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राजस्थान में नया विवाद: बरसों से सोए हुए गुर्जर आंदोलन को झाड़-फूंक कर फिर से दुनिया की कोशिश

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9 मिनट पहले

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राजस्थान में कांग्रेस के विवाद की राख में अभी भी कई चिंगारियां बाकी हैं और एक नया विवाद खड़ा हो रहा है। ओझा लोग वर्षों से सोए हुए गुर्जर आंदोलन को झाड़-फूंक कर फिर से दुनिया में जुट गए हैं।

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रोड़े दोनों तरफ हैं। समझौते के बावजूद सरकार गुर्जरों की मांग पूरी नहीं करती और गुर्जर हैं कि कुछ भी कम पर महसूस नहीं करना चाहते। कर्नल किरोड़ी सिंह बांसला तो अब नहीं रहे, उनके बेटे विजय बंसाला ने कमान संभाली है। उनका कहना है कि कर्नल साहब से हुए समझौते को हम हर हाल में लागू करवाना चाहते हैं।

दोनों सरकारों ने सभी मांगें नहीं जुड़ीं तो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को राजस्थान में घुसने नहीं देंगे। अब विजय बांसला जिन कर्नल साहेब के समझौते को लागू किए गए ज़िद पर अड़े हैं, उन्हें यह याद नहीं है कि कर्नल साहब ने महीनों ट्रैक पर आंदोलन किया, लेकिन ऐसा मौक़ा देखकर आंदोलन की धमकी नहीं दी जैसे वे दे रहे हैं … कि राहुल गांधी राज्य में घुसने नहीं देंगे।

नाप तौला समय भी बीस दिन का दिया जब राहुल राज्य में प्रवेश करने वाले। आगे चुनाव आने वाले हैं। और भी कई मौके हो सकते थे, लेकिन यही मौका क्यों चुना गया? पहले ऐसा नहीं था, लेकिन इस बार यह आंदोलन अब सीधी राजनीति से जोड़कर भी देखा जाने लगा है। हो सकता है राजनीति से कोई वास्ता न भी हो, लेकिन संलग्न गहलोत-पायलट विवाद चल ही रहा है और पायलट गुर्जर समाज के ही नेता हैं, इसलिए इन्हें भी जोड़ा जाएगा। हालाँकि राजनीतिक क्षेत्रों में अलग-अलग चर्चाएँ हैं।

कोई कह रहा है कि राहुल गांधी की यात्रा के नशे में पायलट को बदनाम करने के लिए गहलोत खामे के ही कुछ लोग इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि पायलट ही ऐसा करवा रहे हैं। जहां तक ​​विजय बांसला का सवाल है तो वे सभी गुर्जर छत को थाली का बैंगन बता रहे हैं। उनका कहना है कि ये सब बंगन की तरह जिधर सहूलियत हो उद्द्रद्रते रहते हैं।

उन्होंने तो यह भी कहा कि पायलट तो खुद ऊपर उप रहे थे! वे कौन-सा हमारा समझौता लागू करें करवा दिया जो हम उनकी बात बंटवारा करते हैं! बांसला ने एक और बात कही, हमारा काम किसी की यात्रा करना तय ही है। हमारा काम कर दो और छुट्टी पाओ। समझौता जब किया जाता है तो उसे लागू करने में दिक्कत क्या है?

कौन सच है और कौन झूठ, यह कहना फिल्हाल मुश्किल है, लेकिन इस सब से राहुल गांधी की यात्रा पर संशय के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। सुझाव दिए जा रहे हैं कि यात्रा का रूट बदल दिया जाना चाहिए। अभी जो रूट तय किया है वह ज्यादातर गुर्जर बेल्ट में आता है इसलिए इसमें परेशानी और निश्चित ही है, लेकिन जो भी रूट तय करेगा, वहां गुर्जर तो धमक ही कर सकते हैं। देखना यह है कि गवर्नमेंट एग्रीमेंट लागू है, गुर्जरों को थोड़ा-थोड़ा करके मना करना है या राहुल गांधी की यात्रा में रुकावट आने का जोखिम उठाती है!

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