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भास्कर सरोकार; सरकरें निम करने के बारे में बुराईता?: अनुकंका के आधेर पर मिलने वाली सरकारी नर्तियोरों मेंबेटिंनो को बेयोट्स की तैरह होल क्यूर नहीं?

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  • भास्कर चिंताएं; सरकारें नियम क्यों नहीं बदलतीं? अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली सरकारी नौकरियों में बेटियों को बेटों की तरह अधिकार क्यों नहीं दिया जाता?

नई दिल्लीएक प्रथमलेखक: पवन कुमार

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उत्तर प्रदेश के लिए सबसे अच्छा है, बेटी का अधिकार है। अगर किसी व्यक्ति की एक बेटी होती है, तो वे बैठने के लिए बैठने वाले होते हैं। इनमें से चंद महिलाएजी ही हिम्मत जुटाकर अदालतों को आगे बढ़ाना है, जीवती है … और नोकरी पा लेति हैं।

अ, महिला को हक नहीं मिलता है। बार-बार की अदालतों को याद रखना जारी रखें। पिघली 5 साल में ऐऐऐ ्् आे े े े चके। ; महिला-पुरुषों के लिए एक समान होना चाहिए।

अनुपंपा के आधार पर नौकरी के लिए ये 3 मामले नजीर

केस 1: उत्तर प्रदेश
बेटी को परिवार से बाहर असंवैधानिक

प्रयागराज की मंजुल की मृत्यु हो जाने के बाद अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन था। प्रारंभिक अधिकारी ने नवंबर 2020 में आवेदन दिया है ठुकरा कि मंजुल का लग्न होन है। मंजुल बालादित्सा। जेन ने 14 2021 को सुनाया कि बेटी के परिवार के परिवार से अनसंवैधान्य है। जाकर

केस 2: कर्नाटक
ठीक वैसा ही जैसा विवाहिता का,

कृषि विज्ञान विभाग में। भविष्य के लिए आवेदन पत्र ने आवेदन दिया नौकरी का नेक्चुरा, विभाग ने ठुकरा दिया। कर्नाटक कर्नाटक कोर्ट ने फरवरी 2021 में फैसला सुनाते हुए कहा कि जब अनुकंपा के आधार पर नौकरी देते समय बेटों से वैवाहिक स्टेटस नहीं पूछा जाता तो बेटियों से क्यों पूछा जाता है? ये कानून चाहिए।

केस 3: राजस्थान
बेटी की जिम्मेदारी निभा रहे हों,

प्रेक्षाध्याय में प्रेजेंटेशनल। हेलो के बाद शोभा ने नौकरी के लिए आवेदन किया। 06 नवंबर 2017 को आवेदन किया गया। शोभा संचारं। संकट ने 12 2022 को फैसला सुनाया। बाद में भी माता-पिता की प्रतिनियुक्ति की जिम्मेदारी बदली जाएगी, फिर अनुकंपा नौकरी का हक होगा।

उत्तरप्रदेश इकलौता स्थिति, वैट की स्थिति को अनुपंपा नौकरी का अपराधी
उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 नवंबर 2021 को नए नियम बनाए। विवाहिता बेटी को अनुकंपा के आधार पर उसकी नौकरी मिल सकती है। राज्य ने अद्यतन किया है। सरकारी संस्था ने अपडेट किया है।

जानकार दृश्य- बीएस चौहान, (जस्टिस टेस्ट रोग (टा।)

आश्वस्त होने के लिए, जैसे ही वे स्थिति में हों, वैसे ही रहें
कानूनी अधिकार के रूप में देखें। परिवार नियोजन के लिए यह आवश्यक है क्योंकि यह मृत कर्मचारी परिवार के लिए काम करेगा। परिवार के सदस्यों की स्थिति खराब होती है। I चाहे वो विवाहित या अविवाहित।

, एल.टी.के. ऐसे में अनुकंपा नौकरी का कार्य समाप्त हो जाएगा। इस केंद्र को सुरक्षित रखें, भविष्य में यह स्थिति बनी रहेगी, जैसा कि यू.पी. क्योंकि, अभी तक जो ठीक है, उसकी बेटी को परिवार का परिवार है। इसलिए कानूनी रूप से सुरक्षित है। इस तरह के मामले में हैं।

पर्यवेक्षक-विरागगुप्ता, (अज्ञात, बुजुर्ग मरीज, विशेषज्ञ)

जलवायु प्रदूषण ने रोक लगाया है, सामंती चार्ज करने के लिए स्थिर है, परिवर्तन है
बजादी के बाद के संविधान, कानूनी धाराएं और वैध्य प्रतिबंधित सामांती पूरी तरह से धोने का काम करता है। लेकोन, 72 साल में मधु-मधुरे न ही खारे कानूननो को चुनीती मिली है, बल्कि बेहट से कानून के रूपरत प्रांतों के रूपर बदले भी हैं। सुधार के लिए कार्य करें। कानूनी रूप से कानूनी रूप से सक्रिय होने तक, ये बातें सुरक्षित हैं।

उदाहरण के लिए समय बदलते समय बदलते हैं। मौसम के हिसाब से हम बदलते रहते हैं। इस तरह से जांचा जाता है। बार-बार अपने अधिकारों को ठीक करने के लिए आवश्यक है। महिला महिला के आधार पर व्यवहार करने के लिए, आप खुद को नियंत्रित करना चाहते हैं।

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