HomeIndia Newsमोरबी ब्रिज हादसे पर तय की एक गलती: हलफनामे में कहा- 'बिना...

मोरबी ब्रिज हादसे पर तय की एक गलती: हलफनामे में कहा- ‘बिना फिटनेस के ब्रिज ओपन नहीं होना चाहिए था’

Date:

Related stories

महबूबा मुफ्ती का केंद्र को संदेश: कश्मीर का मसला हल नहीं किया, तो कितने भी आरोप लगाते हैं कोई नतीजा नहीं निकलेगा

हिंदी समाचारराष्ट्रीयजम्मू कश्मीर मुद्दे पर महबूबा मुफ्ती बनाम नरेंद्र...
  • हिंदी समाचार
  • स्थानीय
  • गुजरात
  • शपथ पत्र में कहा ‘बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के नहीं खोलना चाहिए था ब्रिज’

मोरबी3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
- Advertisement -
- Advertisement -

गुजरात के मोरबी ब्रिज हादसा मामले में मोरबी नगर निगम ने अपनी गलती मान ली है। हलफनामे में दायर हलफनामे में मोरबी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने कहा है कि बिना फिटनेस के ब्रिज को नहीं खोला जाना चाहिए। बता दें, 30 अक्टूबर को हुए हादसे में 138 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें 50 से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे।

- Advertisement -

कोर्ट ने बुधवार शाम तक पैर पसारने का आदेश दिया था
बता दें, मोरबी ब्रिज गिरने के मामले में कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ने मोरबी नगर निर्णय को 7 नवंबर को नोटिस जारी कर 14 नवंबर तक जवाब मांगा था, लेकिन नगर रास्ता जवाब देने में विफल रहा। कोर्ट ने 15 नवंबर को एक और दिन का समय दिया था, लिंकिन फिर से जवाब फाइल करने में विफल रहा। इसीलिए कल यानी कि 16 नवंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने नगर चाल को शाम 4.30 बजे तक जवाब देने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने सिविक बॉडी से पूछे थे ये 8 सवाल

बिना टेंडर बुलाए रेनोवेशन का ठेला कैसे दे दिया? पुल की फिटनेस को सर्टिफाई करने की जिम्मेवारी पास थी? 2017 में ओपनिंग खत्म होने और अगले कार्यकाल के लिए टेंडर जारी करने के लिए क्या कदम उठाए? 2008 के बाद एमओयू रिन्यू नहीं हुआ, तो किस आधार पर पुल को अजंता द्वारा संचालित करने की अनुमति दी जा रही थी? क्या दुर्घटना के लिए जिम्मेदारों पर गुजरात नगर निगम अधिनियम की धारा 65 का पालन किया गया था? गुजरात नगर ने एक्ट की धारा 263 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग क्यों नहीं किया, जबकि प्राइमाफेसी गलती से नगर में जाने की थी। पुल हादसे के बाद अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं? क्या सरकार उन लोगों को नौकरी दे सकती है जिनके परिवार का एक कमाने वाला दुर्घटना में मारा गया है।

सिर्फ लदान पन्ने का, बिना टेंडर का ठेला कैसे दिया?
मंगलवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अरविंद कुमार ने पूछा कि मोरबी सिविल बॉडी और निजी ठेकेदार के बीच में देखा 1.5 पन्ने का। पुल के जीर्णोद्धार के लिए कोई टेंडर नहीं दिया गया था। फिर बिना टेंडर के क्यों दिया गया टेंडर? कोर्ट ने स्टेट गर्वनमेंट से पहले दिन से लेकर आज तक की सभी फाइलों को सीलबंद लिफाफे में जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि गुजरात नगर मार्ग ने मोरबी नगर समिति के सीईओ एसवी जाला के खिलाफ क्या कार्रवाई की है।

हाई कोर्ट ने खुद ही किया था
पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने इस मामले को खुद उठाया था, जिसके बाद बेंच ने राज्य सरकार, गुजरात के मुख्य सचिव, मोरबी नगर निगम, शहरी विकास विभाग (UDD), गुजरात गुजरात गृह मंत्रालय और मानव संसाधन आयोग को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया दिया था और उनसे रिपोर्टें देखीं।

मोरबी हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

मोरबी ब्रिज की रेस के लिए मील 2 करोड़ थे

ओरेवा को पुल की छत के लिए 2 करोड़ मिले रुपए थे। कंपनी ने उसका 6% यानी 12 लाख रुपए ही खर्च किए थे। 6 महीने की कामकाज करने के लिए पुल को जनता के लिए खोल दिया गया था। पुल का वर्क्स-किताब सब-कॉन्ट्रैक्टर देवप्रकाश सॉल्यूशंस फर्म्स के पास से ज़ब्त किए गए दस्तावेज़ मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर…

गुनगारों को जीवित:सिर्फ क्लर्क, गार्ड-मजदूर गिरफ्तार

मौत के डर वाले रिकॉर्ड के बीच इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का खेल भी हुआ। पुलिस ने इस मामले में जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें ओरेवा के दो मैनेजर, दो मजदूर, तीन एक गार्ड और दो टिकट क्लर्क शामिल हैं। पुलिस की प्राथमिकी में न तो पुल को संचालित करके पैसे कमाने वाली ओरेवा कंपनी का उल्लेख है, न रेनोवेशन का काम करने वाली देव प्रकाश समाधान का। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…

Source link

- Advertisement -

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here