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सीबीआई ने जांच शुरू की…संदेह के दीयों में कई फुटबॉल क्लब; महासंघ से भी पूछताछ हुई | फुटबॉल क्लब मैच फिक्सिंग मामले की सीबीआई जांच उदपते | फुटबॉल समाचार

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3 मिनट पहले

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क्रिकेट के बाद अब भारतीय फुटबॉल में भी फिक्सिंग के निशान लग गए हैं। सीबीआई (केंद्रित जांच ब्यूरो) ने एक क्लब फुटबॉल मैच में कथित फिक्सिंग मामलों पर प्राथमिक जांच शुरू की है। भारतीय फुटबॉल में पहली बार फिक्सिंग का मामला फ्रैंक सामने आया है।

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एएनआई के मुताबिक, रविवार को भारत के क्लब फुटबॉल में मैच में फिक्सिंग का मामला उठा है। सीबीआई को एक अंतरराष्ट्रीय फिक्सर के बारे में जानकारी मिली। जिसने ट्रस्ट के माध्यम से कम से कम 5 भारतीय फुटबॉल क्लबों में कथित तौर पर बड़ी राशि खर्च की है। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की है।

सूत्र बताए गए हैं- ‘आई-लीग में शामिल टीम इंडियन एरोज़ पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। यह जांच का एक गंभीर मामला है कि भारतीय रोजगार फिक्सिंग घोटाले में कैसे उतरे। नौकरी को नौकरी और ओडिशा सरकार द्वारा वित्तपोषित किया गया था और इसमें कोई भी विदेशी खिलाड़ी या विदेशी कर्मचारी नहीं था (पिछले चार वर्षों से)। यह गलत: टीम से जुड़े कुछ लोग हो सकते हैं।’

सीबीआई की टीम ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) से क्लब और उनके निवेश के बारे में जानकारी फैलाई थी। वह क्लबों से भी विदेशी खिलाड़ियों और तकनीकी कर्मचारियों के हस्ताक्षर में संपत्तियों के अलावा सभी अनुबंधों, प्रतिनिधियों के बारे में जानकारी रखता है। टीम का कुछ दिन पहले महासंघ के दिल्ली स्थित कार्यालय था।

सिंगापुर से जुड़े तार
इस फिक्सिंग के तार सिंगापुर से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस मामले के पीछे सिंगापुर के फिक्सर विल्सन राज पेरुमल का हाथ है। उसने लिविंग 3डी होल्डिंग्स लिमिटेड के माध्यम से भारतीय क्लबों में निवेश किया था। उन्हें 1995 में सिंगापुर में मैच फिक्सिंग के लिए पहली बार जेल भेजा गया था और फ़िनलैंड और हंगरी में भी दोषी करार दिया गया था।

बड़े मेलों में फिक्सिंग की आशंका
बताया जा रहा है कि इस मामले के बाद बड़े मेलों में भी फिक्सिंग की आशंका जा रही है। फिक्सर ओलम्पिक, विश्व कप क्वालीफ़ायर, महिला विश्व कप, CONCACAF गोल्ड कप और कप ऑफ़ नेशंस सहित अन्य प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से भी अफ्रीकी ब्रांडिंग कर रहे हैं।

प्रभाकरन बोले- फिक्सिंग नहीं
भारतीय महासंघ के सचिव शाजी प्रभाकरन ने कहा है- ‘एआईएफएफ मैच फिक्सिंग को कटई नहीं देता है और हमने क्लबों को जांच में सहयोग करने के लिए कहा है। फिक्सर से जुड़ी हुई शेल कंपनी द्वारा किए गए निवेश को चिंताएं हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि भारतीय फुटबॉल का मैच फिक्सिंग से दूर-दूर तक जुड़े किसी व्यक्ति से कोई संबंध न हो।’

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