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मोरबी ब्रिज हादसे पर हाईट: गुजरात सरकार से कहा- 4 की जगह 10 लाख रुपए अभी चाहिए

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मोरबी4 मिनट पहले

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गुरुवार को सुनवाई के गुजरात हाई कोर्ट ने मोरबी पुल हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा पर नाखुशी छोड़ा है। न्यायालय ने कहा कि पुल दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को काफी कम तुलनात्मक रूप से दिया गया है। अदालत ने कहा कि अज्ञानी वाजिब होना चाहिए। 30 से 40 साल की उम्र में कई लोगों की जान चली जाती है। मरने पर कई लोग घर में अकेले कमाने वाले हो सकते हैं। इसलिए उनके परिवार को कम से कम 10 लाख दिया जाएगा।

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3000 में तो ड्रेस और किताबें भी नहीं आएंगी
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अनाथ हो गए बच्चों के लिए 3,000 रुपए प्रतिमाह कुछ भी नहीं है। इस राशि से तो बच्चे के कपड़े और किताबें भी नहीं जा सकतीं। राज्य सरकार को यह अल्पसंख्यक राशि भी दी जानी चाहिए। बता दें, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से उन लोगों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा था, जो हताहत होने के कारण मृत थे। नाराज हाई कोर्ट ने सभी सरकारों से विस्तृत भौगोलिक नीति को लेकर जल्द ही हलफनामा पैर रखने का आदेश दिया है।

सभी पुलों का सर्वेक्षण करने का दिया आदेश
उच्च न्यायालय सरकार ने ऐसा तंत्र विकसित करने का आदेश भी दिया है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सभी पुलों का सर्वेक्षण करने का भी आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी पुल सही स्थिति में हों। साथ ही सभी पुलों की सूची भी दी गई है, जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि उनमें से कितने जर्जर और कितने ठीक स्थिति में हैं। मोरबी हादसे के बाद देश के विभिन्‍न क्षेत्रों और प्रदेशों से ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिनमें से कई पुलों के जर्जर होने की बात सार्वजनिक हुई है।

ओरेवा ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई पर भी सवाल उठाए
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने सरकार से सवाल किया कि ओरेवा ग्रुप के अलग-अलग लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मोरबी नगर रास्ता से पूछा… बिना किसी एकॉर्ड के औरेवा ग्रुप को नौ पांच साल तक पुल का इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दी?

मुहरबंद एसआईटी रिपोर्ट सागर करें- उच्च न्यायालय
गुजरात उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि आईटी एस जांच रिपोर्ट सील बंद करके अदालत में पेश किया जाए। अगर एसआईटी की जांच उचित नहीं आएगी तो उच्च जांच किसी दूसरी एजेंसी को सौंपेगी।

मृत की जाति पर भी आपत्तिजनक हैं
हाई कोर्ट ने पूछा कि मरने वालों के नाम के आगे उनकी राष्ट्रीयता की क्या जरूरत थी? सभी मृत समान रूप से गिने जाते हैं।

30 अक्टूबर को हादसा हुआ था
30 अक्टूबर की शाम को गुजरात के मोरबी में मच्छर नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल भर गया था। इस हादसे में 140 लोगों समेत 47 बच्चों की मौत हो गई थी। शीर्ष इस घटना में उनकी दो मृत्यु वाले हारने वाले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सीबीआई जांच की मांग, अपने परिवार के सदस्यों को खोने वालों को अज्ञान दे रही थी और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी लेने की मांग कर रही थी किया गया था।

7 बच्चों को 37 लाख रुपए देगा सरकार
सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कहा कि मोरबी के शाही परिवार ने सभी मृतकों के परिवारों को 1-1 लाख रुपए का लछिया दिया है। माता-पिता दोनों का निधन, कुल 7 बच्चे अनाथ हुए। श्री राहत कोष, प्रधान मंत्री राहत कोष और निजी दानदाताओं से प्राप्त दान से प्रति बच्चे को 37 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसमें अडानी फाउंडेशन की ओर से प्रति बच्चे के लिए 25 लाख रुपए का भी शामिल है।

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