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वीडियो वायरल: भारत जोड़ो यात्रा में नेपाली राष्ट्रगान, राहुल के साथ ही ये क्यों होता है?

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  • भारत जोड़ो यात्रा में नेपाली राष्ट्रगान, सिर्फ राहुल के साथ ही ऐसा क्यों?

एक मिनट पहले

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राहुल गांधी जो कुछ भी करते हैं, कुछ किनारे ही हो जाते हैं। अब ये समय का फेर है या किस्मत का, ये तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन ऐसा ही हो रहा है। गुरुवार की घटना को ही प्रेरित किया। उनकी भारत जोड़ो यात्रा महाराष्ट्र के वाशिम में थी। मंच पर भाषण से पहले उन्होंने घोषणा की- अब राष्ट्रगीत बजेगा, लेकिन ऑनसाइड। नेपाल का राष्ट्रगान बजने लगा। हालांकि उन्होंने खुद ही इसे तुरंत रोक दिया।

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यह वाकया महाराष्ट्र के वाशिम का है।  राहुल यहां एक कार्यक्रम को संदेश दे रहे थे।  इस दौरान वे बोले- अब राष्ट्रगीत बजे, लेकिन नेपाल का राष्ट्रगान बज गया।

यह वाकया महाराष्ट्र के वाशिम का है। राहुल यहां एक कार्यक्रम को संदेश दे रहे थे। इस दौरान वे बोले- अब राष्ट्रगीत बजे, लेकिन नेपाल का राष्ट्रगान बज गया।

सवाल उठता है कि उनके साथ ही ये क्यों होता है? क्या उनकी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता ही उन्हें ग्रैब नहीं मानते? या वे खुद ही सावधानी बरतते हैं। कुछ भी करने से पहले उसे ठोक-बजा कर नहीं देख पा रहे हैं? अब बीजेपी की सोशल मीडिया टीम तो उनके पीछे लगी ही रहती है। थोड़ी सी भी गलती हुई कि वायरल होने वाली कंपनियाँ जैसे नेपाली राष्ट्रगान का ये वीडियो वायरल हो रहा है।

उदर राजस्थान में कांग्रेस का बवाल थमने का नाम नहीं लिया जा रहा है। अजय माकन के इतने के बाद पायलट ख़ेमे के आँकड़े ज़्यादा हो गए हैं। भाई लोग मान ही नहीं रहे। कह रहे हैं कि राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान पहुंच गई है, इसके पहले नेता पद की बात जो लंबित है, उसके निदान की आवश्यकता है। उनके कहने का मतलब यह है कि फिर दो पर्यवेक्षक राजस्थान आएँ और देखने से एक-एक करके राय लें कि वे पद पर किसे देखना चाहते हैं! पायलट को या अशोक गहलोत को?

हालाँकि सोना-जाना कुछ नहीं है। गहलोत ख़ेमे ने साइलेंस ज़रूर कहा है, लेकिन वे कोई क्लास नहीं खेलते हैं। पर्यवेक्षक आएँ या कोई और, गहलोत को उनसे निबटना अच्छी तरह से आता है। सवाल यह है कि खुद का सचिन पायलट अपने चढ़ाई को इस तरह की बयानबाजियों से रोक क्यों नहीं रहा? और रोक भी नहीं रहे हैं तो इससे राजनीतिक वयस्कता किसे दिखाई दे रही है?

पार्टी लाइन कहती है कि समस्या सामने आ रही है, जो हाईकमान को करना हो, सो करे। आपके साथ कोई अन्याय हो तो फिर बोलिए। व्यवहार ढोल पीटने और पीटते रहने से क्या होगा? वैसे भी कांग्रेस में यह सब चलता रहता है और कांग्रेसी, अब आम आदमी की हालत के लिए सड़क पर आने की बजाय गुटीय राजनीति करने के लिए सड़क पर आने को ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा वक्त है जब राजस्थान बीजेपी पहली बार अजीब सी नजर आ रही है।

ऐसे वक्त में भाजपा की कमजोरी का फायदा उठाना सत्ता में आने की जी-जान से तैयारी करने की बजाय आप में रहकर ही कौन सी समझदारी है, समझ में नहीं आता। उद्र नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पुराने प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की तरह मौन साधे बैठे हैं। उन्हें लगता है मौन ही सबसे समाधान बड़ा है। समय ही समस्या का हल निकालेगा।

राष्ट्रगीत की जगह नेपाल के राष्ट्रगान का वीडियो

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