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हाओ यांकी ने नेपाल को भारत के खिलाफ भड़काया, वहीं रुचि ने दुनिया में नाम कमाया | हाओ यांकी नेपाल को भारत के खिलाफ भड़काती है, जबकि रुचिरा दुनिया में नाम कमाती है

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  • हाओ यांकी ने भारत के खिलाफ नेपाल को भड़काया, जबकि रुचिरा ने दुनिया में नाम कमाया

काठमांडू/नई दिल्ली3 मिनट पहले

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हाल ही में चीन ने नेपाल से अपनी सुंदरता और राजनीतिक उठा-पटक में राजदूत हाओ यांकी का स्थान कर दिया है। हाओ यांकी ने नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ बढ़ाए गए भारत के खिलाफ कई तरह के षड्यंत्र रची थीं। हायो यांकी को चीन का सबसे बड़ा योद्धा राजदूत के रूप में जाना जाता है। अब नेपाल में यांकी की जगह चेंग सोंग ने ली है।

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चीनी राजदूत हाओ यांकी ने केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री रहने के दौरान उनहें नेपाल के संबंध नक्शा जारी करने के लिए तैयार किया। इस नक्शे में नेपाल ने भारत के साथ क्षेत्र क्षेत्र-कालापानी और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया था। प्रधानमंत्री रहने के दौरान ओली ने भारत के खिलाफ कई आरोप पत्र भी दिए थे।

हाओ यांकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक ऐसी भेड़िया योद्धा थे जिन्‍होंने अपने खूबसूरत चेहरे का इस्‍तेमाल नेपाल में ड्रैगन की रस्सियों को जामने में किया।

हाओ यांकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक ऐसी भेड़िया योद्धा थे जिन्‍होंने अपने खूबसूरत चेहरे का इस्‍तेमाल नेपाल में ड्रैगन की रस्सियों को जामने में किया।

चीन के रहस्यों को स्थिति में नाकामी

हाओ यांकी के तमाम प्रयासों के बाद भी चीन नेपाल के आम चुनावों में ओली और प्रचंड को लाकर संयुक्त वामपंथी मोर्चा बनाने में विफल रहा। चीन ने अपने राजदूत के फेल होने के बाद अपने एक बड़े नेता को भी पिछले दिनों नेपाल भेजा था लेकिन उन्‍हें भी निराशा हाथ लगी। चीन की कोशिश है कि वर्ष 2017 के इतिहास को फिर से दोहराए और केपी ओली के नकारात्मक में फिर से चीन की प्रभाव सरकार को बताए। साल 2017 में चीन ने प्रचंड और ओली के बीच समझौता किया था और दोनों की गठबंधन सरकार बनी थी। हालांकि बाद में यह गठबंधन टूट गया और प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस से हाथ मिला लिया।

हाल ही में लगातार विफलताओं की वजह से चीन को वापस भेजा गया

केपी ओली की जगह पर शेर बहादुर देउबा नेपाल के प्रधानमंत्री बने और उन्नीस ने अपने दोनों ही पड़ोसियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। हाओ यांकी के इस मिशन में लगातार फेल होने के बाद चीन ने अब नेपाल में आम चुनावों के बीच रिजल्‍ट के बीच नए राजदूत का ऐलान किया है। चीन चांग सोंग को नेपाल में नया राजदूत बनाया जा रहा है। चांग अभी चीन के विदेश मंत्रालय में उप निदेशक हैं। नेपाली मीडिया के मुताबिक हाओ यांकी अक्टूबर में ही चीन लौटे हैं। हाओ यांकी ने दिसंबर 2018 में नेपाल में चीन के राजदूत का पद संभाला था। चीन ने अभी अपने नए राजदूत के बारे में नेपाल को आधिकारिक रूप से नहीं बताया है।

उद्र, चीन में नेपाल के राजदूत ने नए चीनी राजदूत की नियुक्ति की पुष्टि की है। उन्‍होंने बताया कि चेन सोंग पहले से ही चीन के विदेश मंत्रालय में नेपाल के मामले को देख रहे थे और वह दोनों देशों के बीच संबंधों से काफी परिचित हैं। चेन ने पिछले महीनों में नेपाल के राजनयिकों से कई बार मुलाकात की है। हाओ यांकी को अब इंडोनेशिया भेजा जा रहा है। पाकिस्तान में करीब 3 साल तक काम कर चुकीं हाउ यांकी का प्रधानमंत्री रहने के दौरान केपी ओली के ऑफिस और निवास में अक्कसर आना-जाना लगा रहा। इसके साथ-साथ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का देश का राजनीतिक नक्शा बदलने का मसौदा तैयार करने वाला प्रतिनिधि चीनी राजदूत के संपर्क में था।

हाओ यांकी के विपरीत छबी शत्रु हैं यूएन में भारत की महिला राजदूत रुचिरा कंबोज

चीन का यह राजदूत जहां चतुर-चालाकी के लिए बदनाम है तो वहीं भारत की महिला राजदूत रुचिरा कंबोज अपने देश की सकारात्मक छवि को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 1987 में घुसपैठ की भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के अधिकारियों ने भूटान में राजदूत के तौर पर शानदार काम करके दिखाया तो वहीं दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर अधिकारी अधिकारी।

संयुक्त राष्ट्र में देश के लिए सकारात्मक कार्य कर रहे हैं

58 साल की कंबोज इस साल अगस्त में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की पहली महिला दूत नियुक्त हुई हैं। इंटरेस्ट सिविल सर्विस की ऑल इंडिया वुमन टॉपर थीं। उन्होंने फ्रांस से अपनी राजनयिक यात्रा की शुरुआत की और फिर 1991-96 तक विदेश मंत्रालय के यूरोप वेस्ट डिवीजन में सचिव के रूप में काम किया। इसके बाद मॉरीशस और पोर्ट लूइस में शानदार काम करके दिखाया गया।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय दूतावास में सेवा देने के दौरान रुचिरा कंबोज के कार्यों को काफी विचार किया गया था।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय दूतावास में सेवा देने के दौरान रुचिरा कंबोज के कार्यों को काफी विचार किया गया था।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर राजदूत रुचिरा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक बैठक में भाग लिया। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, रुचिरा कंबोज ने जी4 देशों (ब्राजील, जर्मनी, जापान और भारत) की तरफ बोलते हुए कहा कि जी4 में देशों की सदस्यता बढ़ीये बिना वर्तमान के मुद्दे और ग्लोबल सेक्टर से नहीं जा सकते। सुरक्षा परिषद को अपने चार्टर के अनुसार काम करने के लिए और अन्य देशों को जोड़ने के लिए डाक भेजा जाना चाहिए। एकरस दिनों तक ये सुधार रुके रहेंगे, प्रतिनिधियों में सर्वसम्मत कमी बनी रहेगी।

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