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हरियाणा पुलिस का ये कैसा सालूक?: सीमा पर ड्यूटी छोड़ इंसाफ के लिए निकले रहे 2 फौजी, एक चोर, दूसरा लापता बेटा ढूंढ रहा

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रेवाड़ी3 मिनट पहले

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देश की रक्षा करने के लिए विपरीत कोर्ट में सरहद पर रहने वाले फौजी हरियाणा में इंसाफ के लिए ड्यूटी छोड़ दर-बदर निकल रहे हैं। पुलिस की कार्य प्रणाली से हार कर फौज की वर्दी पहने एक फौजी अपने लापता बेटे को ढूंढता है तो दूसरा चोर की तलाश में जुटा है। दोनों घटनाओं की कहानी भले ही अलग-अलग हो, लेकिन हरियाणा पुलिस का सल्क दोनों के साथ एक जैसा है।

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दरअसल, हरियाणा के नारनौल शहर के सेक्टर-1 में रहने वाले जयदयाल और पानीपत के हरिनगर में रहने वाले संजय दोनों ही सेना में बंद हैं। जयदयाल सीमा तो संजय पश्चिम बंगाल में स्थित है। दोनों ड्यूटी छोड़ अपने-अपने शहर में पुलिस से इंसाफ की उम्मीद की टकटकी लगाकर बैठे हैं। लेकिन अभी तक पुलिस है कि नुकसान को पूरा करने की गारंटी नहीं पाई। अब दोनों पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।

हरियाणा के गृह मंत्री अखिल विज जनता के दरबार में लोगों की फरियाद संख्या हैं लेकिन फौजी पुलिस से कार्रवाई की मांग के लिए निकल रहे हैं।

हरियाणा के गृह मंत्री अखिल विज जनता के दरबार में लोगों की फरियाद संख्या हैं लेकिन फौजी पुलिस से कार्रवाई की मांग के लिए निकल रहे हैं।

6 दिन बाद भी नहीं मिला बेटा, खुद कारणों से संपर्क करें
नारनौल का सेक्टर-1 से 17 नवंबर को जयदयाल का 14 साल का जयवीर सुबह 10:30 बजे घर से लापता हो गया। बालक यदुवंशी स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ें। घटना के समय जयदयाल ड्यूटी पर चाइना बॉर्डर के पास केएस हिल्स पर स्थित था। जैसे ही उसे बेटे के लापता होने की खबर लगी, उसी दिन उसने पुलिस से संपर्क कर बेटे को ढूंढने की तलाश शुरू कर दी। महाबीर चौक पुलिस चौकी में बेटे की गुमशुदगी का मामला तो दर्ज हो गया, लेकिन बेटे का पता नहीं चला।

पुलिस की दी गई शिकायत में नारनौल के रहने वाले सैनिक जयदयाल दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस की दी गई शिकायत में नारनौल के रहने वाले सैनिक जयदयाल दिखाई दे रहे हैं।

ड्यूटी की जगह मोबाइल नेटवर्क नहीं, इसलिए घर आया
जयदयाल का कहना है कि जिस स्थान पर कर्तव्य है, वहां से फोन पर संपर्क करना भी बहुत मुश्किल है, क्योंकि नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। फिर भी हर घंटे उसे बेटे की चिंता सताती रही और जब 5 दिन बाद भी बेटे का निशान नहीं लगा तो वह छुट्‌टी लेकर घर आ गया। अब वह खुद की घास की तलाश में है। जयदयाल का कहना है कि उनके बेटे के निशान लगाने में पुलिस का ढुलमुल रवैया है। उसने बताया कि 5 दिन में भी पुलिस उसके बेटे की तलाश नहीं कर पाई है। उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर किया। मर्सी जैल का कहना है कि पुलिस न तो सीसीटीवी जांच कर रही है और न ही तलाशी के लिए कोई ठोस कार्रवाई कर रही है।

फौजी जयदयाल गुम हो गया।

फौजी जयदयाल गुम हो गया।

पुलिस नहीं पकड़ा पकड़ा चोर, ड्यूटी छोड़ घर की सुरक्षा में डटा
पानीपत के हरनगर में रहने वाले दागी संजय कुमार पश्चिम बंगाल में कायम है। उनके घर में 30 अक्टूबर को लाखों रुपए की चोरी हो गई। काफी दिनों तक आलोचनाओं के बाद भी जब पुलिस मामला नहीं सुलझ पाया तो वह ड्यूटी छोड़कर घर चले गए। इसके बाद से वह 20 बार थाना पुलिस और पुलिस के उच्च अधिकारियों से संबंध तोड़ चुका है। मगर अभी तक न ही चोरों की गिरफ्तारी हुई है और न ही उसका सामान मिला है। आहत फौजी संजय ने बड़ा फैसला लिया। फौजी ने कहा कि अब वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेगा। क्योंकि देखते ही देखते उसकी पत्नी और बच्चा साथ हो गए और पुलिस सिर्फ क्षतिग्रस्त होने के सिवाए कुछ नहीं पाई।

फौजी संजय ने बताई पूरी कहानी…
संजय ने घटना 30 अक्टूबर 2022 की बताई है। मैं उस समय पश्चिम बंगाल में ड्यूटी पर था और बच्चे 2:30 बजे के बाद किसी कार्यक्रम में चले गए थे। 30 अक्टूबर को चोरी होने के बाद 31 तारीख को मुझे फोन आता है। कभी-कभी फोन नहीं लग पाता तो फोन करने के लिए हम सुबह के समय ऊपर चले जाते हैं।

31 तारीख को सुबह मेरे पड़ोसी ने फोन करके बताया कि फौजी साहब आपके घर में चोरी हो गई है। मैंने 9 बजे बच्चों को इसके बारे में बताया तो वह घर पर पहुंच गए। घटना की प्राथमिकी 31 अक्टूबर को हो गई थी, जिसे 20 दिन हो गए हैं। मैं 8 तारीख को घर पर हूं।

मैंने उस समय ड्यूटी को जरूरी नहीं समझा कि अपने घर को। उस समय मेरे लिए ड्यूटी जरूरी थी। ड्यूटी के बाद मेरे बच्चे और मेरे घर के प्रति भी मेरी जिम्मेदारी बनती है। चोरी हुए 20 दिन हो गए हैं। मैं एसपी से मिला तो, उन्होंने बस ये कहा कि आप की कार्रवाई चल रही है।

शालीनता के अलावा मुझे अब तक चोरी हुए माल की कोई रिकवरी नहीं मिली है। मेरे बच्चे डेरे और सहमे हुए हैं। वह बोले कि पापा आज ये वाक्या हुआ है। कल को हमें कोई मार कर चला जाएगा। आपके अलावा हमारा कौन है।

बच्चे डरे और सहमे हुए बार-बार ड्यूटी के लिए मना कर रहे हैं, और कह रहे हैं कि पापा आप चले जाएंगे तो हम मर जाएंगे। हमें सुरक्षा दो। हम यहां पर सुरक्षित नहीं हैं। जब तक मेरा मामला हल नहीं होगा और मुजरिम नहीं पकड़े जाएंगे तब तक मैं ड्यूटी ज्वाइन नहीं करूंगा।

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