बात आयुषी के परिवार को पता चली तो वे नाराज हो गए। 17 नवंबर को इसे लेकर खूब लड़ाई हुई। जब बात नहीं बनी तो मां बृजबाला ने फोन करके नितेश यादव को घर बुलाया। नितेश दुकान से तैश में आया और 17 नवंबर की दोपहर करीब दो-ढाई बजे घर के अंदर बेटी को गोली मार दी।

किसी को पता नहीं चला, इसलिए दंपती ने इस परदा निवेश की योजना की। नितेश बाजार से सफेद रंग की बड़ी पॉलीथीन लेकर आया। बाजार उनके घर से 100 कदम की दूरी पर है। लाश को पॉलीथीन में पैक किया गया, ताकि खून न फैले। फिर बॉडी को ट्रॉली बैग में पैक किया गया और रात होने का इंतजार किया गया।

18 नवंबर की सुबह नितेश ने अपनी फोर्ड कार में पोर्टोर्ट को डिग्गी में रखा। ड्राइविंग सीट पर नितेश और बराबरी में पत्नी बृजबाला बैठी। बदरपुर में मोड़ मार्ग की गली नंबर-65 से एक किमी. चलते-चलते दिल्ली-आगरा हाईवे का रास्ता शुरू हो जाता है। सुबह 5.30 बजे सुबह जिले का कोटवन टोल प्लाजा पार किया। 6.50 के आस-पास उन्होंने ये पोर्टपोर्ट में रूटा थाना क्षेत्र स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे के सर्विस रोड पर ग्या में फेंक दिया। वापसी में सुबह 7.10 बजे मांट टोल प्लाजा पर ये कार वापस दिल्ली जाती हुई सीसीटीवी में दिखी।

नितेश और उसकी पत्नी लाश को ठिकाने पर ठिकाने लगाने के करीब 8.15 बजे पहुंचे थे। उन्होंने अपनी कार किसी अन्य जगह पर चढ़ाई की। फिर पैदल घर पर आकर अपना कमरा में आया। मोहल्ले-पड़ोस में किसी को कुछ पता नहीं चला, इसलिए नितेश प्रतिदिन की तरह उस दिन भी नोएडा में अपनी दुकान पर गया था।

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