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माकन का राजस्व प्रभार पद से इस्तीफा: गहलोत गुट के बगावती मिलने पर कार्रवाई न होने से नाराज, खड़गे से कहा- दूसरा बकाया ढूंढ़ें लें

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जयपुर/नई दिल्ली6 मिनट पहले

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अजय माकन ने राजस्थान कांग्रेस का प्रभार छोड़ दिया है। माकन ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 8 नवंबर को चिट्ठी में राजस्थान चार्ज के तौर पर काम करने से मना कर दिया है। इसी के साथ, दूसरा मौका तलाशने की अपील की जाती है। इस चिट्ठी के बाद अब माना जा रहा है कि माकन राजस्थान प्रभार के तौर पर काम नहीं करेगा।

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अजय माकन ने चिट्ठी में 25 सितंबर को गहलोत गुट के बिगावत किए और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होने का कारण बना। माकन ने लिखा है कि दिसंबर के पहले हफ्ते में भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान आ रही है। 4 दिसंबर को उपचुनाव हो रहे हैं। ऐसे में राजस्थान का नया प्रभार बनना जरूरी है। भारत जोड़ो यात्रा और उपचुनाव से पहले प्रदेश का प्रभार छोड़ना कांग्रेस की अतिरिक्त में नया चैप्टर माना जा रहा है।

25 सितंबर को विधायक दल के बड़े विधायक नहीं पहुंचे थे।  मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर हुई बैठक में गहलोत गुट के विधायक पहुंचे।  इसी के बाद पार्टी में घमासान शुरू हुआ।  सोनिया गांधी तक का मामला और सीएम अशोक गहलोत को जुड़ी हुई थी।

25 सितंबर को विधायक दल के बड़े विधायक नहीं पहुंचे थे। मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर हुई बैठक में गहलोत गुट के विधायक पहुंचे। इसी के बाद पार्टी में घमासान शुरू हुआ। सोनिया गांधी तक का मामला और सीएम अशोक गहलोत को जुड़ी हुई थी।

गहलोत गुट के तीन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई लंबित होना इसका मुख्य कारण है
25 सितंबर को विधायक दल की बैठक में मौजूदा अध्यक्ष खड़गे के साथ अजय माकन सुपरवाइजर बनकर जयपुर आए थे। गहलोत गुट की स्थिति से विधायक दल की बैठक का बहिष्कार हुआ। इसके बाद खड़गे और माकन ने दिल्ली से सोनिया गांधी को रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी और आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर को नोटिस जारी किए गए थे।

तीनों नेताओं ने जवाब भी दिया, लेकिन अभी मामला पुराना ही रखा गया है। तीनों नेताओं को विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करके धारीवाल के घर की बैठक बुलाने के लिए जिम्मेदार माना गया था। अजय माकन ने 25 सितंबर को अपनी चिट्ठी में सियासी बवाल का जिक्र करते हुए अब तक एक्शन नहीं होने का इशारा किया है।

माकन की चिट्ठी से गहलोत गुटका का मामला फिर गर्माएगा
अजय माकन की 8 नवंबर को लिखी गई चिट्ठी अब सामने आने से एक बार फिर कांग्रेस की सियासत गरमा गई है। इस चिट्ठी के बाद विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के मुद्दों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। माकन की चिट्ठी में 25 सितंबर की घटना का जिक्र और कार्रवाई नहीं होने का इशारा किया जाने से अब गेंद खड़गे के पाले में है। पूरा घटनाक्रम खड़गे के सामने हुआ था। इसलिए अब नए दृश्यों से कार्रवाई को लेकर शुरू हो गए हैं।

नए खोज की तलाश, 4 नामों पर चर्चा
माकन के फैसले के बाद अब राजस्थान की हिस्सेदारी को लेकर सबसे ज्यादा व्यूअर हैं। नए प्रभार के तौर पर शैलजा, अंबिका सोनी, संजय निरुपम और दीपेंद्र सिंह हुड्डा के नामों की चर्चा है। शैलजा भी पहले राजस्थान में चुनावों के समय की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। अंबिका सोनी पहले बची हुई हैं। उन्हें गहलोत का भ्रम माना जाता है। संजय निरुपम संगठन चुनावों में राजस्थान के प्रदेश रिटर्निंग ऑफिसर रह गए हैं। उन्हें भी न्यूट्रल माना जाता है। दीपेंद्र हुड्डा युवा हैं। उन्हें शालीनता से जुड़ा हुआ माना जाता है। सचिन पायलट के भी भ्रम हैं।

गहलोत-पायलट की अतिरिक्त में दो अतिरिक्त परिवर्तन
अजय माकन को अगस्त 2020 में अविनाश पांडे की जगह राजस्थान का प्रभार सौंपा गया था। अविनाश पांडे को सचिन पायलट मेखे की शिकायत के बाद हटा दिया गया था। पांडे पर गहलोत मेखे का पक्ष लेने के आरोप लगे। सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद हुई सुह में यह मेल उठाया गया था। पायलट खेमे से सुलह के हफ्ते भर बाद ही अविनाश पांडे को चार्ज से हटाकर अजय माकन को राजस्थान का चार्ज दिया गया था। अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अतिरिक्त में दो साल में दो अतिरिक्त बदलाव हुए हैं।

गहलोत गुट ने माकन के अनुमान लगाए थे कि आपस में पार्टियां कर रहे हैं
25 सितंबर को गहलोत में गुट के विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने पर काफी सियासी बवाल हुआ था। माकन पर गहलोत खेमे ने सचिन पायलट को चढ़ने के लिए सदस्यता लेने का आरोप लगाया था। यूडी मंत्री शांति धारीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अजय माकन पर पार्टियों के खुलेआम आरोप लगाए थे। धारीवाल ने कहा था- माकन ने पायलट का नाम सीएम पद के लिए लेने के लिए कहा था। इस बात के पास उनके पास सबूत हैं।

अजय माकन के गठबंधन को शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ कार्रवाई होते हुए नहीं देखा जा रहा है।

अजय माकन के गठबंधन को शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ कार्रवाई होते हुए नहीं देखा जा रहा है।

धारीवाल, जोशी और राठौड़ के खिलाफ अब कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया गया है
अजय माकन की चिट्ठी के बाद अब सियासी बवाल के जिम्मेदार तीनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक सूचना ने राहुल गांधी की यात्रा से पहले शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। माकन की चिट्ठी के बाद अब कांग्रेस में दिल्ली से लेकर जयपुर तक जरूरी बातों को लेकर आने शुरू हो गई हैं।

नोटिस वाले नेता राहुल की यात्रा की योजना में माकन ने इस पर आशंका जतायी है
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की नींव में तैयारियों की योजना में नोटिस वाले नेता भी शामिल हैं। अनुशासनहीनता का नोटिस मिलने वाले धर्मेंद्र राठौड़ पिछले कई दिनों से राहुल गांधी की यात्रा के रूट वाले का दौरा कर रहे हैं। बताया जाता है कि अजय माकन तीनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के अलावा राहुल की यात्रा के लिए तैयार लोगों में आगे करने से भी नाराज हैं। इस चिट्ठी में इसकी तरफ भी इशारा किया गया है।

प्रमोद कृष्णम का गहलोत कैंप पर निशाना
अजय माकन के समझौते पर अब कांग्रेस में कंजेशनबाजी का दौर तेज हो गया है। यूनीक गांधी के जिम्मेदार कांग्रेसी नेता गुप्त प्रमोद कृष्णम ने माकन के चक्कर में इशारों में गहलोत खेमे पर देखा है। अंश प्रमोद ने लिखा है- राजस्थान के प्रभार में कांग्रेस महासचिव अजय माकन का इस्तीफा उन सभी नेताओं के लिए एक बड़ा सबब है, जो अपनी कुरसी बचाने के लिए पार्टी हाई कमान को ब्लैकमेल और बेइज्जत करते हैं।

विधायक विधायक सोलंकी बोले- 25 सितंबर की घटना से आहत थे माकन
सचिन पायलट विधायक विधायक सोलींकी ने कहा कि 25 सितंबर की घटना से आहत अजय माकन ने प्रदेश का प्रभार छोड़ दिया है। यह हमारे लिए शर्मिंदगी की बात है। माकन ने एकता को दर्ज करके उनकी आवाज सुनी। माकन की वजह से उम्मीदवार को पोस्ट मिले थे। वे शिक्षक में नई उम्मीद रखते थे। 25 सितंबर की घटना का जिक्र करके उनका पद छोड़ना यह साबित करता है कि वे आहत थे।

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