वर्ल्ड फोटोग्राफी डे आज: दुनिया जिस तालिबान से चौंक गई, दानिश ने एक महीने पहले ही दिखा दी थी उसकी तस्वीर; देखिए उनके कैमरे ने और देशों में भी क्या-क्या देखा

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  • Danish Siddiqui (Afghanistan) Kandahar Photos | Indian Photojournalist Danish Siddiqui Killed By Taliban Terrorist

5 घंटे पहले

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आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है, लेकिन दुनिया की तस्वीर ठीक नहीं। पिछले डेढ़ साल से भारत समेत पूरी दुनिया से सामने आई तस्वीरों ने पूरी इंसानियत को हिला कर रख दिया। अब अफगानिस्तान से आ रहीं तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं।

जुलाई के पहले हफ्ते में काबुल के पास बगराम एयरबेस से अमेरिकी फौज के आखिरी जत्थे के निकलते ही तालिबानी लड़ाकों ने सभी बड़े शहरों पर चढ़ाई कर दी और 15 अगस्त को सरकारी फौज से झपटी गाड़ियों पर सवार होकर काबुल में घुस गए। आज तालिबान का सफेद परचम काबुल पर लहरा रहा है।

दुनिया तालिबान की गति से भले ही चौंकी हुई हो, मगर भारतीय फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी ने इसे पहले ही पहचान लिया था। वो सरकारी फौज के साथ अफगानिस्तान में तालिबान को रोकने की छुटपुट कोशिशों को दुनिया के सामने लाने लगे। आखिर कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबानी हमले में वो मारे गए। पुलित्जर जीतने वाले दानिश इससे पहले कोरोना महामारी, रोहिंग्या संकट और किसान आंदोलन को अपने कैमरे में बखूबी कैद कर चुके थे।

तो आइए आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर देखते हैं कि दानिश के कैमरे ने इन सभी घटनाओं को कैसे देखा…

तस्वीर कंधार प्रांत की है। दानिश ने यह तस्वीर उस वक्त ली थी जब तालिबान के खिलाफ युद्ध जारी था और उसी दौरान यहां एक गांव में घरों की तलाशी के दौरान अफगान विशेष बल के सदस्य बाहरी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। उस वक्त अफगानिस्तान सेना एक रेस्क्यू मिशन पर थी। हालांकि, अब पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है।

तस्वीर कंधार प्रांत की है। दानिश ने यह तस्वीर उस वक्त ली थी जब तालिबान के खिलाफ युद्ध जारी था और उसी दौरान यहां एक गांव में घरों की तलाशी के दौरान अफगान विशेष बल के सदस्य बाहरी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। उस वक्त अफगानिस्तान सेना एक रेस्क्यू मिशन पर थी। हालांकि, अब पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है।

कंधार में रेस्क्यू मिशन के दौरान अफगान विशेष बल के बूते गिने-चुने लोगों की सुरक्षा थी। जवानों इसे बखूबी निभाया भी। दानिश ने अपने इंस्टाग्राम पर इस तस्वीर को शेयर किया था। उनके मुताबिक अफगान विशेष बलों के यह जवान तालिबान को पीछे धकलने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

कंधार में रेस्क्यू मिशन के दौरान अफगान विशेष बल के बूते गिने-चुने लोगों की सुरक्षा थी। जवानों इसे बखूबी निभाया भी। दानिश ने अपने इंस्टाग्राम पर इस तस्वीर को शेयर किया था। उनके मुताबिक अफगान विशेष बलों के यह जवान तालिबान को पीछे धकलने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

दानिश की इस तस्वीर में अफगान विशेष बलों का एक जवान अपने नाइट विजन उपकरण से तालिबान के ठिकानों की ओर देखता नजर आ रहा है। इंस्टाग्राम में फोटो के कैप्शन के रूप में दानिश ने लिखा था कि अफगान विशेष बलों की संख्या के मुकाबले उन पर काफी ज्यादा जिम्मेदारी थी।

दानिश की इस तस्वीर में अफगान विशेष बलों का एक जवान अपने नाइट विजन उपकरण से तालिबान के ठिकानों की ओर देखता नजर आ रहा है। इंस्टाग्राम में फोटो के कैप्शन के रूप में दानिश ने लिखा था कि अफगान विशेष बलों की संख्या के मुकाबले उन पर काफी ज्यादा जिम्मेदारी थी।

अफगानिस्तान के कंधार शहर के बाहरी इलाकों में बसे इलाकों को बचाने के लिए तैनात अफगान विशेष सुरक्षा बलों के दो जवान। दानिश ने अपने शुरुआती तस्वीरों में कई बार अफगान सेना के ओवरस्ट्रैच्ड होने की बात कही थी। 15 अगस्त को तालिबान के काबुल में घुसने से पहले ही ऐसा तमाम जवानों ने अपने सामने कोई रास्ता न पाकर आत्मसमर्पण कर दिया था।

अफगानिस्तान के कंधार शहर के बाहरी इलाकों में बसे इलाकों को बचाने के लिए तैनात अफगान विशेष सुरक्षा बलों के दो जवान। दानिश ने अपने शुरुआती तस्वीरों में कई बार अफगान सेना के ओवरस्ट्रैच्ड होने की बात कही थी। 15 अगस्त को तालिबान के काबुल में घुसने से पहले ही ऐसा तमाम जवानों ने अपने सामने कोई रास्ता न पाकर आत्मसमर्पण कर दिया था।

अफगानिस्तान की यह फोटो 13 जुलाई 2021 की है। कंधार प्रांत में एक चेक पोस्ट पर तालिबान और अफगान विशेष बल के बीच संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष में कई अफगानी नागरिक फंस गए थे। यह भागता हुआ लड़का भी उन्हीं अफगान नागरिकों में से एक था।

अफगानिस्तान की यह फोटो 13 जुलाई 2021 की है। कंधार प्रांत में एक चेक पोस्ट पर तालिबान और अफगान विशेष बल के बीच संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष में कई अफगानी नागरिक फंस गए थे। यह भागता हुआ लड़का भी उन्हीं अफगान नागरिकों में से एक था।

तालिबान ने अफगान सैन्य बल पर रॉकेट, हथगोलों और अन्य भारी हथियारों से हमला किया था। इस हमले में 3 हमवी (बख्तरबंद सुरक्षा वाहन) तबाह हो गए थे। इस फोटो के लिए दानिश ने लिखा था, 'जिस हमवी में मैं विशेष बलों के साथ यात्रा कर रहा था, उसे भी निशाना बनाया गया था। मैं भाग्यशाली था कि मैं सुरक्षित रहा और आर्मर प्लेट के ऊपर टकराने वाले रॉकेटों के मंजर को मैंने कैद कर लिया।’

तालिबान ने अफगान सैन्य बल पर रॉकेट, हथगोलों और अन्य भारी हथियारों से हमला किया था। इस हमले में 3 हमवी (बख्तरबंद सुरक्षा वाहन) तबाह हो गए थे। इस फोटो के लिए दानिश ने लिखा था, ‘जिस हमवी में मैं विशेष बलों के साथ यात्रा कर रहा था, उसे भी निशाना बनाया गया था। मैं भाग्यशाली था कि मैं सुरक्षित रहा और आर्मर प्लेट के ऊपर टकराने वाले रॉकेटों के मंजर को मैंने कैद कर लिया।’

यह तस्वीर दक्षिण अफगानिस्तान में अरघंदब नदी के किनारे बसे कंधार की है। यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। दानिश ने यह तस्वीर अफगान सेना के एक वाहन के अंदर से ली थी। सेना का यह दस्ता एक पुलिस वाले को तालिबान की घेराबंदी से बचाने को पहुंचा था।

यह तस्वीर दक्षिण अफगानिस्तान में अरघंदब नदी के किनारे बसे कंधार की है। यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। दानिश ने यह तस्वीर अफगान सेना के एक वाहन के अंदर से ली थी। सेना का यह दस्ता एक पुलिस वाले को तालिबान की घेराबंदी से बचाने को पहुंचा था।

कंधार में अमेरिका के दिए हमवी सैन्य बख्तरबंद वाहन के भीतर की इस तस्वीर में अफगान पुलिस का एक जवान सफेद झंडा लिए दिख रहा है। इस जवान को अफगान सेना का एक दस्ता तालिबान की घेराबंदी से निकालकर लाया था।

कंधार में अमेरिका के दिए हमवी सैन्य बख्तरबंद वाहन के भीतर की इस तस्वीर में अफगान पुलिस का एक जवान सफेद झंडा लिए दिख रहा है। इस जवान को अफगान सेना का एक दस्ता तालिबान की घेराबंदी से निकालकर लाया था।

कोरोना का कहर

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान कई संक्रमित एक अस्थाई ओपन-एयर क्लिनिक में इलाज करवाने के लिए मजबूर थे। दानिश की यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के जेवर जिले के मेवला गोपालगढ़ गांव की है, जिसमें 65 वर्षीय हरवीर सिंह पेड़ के नीचे खाट बिछाकर अपना इलाज करवा रहे हैं।

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान कई संक्रमित एक अस्थाई ओपन-एयर क्लिनिक में इलाज करवाने के लिए मजबूर थे। दानिश की यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के जेवर जिले के मेवला गोपालगढ़ गांव की है, जिसमें 65 वर्षीय हरवीर सिंह पेड़ के नीचे खाट बिछाकर अपना इलाज करवा रहे हैं।

तस्वीर भारत में कोरोना की फर्स्ट वेव के समय की है। दानिश की ये तस्वीर उस समय सबसे ज्यादा वायरल हुई तस्वीरों में से एक है। ये लॉकडाउन की वजह से विस्थापन के लिए मजबूर हुए लोगों का दर्द बयां करती है।

तस्वीर भारत में कोरोना की फर्स्ट वेव के समय की है। दानिश की ये तस्वीर उस समय सबसे ज्यादा वायरल हुई तस्वीरों में से एक है। ये लॉकडाउन की वजह से विस्थापन के लिए मजबूर हुए लोगों का दर्द बयां करती है।

दानिश की यह तस्वीर सेकेंड वेव के दौरान उत्तराखंड के दुर्गम रास्ते, स्वास्थ्य सेवा की कमी, गरीबी और डर की वजह से मौत का प्रतीक बनी। तस्वीर में प्रमिला देवी हैं जिनकी कोरोना पॉजिटिव होने के एक दिन बाद ही इलाज न मिलने की वजह से मौत हो गई थी।

दानिश की यह तस्वीर सेकेंड वेव के दौरान उत्तराखंड के दुर्गम रास्ते, स्वास्थ्य सेवा की कमी, गरीबी और डर की वजह से मौत का प्रतीक बनी। तस्वीर में प्रमिला देवी हैं जिनकी कोरोना पॉजिटिव होने के एक दिन बाद ही इलाज न मिलने की वजह से मौत हो गई थी।

प्रमिला देवी की मौत के बाद उनकी बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए गंगा ले जाया गया था। मृतक प्रमिला देवी के पति सुरेश कुमार ने दानिश को बताया था कि ऑक्सीजन लेवल कम हो जाने के कारण उन्हें डॉक्टरों ने बड़े हॉस्पिटल में भर्ती करवाने की सलाह दी थी, लेकिन दुर्गम रास्तों की वजह से वे घर लौट गए थे।

प्रमिला देवी की मौत के बाद उनकी बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए गंगा ले जाया गया था। मृतक प्रमिला देवी के पति सुरेश कुमार ने दानिश को बताया था कि ऑक्सीजन लेवल कम हो जाने के कारण उन्हें डॉक्टरों ने बड़े हॉस्पिटल में भर्ती करवाने की सलाह दी थी, लेकिन दुर्गम रास्तों की वजह से वे घर लौट गए थे।

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान भारत में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की काफी ज्यादा कमी थी। जिसकी वजह से लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। सेकेंड वेव की यह तस्वीर दानिश ने गाजियाबाद के गुरुद्वारे पर ली थी, जिसमें कार के अंदर महिला को ऑक्सीजन की सुविधा दी गई थी।

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान भारत में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की काफी ज्यादा कमी थी। जिसकी वजह से लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। सेकेंड वेव की यह तस्वीर दानिश ने गाजियाबाद के गुरुद्वारे पर ली थी, जिसमें कार के अंदर महिला को ऑक्सीजन की सुविधा दी गई थी।

भारत में कोविड-19 की दूसरी वेव के दौरान यह तस्वीर काफी ज्यादा वायरल हुई थी। इसे कई अंतरराष्ट्रीय न्यूज पोर्टल्स ने जगह दी। दानिश की इस तस्वीर में साफ दिख रहा है कि एक साथ कितनी चिताएं जल रही हैं।

भारत में कोविड-19 की दूसरी वेव के दौरान यह तस्वीर काफी ज्यादा वायरल हुई थी। इसे कई अंतरराष्ट्रीय न्यूज पोर्टल्स ने जगह दी। दानिश की इस तस्वीर में साफ दिख रहा है कि एक साथ कितनी चिताएं जल रही हैं।

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान की यह तस्वीर काफी वायरल हुई थी। दानिश ने यह तस्वीर दिल्ली के एक अस्पताल में ली थी। जहां बेड की कमी के चलते एक ही बेड पर दो लोगों को ऑक्सीजन दी जा रही थी।

कोरोना की सेकेंड वेव के दौरान की यह तस्वीर काफी वायरल हुई थी। दानिश ने यह तस्वीर दिल्ली के एक अस्पताल में ली थी। जहां बेड की कमी के चलते एक ही बेड पर दो लोगों को ऑक्सीजन दी जा रही थी।

नासिक कुंभ मेला

तस्वीर 27 अगस्त 2015 की है। दानिश ने इसे नासिक शहर में गोदावरी नदी के किनारे स्थित त्र्यंबकेश्वर में आयोजित कुंभ मेले के दौरान क्लिक किया था। इसमें जुलूस से पहले अपने शिविर में एक नागा साधु अपने शरीर पर राख लगाता दिख रहा है।

तस्वीर 27 अगस्त 2015 की है। दानिश ने इसे नासिक शहर में गोदावरी नदी के किनारे स्थित त्र्यंबकेश्वर में आयोजित कुंभ मेले के दौरान क्लिक किया था। इसमें जुलूस से पहले अपने शिविर में एक नागा साधु अपने शरीर पर राख लगाता दिख रहा है।

सीएए का विरोध और दिल्ली दंगा

जनवरी 2020 में CAA के खिलाफ दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया के पास प्रदर्शन कर रहे समूह पर गोली चलाने वाले की तस्वीर दानिश ने ली थी। फायरिंग करने वाले को नाबालिग बताया गया था और इसकी गोली से एक व्यक्ति घायल भी हुआ था।

जनवरी 2020 में CAA के खिलाफ दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया के पास प्रदर्शन कर रहे समूह पर गोली चलाने वाले की तस्वीर दानिश ने ली थी। फायरिंग करने वाले को नाबालिग बताया गया था और इसकी गोली से एक व्यक्ति घायल भी हुआ था।

यह तस्वीर दिल्ली दंगे की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में शुमार है। इसमें लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे एक व्यक्ति को दंगाई लाठी-डंडों से पीट रहे हैं। दानिश की इस तस्वीर में जो व्यक्ति अधमरा पड़ा है, वे हैं 37 साल के मोहम्मद जुबैर।

यह तस्वीर दिल्ली दंगे की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में शुमार है। इसमें लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे एक व्यक्ति को दंगाई लाठी-डंडों से पीट रहे हैं। दानिश की इस तस्वीर में जो व्यक्ति अधमरा पड़ा है, वे हैं 37 साल के मोहम्मद जुबैर।

म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों की पीड़ा

शाह पोरिर द्वीप की ये तस्वीर पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त तस्वीरों में से एक है। इसमें बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पार करने के बाद एक थकी हुई रोहिंग्या शरणार्थी महिला तट को छू रही है। दानिश सिद्दीकी की खींची गई यादगार तस्वीरों में से एक है ये।

शाह पोरिर द्वीप की ये तस्वीर पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त तस्वीरों में से एक है। इसमें बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पार करने के बाद एक थकी हुई रोहिंग्या शरणार्थी महिला तट को छू रही है। दानिश सिद्दीकी की खींची गई यादगार तस्वीरों में से एक है ये।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन

दानिश ने यह फोटो किसान आंदोलन के दौरान गुरुनानक जयंती पर ली थी। कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हजारों किसानों ने शाम के वक्त मोमबत्ती जलाकर गुरु पर्व मनाया था।

दानिश ने यह फोटो किसान आंदोलन के दौरान गुरुनानक जयंती पर ली थी। कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हजारों किसानों ने शाम के वक्त मोमबत्ती जलाकर गुरु पर्व मनाया था।

भोपाल गैस त्रासदी का असर

मध्यप्रदेश के भोपाल में दानिश ने यह तस्वीर साल 2014 में ली थी। 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी का असर 30 साल बाद भी तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है। 2014 में पांच साल के सागर का मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होने की वजह से इलाज चल रहा था।

मध्यप्रदेश के भोपाल में दानिश ने यह तस्वीर साल 2014 में ली थी। 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी का असर 30 साल बाद भी तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है। 2014 में पांच साल के सागर का मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होने की वजह से इलाज चल रहा था।

कश्मीर में आतंकी कैसे बना हीरो

दानिश सिद्दीकी की यह तस्वीर 30 सितंबर 2019 की है। यह तस्वीर कश्मीर के अंचर क्षेत्र के एक प्रोटेस्ट की है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के बीच एक बच्चा हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी की तस्वीर को छूता हुआ नजर आ रहा है।

दानिश सिद्दीकी की यह तस्वीर 30 सितंबर 2019 की है। यह तस्वीर कश्मीर के अंचर क्षेत्र के एक प्रोटेस्ट की है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के बीच एक बच्चा हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी की तस्वीर को छूता हुआ नजर आ रहा है।

महिला विरोधी सामाजिक कुप्रथाएं

27 जनवरी 2013 की यह तस्वीर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से 42 किमी दूर मलाजपुर गांव में 400 सालों से चले आ रहे भूत मेले की है। इस तस्वीर के लिए दानिश ने लिखा था- मैं भूतों पर यकीन नहीं रखता, लेकिन यह सच है कि मलाजपुर मंदिर में आने वाले लोग यहां मिलने वाले ट्रीटमेंट से पूरी तरह संतुष्ट होते हैं।

27 जनवरी 2013 की यह तस्वीर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से 42 किमी दूर मलाजपुर गांव में 400 सालों से चले आ रहे भूत मेले की है। इस तस्वीर के लिए दानिश ने लिखा था- मैं भूतों पर यकीन नहीं रखता, लेकिन यह सच है कि मलाजपुर मंदिर में आने वाले लोग यहां मिलने वाले ट्रीटमेंट से पूरी तरह संतुष्ट होते हैं।

आखिर क्यों मनाते हैं वर्ल्ड फोटोग्राफी डे : यह दिन फोटो खींचने की डागुएरियोटाइप तकनीक को इजाद करने वाले फ्रेंच वैज्ञानिक लुई डागुएरियो की याद में मनाया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत सिल्वर कॉपर प्लेट पर फोटो डेवलप किया जाता है।

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