HomeIndia Newsलोग मां को कुचलते हुए चले गए...: मैं गिरगिड़ाता रहा कि वो...

लोग मां को कुचलते हुए चले गए…: मैं गिरगिड़ाता रहा कि वो कमजोर पड़ी है

Date:

Related stories

महबूबा मुफ्ती का केंद्र को संदेश: कश्मीर का मसला हल नहीं किया, तो कितने भी आरोप लगाते हैं कोई नतीजा नहीं निकलेगा

हिंदी समाचारराष्ट्रीयजम्मू कश्मीर मुद्दे पर महबूबा मुफ्ती बनाम नरेंद्र...

रतन मिश्रा। मुरैना11 मिनट पहले

- Advertisement -

लोग मेरी मां को टांगों से कुचलते हुए चले गए। मैं रोता रहा। गिरगिड़ाता रहा कि मां और कुछ लोग नीचे पड़े हैं, किसी ने मेरी बात नहीं सुनी…।

- Advertisement -

- Advertisement -

बस्ट एक का बेटा है। भिंड के दंदरौआ धाम मंदिर में लगे बागेश्वर धाम सरकार के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दरबार में माछी भगदड़ में इस बेटे ने अपनी मां को खो दिया। हालांकि, प्रशासन भगदड़ की बात से इनकार कर रहा है। दैनिक भास्कर उनसे बेटे की बात की थी, उस दिन क्या हुआ था…

पहली पूरी घटना जान लेते हैं…
दंदरौआ धाम के डॉक्टर हनुमान मंदिर पर सियपिय मिलन समारोह चल रहा था। बागेश्वर धाम के धीरेचंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा हो रही थी। मंगलवार सुबह 9 बजे दिव्य दरबार का आयोजन हुआ। दोपहर में भगदड़ मच गई। इसमें मुरैना की रहने वाली कृष्णा देवी बंसल (55 साल) फंस गईं। वे नीचे गिर गए। भीड़ को कुंदते हुए निकल गई। इससे उनकी मौत हो गई। घटना के वक्त उनका बेटा दमाद भी साथ था।

अब इन कन्फेशनों को भी पढ़ाया जाता है…

इन करीबी के बाद अब महिला के बेटे की बात…
भास्कर टीम कृष्णा बसल के घर पर पहुंची तो दरवाजे पर कुछ दुर्घटनाएं हुईं। अंदर से सिसकियों और रोने की आवाजें आ रही थीं। कृष्णा के बेटे राम बंसल बाहर आए, हमें देखते ही फक पड़े… कुछ संभले और रुंधे गले से बताया…

मैं, मेरी मां कृष्णा बंसल, मेरे जीजा जीते गर्ग 15 नवंबर को मुरैना से दंदरौआ धाम गए थे। हम बागेश्वर धाम के महाराज धीरे-धीरे चंद्र शास्त्री के दर्शन करने गए थे। मेन गेट से अंदर जा रहे थे। मैं और मां मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, बहुत से झटके-मुक्की हुई। पीछे से भी हमें धक्के लगे। कुछ समझ बनाने, बहुत से लोगों का रेला सा गया। मां की सबसे ऊपर की सीढ़ी से एक सीढ़ी नीचे पड़ीं।

मैं और मेरी मां दोनों में बुरी तरह फंस गए थे, लाखों लोगों की भीड़ थी। पुलिस जाल के बाहर किसी को मारा नहीं दे रही थी। हम न आगे जा सकते थे, न पीछे। कुछ और लोग भी गिरे पड़े थे। मैं चिल्ला रहा था, लोगों से कह रहा था कि नीचे देखो महिलाएं गिर गई हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। मेरी मां नीचे गिरीं, तो फिर नहीं उठ सकीं, उनके लोग कुचले चले गए। लोग मेरी मां को टांगों से कुचलते चले गए और मैं रोता रहा, गिरगिड़ाता रहा।

राम बस्ल की आंखें डबडबा गईं... शब्द अटक गए... उनकी बहनों और अन्य लोगों ने उनका प्रबंध कर लिया।  आगे क्या बताया, पढिए...

राम बस्ल की आंखें डबडबा गईं… शब्द अटक गए… उनकी बहनों और अन्य लोगों ने उनका प्रबंध कर लिया। आगे क्या बताया, पढिए…

मैं पार्टनर जाल के बगल में खड़ा हूं पुलिस शेयर के पास पहुंचता हूं और उनसे मां को बचाने की कोशिश करता हूं। जब तक उन्होंने मां को उठाया, वे बेहोश हो गई थीं। पुलिस ने कहा कि तुरंत एम्बुलेंस मंगाएं, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद आधे घंटे बाद एम्बुलेंस आई। तब तक हम लोग वहीं रुक रहे हैं।

एम्बुलेंस से मां को लेकर मेहगांव अस्पताल पहुंचे। एम्बुलेंस का ड्राइवर इतना पागल था कि उसने मां को ऑक्सीजन तक नहीं फुसलाया। रास्ते में करीब 20 मिनट बाद हमें जब ध्यान आया कि ऑक्सीजन नहीं भर रहा है, तो बीच में रुके हुए ड्राइवर ने कहा। तब उसने ऑक्सीजन झाड़ना।

मेहगांव अस्पताल पहुंचे, वहां डॉक्टर नहीं थे। वहां के स्टाफ ने जब डॉक्टर को सूचना दी, तो थोड़ी देर बाद डॉक्टर पहुंचे। उन्होंने मां का चेकअप किया और बताया कि वो अब इस दुनिया में नहीं चल रही हैं…।

मेरी मां की मौत के पीछे भिंड जिला और पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है। इतनी बड़ी योजना है, तो व्यवस्थाएं भी उसी तरह की जानी चाहिए। करीब 10 लाख लोग वहां पहुंचे थे, लेकिन इस भीड़ को संभालने के लिए न तो पर्याप्त पुलिस बल था और न मेडिकल फैसिलिटीज।

अगर समय रहते मां को वहीं पर मेडिकल सहायता मिल जाती या फिर एम्बुलेंस ही समय पर आ जाती, तो आज उनकी मां उनके सामने होतीं।

पिता का 11 साल पहले एक्सीडेंट में निधन हो गया था
राम बंसल ने बताया कि उनके पिता मोहनलाल बंसल का 11 साल पहले ही एक दुर्घटना में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद मां ही हम लोगों का एकमात्र सहारा थीं। हम 4 भाई-बहन हैं। 3 बहनें हैं। 2 बड़ी बहनें डायना गर्ग और मनीषा गोयल की शादी हो चुकी है। तीसरी बहन नेहा बंसल और वे मां के साथ इस घर में रहती हैं। मां को छोटी बहन की शादी की चिंता लगी रहती थी। वे चाहते हैं कि जल्द ही उनकी शादी हो जाए और फिर घर में शादी कर लें। राम बसल की किराना दुकान है।

राम बंसल 3 बहनों में इकलौते भाई हैं।  उनकी 2 बहनों की शादी हो चुकी है।  मां के निधन के बाद छोटी बहन और वे अब अकेले रह गए हैं।  पिता का 11 साल पहले एक्सीडेंट में निधन हो गया था।  राम बसल किराना दुकान चलाते हैं।  फोटो में राम बंसल, छोटी बहन नेहा (बाएं) और मनीषा।

राम बंसल 3 बहनों में इकलौते भाई हैं। उनकी 2 बहनों की शादी हो चुकी है। मां के निधन के बाद छोटी बहन और वे अब अकेले रह गए हैं। पिता का 11 साल पहले एक्सीडेंट में निधन हो गया था। राम बसल किराना दुकान चलाते हैं। फोटो में राम बंसल, छोटी बहन नेहा (बाएं) और मनीषा।

एक अधिकारी नहीं आया हाला
राम बंसल ने बताया कि उनकी मां की मौत के बाद न तो भिंड में एक भी जंप अधिकारी उनका हालाइटा और न ही मुरैना में एक भी जंप अधिकारी उनका हाल-चाल लिया। जिला व पुलिस प्रशासन की घोर जाति की वजह से उनकी मां की हत्या हुई है।

खबर आगे पढ़ने से पहले आप इस पोल पर राय दे सकते हैं…

सरकार और प्रशासन से 2 प्रश्न…

माकपा के जिला सचिव मंडल के सदस्य राजेश शर्मा ने सरकार और भिंड प्रशासन पर सवाल किए हैं। उन्होंने कहा- सरकार के पास यदि व्यवस्था नहीं है, तो लाखों लोगों की भीड़ लगाने की अनुमति क्यों दी गई। दंदरौआ में पहली बार मिलियन लोगों का जुड़ाव नहीं हो रहा है। 1 साल में 2 से 3 बड़े पद हो जाते हैं। शनिवार और मंगलवार को तो लाखों की भीड़ होती है।

दूसरा सवाल- दंदरौआ मंदिर के लिए जो पहुंच मार्ग हैं- जैसे प्रासंगिक से बिलेहटी वाया लहार, गोहद-चितौरा-मौ रोड, मेहगांव से मौ-सिहोदा रोड… इनमें से सभी महगांव रोड को छोड़कर सिंगल रोड हैं। इन मौज-मस्ती पर शनिवार और मंगलवार को भारी वाहन चलते हैं कि अभी तक कई दुर्घटनाएं हुई हैं। कई लोगों की जान चली गई है, कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं, लेकिन सरकार ने दंदरौआ के लिए पहुंचने का रास्ता बनाने पर कोई ध्यान नहीं दिया। ये स्थिति तब है जब सरकार के कई मंत्री भी यहां आते रहते हैं।

अब पढ़िए…

बागेश्वर धाम वाले ‘सरकार’ की कहानी

26 साल की कथावाचक धीरे-धीरे कृष्ण शास्त्री का विदेश तक नाम है। धीरेचंद्र से ज्यादा उनकी पहचान बागेश्वर धाम के रूप में है। छतरपुर जिले के गढ़ा निवासी धीरे-धीरे चंद्र शास्त्री कभी गांव में भगवान सत्यनारायण की कथा सुनाते थे। गांव में हनुमानजी का मंदिर है। इसे बालाजी और बागेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। इसी मंदिर में देवकी नंदन ठाकुर को रामकथा के लिए बुलाया जाता था। फिर धीरे धीरे स्वयं रामकथा के साथ ‘दिव्य दरबार’ लगाने लगे।

भगदड़ में एक महिला की मौत, 5 लोग घायल

भिंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल दंदरौआ धाम में मंगलवार को भगदड़ मच गया, जिसमें एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई। साथ ही 5 श्रद्धालु भी घायल हो गए। महिला परिवार के साथ बागेश्वर धाम के महंत धीरेचंद्र शास्त्री की कथा सुनी गई थी। हादसे के बाद दंदरौआ धाम के आसपास का मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया। हादसा भिंड के डॉक्टर हनुमान मंदिर में आयोजित सियपिय मिलन समारोह के दौरान हुआ। जिसकी घटना दंदरौआ धाम पर पिछले कुछ दिनों से चल रही है। इसके तहत सोमवार से बागेश्वर धाम के धीरेचंद्र शास्त्री की कथा हो रही है।

खबरें और भी हैं…

Source link

- Advertisement -

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here