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10वीं पास फल वाला बना डॉक्टर, 20 का हुआ ऑपरेशन: मुजफ्फरपुर में आग से झुलसी महिला की दोनों किडनी, पहले भी हो चुकी है मौत

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मुजफ्फरपुर11 मिनट पहले

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मुजफ्फरपुर किडनी कांड मामले का मुख्य एससी और नर्सिंग होम का संचालक पवन कुमार 8 साल तक भूटान में रहा। वहां फल में वह फल बेचता था। इसी दौरान कोरोना शुरू हो गया। लॉकडाउन में पवन अपने घर आ गया। इसके बाद दोबारा नहीं मिला। फिर उसने सकारा में एक दवा की दुकान में काम करना शुरू किया। इसी दौरान उसकी पहचान इस मामले के दूसरे चक्कर और सुनीता का ऑपरेशन करने वाले डॉ. आरके सिंह से हुई।

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वो लोग सकारा और इसके आसपास क्लिनिक खोलने की चाह रहे थे। पवन ने कहा कि उसका खाली घर है। फिर क्या था, आनन-फानन में एक बोर्ड लटका दिया गया। पवन ने अपने नाम के आगे भी डॉक्टर निर्धारण शुरू कर दिया। ढाई साल में दोनों ने मिलकर 20 से ज्यादा घुसपैठियों का ऑपरेशन किया था। यूट्रस के अलावा हार्निया, एपेंडिक्स का भी ऑपरेशन करने लगे।

मैट्रिक तक पवन विज्ञान पढ़ता है
पुलिस पूछताछ में आसपास की बातें सामने आई हैं। उसने बताया कि वह मैट्रिक तक ही पढ़ता है। लेकिन डॉक्टर आरके सिंह के बहकावे और रुपए कमाने के लालच में आए उन्होंने नाम के आगे डॉक्टर शब्द जोड़ लिया। प्रतिदिन डॉक्टर आरके सिंह अपनी गति के साथ आते थे। यहां पर मरीज देखें।

एक मरीज की हो चुकी मौत
पुलिस पूछताछ में पवन ने बताया कि शुरुआती दिनों में ही यूट्रस के ऑपरेशन के दौरान एक महिला मरीज की मौत हो गई थी, लेकिन सभी ने मिलकर उसके परिजन को रुपए पैसे देकर उसका मुंह बंद कर दिया था। मामला पुलिस तक भी नहीं भेजा था। बरियारपुर और इसके आसपास के गांव में उसने अच्छी पकड़ बना ली थी। यहां उनके मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।

आरके सिंह का मार्कर नहीं
पुलिस की जांच पड़ताल में जांच में डॉक्टर आरके सिंह घटना के बाद से ही गायब है। इसके अलावा अन्य दशकों का भी कोई संकेतक नहीं मिला है। यहां तक ​​कि उसका घर कहां है और क्लिनिक कहां है, इसका भी पता पुलिस को नहीं लगता। पवन ने कहा कि आरके सिंह मुजफ्फरपुर के पागल पक्की रहने वाला है, लेकिन अब तक पुलिस उसके घर को नहीं तलाशती है।

जमकर बटोरे रुपए
सूत्र कथन हैं कि आरके सिंह ने पवन के माध्यम से जमकर रुपए कमाए। इससे मुजफ्फरपुर में घर भी बना हुआ है। उनके सकारा में भी क्लिनिक दिखने की बात सामने आई है। सही सही नहीं मिल सका है।

फर्जी डिग्री दिखाता था
पुलिस जांच में ये भी पता चला कि आरके सिंह एमबीबीएस की फर्जी डिग्री लेकर गया था। यह दर्शाता है कि वह भोलेभाले तर्क को ठगने का काम करता था। पवन को उसने रुपए कमाने की जरिया बना रखा था। पवना भी रुपए कमाने के लालच में पड़कर इंसानों की जान से खिलवाड़ करने लगती है।

आरके सिंह की गिरफ्तारी बनी चुनौती
पुलिस के लिए अब आरके सिंह की गिरफ्तारी समस्या बनी हुई है। डीएसपी पूर्वी मनोज पांडेय का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही असली सच्चाई सामने आ जाएगी कि किडनी निकालने के पीछे क्या वजह थी। अब तक की जांच में तो ये वही साबित हुआ है। वैसे अभी जांच जारी है। मानव अंग के सभी पहलुओं पर पुलिस ने जांच की है, लेकिन अब तक ये बात सामने नहीं आई है।

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मुजफ्फरपुर में महिला की किडनी निकाल ली:पेट दर्द की शिकायत थी, प्राइवेट हॉस्पिटल ने यूट्रस के ऑपरेशन के दायरे में निकाली; प्राथमिकी

मुजफ्फरपुर में शुभ कांत क्लिनिक में डॉक्टर ने महिला की किडनी ही निकाल ली। महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचती थी। डॉक्टर ने कहा, उसका यूट्रस खराब हो गया है। ऑपरेशन करना। परिवार वालों ने उसे भर्ती कर दिया। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई। परिवार वाले उन्हें पुणे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) लेकर पहुंचे। यहां जांच में पता चला कि उसकी किडनी ही नहीं है। मामला मानव अंग तस्करता से शातिर हो सकता है। अभी एफआईआर के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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