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राजस्थान कुर्सी विवाद: गहलोत के सचिन पायलट को गदर जताने से राजस्थान में मचा बवाल

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5 मिनट पहले

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राजस्थान के अशोक गहलोत एक साथ कई मार्चों पर लड़ रहे हैं। गुजरात वे कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात की गलियों-मोहल्लों में क्यों घूम रहे हैं? क्या उन्हें हार का डर है? हो सकता है कि गहलोत ही सही हों और मोदी को हारने का डर भी हो, लेकिन वे गली मोहल्लों में जाकर प्रचार करें या घर-घर जाएं, ये उनका तरीका है।

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आप में जुड़ाव हो तो आप भी जुड़ सकते हैं। रोके है? गुजरात के शहरों में आज क्यों नहीं दिखती कांग्रेस? शहर में प्रचार करने से आपको रोकता है। निश्चित रूप से पिछले गुजरात चुनाव में गहलोत ने कड़ा संघर्ष किया था। सरकार भले ही नहीं पाई, लेकिन कांग्रेस के लिए परिणाम उत्साह पैदा हुआ।

दरअसल, इस बार गहलोत के सामने कई रास्ते खुले हुए हैं। गुरुवार को ही एक इंटरव्यू सामने आया जिसमें गहलोत सचिन पायलट को गद्दार कह रहे हैं। इत्तिफाक यह है कि उसी दिन मध्य प्रदेश में सचिन पायलट राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई दे रहे हैं। तो क्या गहलोत इस पायलट-राहुल के झुरमुट से घबराए हुए हैं? या उनकी दृष्टि में अलकमान या उनके राजनीतिक सूत्रों से उन्हें कोई संदेश नहीं मिला है जिसे लेकर कुरसी को लेकर कुछ कहा गया है।

बातचीत में गहलोत स्पष्ट-सादर कह रहे हैं कि पायलट गद्दार हैं, उन्हें नहीं बनने देंगे। ठीक है राजनीति में कोई भी इस तरह की रणनीति बना सकता है, लेकिन ऐसा वक्त जब राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान आने वाली हो, तब ऐसी देनदारी देने की क्या जरूरत है?

हो न हो, राहुल की यात्रा राजस्थान आने तक गहलोत- पायलट विवाद में पार्टी का कोई स्पष्ट निर्णय होने वाला है, क्योंकि इस तरह के अति उत्साह में तो यात्रा के दौरान गहलोत- पायलट के बीच संघर्ष भी हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस आख़िर किस-किस को जवाब देगी? यही सब कुछ प्रमाणन में कांग्रेस राजस्थान के मामले में कोई भी निर्णय जल्द लेने वाला है, ऐसे स्पष्ट संकेत लगातार मिल रहे हैं।

पायलट हालांकि अभी चुप हैं, लेकिन लगता है कि यात्रा के पहले किरोड़ी सिंह बांसला के बेटे उनकी तरफ से संघर्ष कर रहे हैं। यात्रा को राजस्थान में घुसने ने देने की विजय बांसला की खुली धमकी के बावजूद यात्रा का रूट न बदलने का अक्षर का मतलब है?

कुल मिलाकर गहलोत गुजरात के चुनाव प्रचार और राजस्थान के कुरसी बचाओ अभियान, दोनों में एक साथ जुटे हुए हैं, इसलिए वे गुजरात में उस तरह नहीं दे रहे हैं, जैसे पिछले चुनाव में यहां दिए गए थे। ख़ैर राजस्थान के बारे में कांग्रेस के किसी फैसले पर सहमति के लिए अभी भी दस-पंद्रह दिन का वक्त है। राहुल गांधी की यात्रा फिल्हाल तो मध्य प्रदेश में सहानुभूति बटोर रही है।

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