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CJI चंद्रचूड बोले- सब-ऑर्डिनेट की चाल खत्म हो: हाई कोर्ट के जज जब फैसले-डिनर करते हैं तो डिस्ट्रिक्ट जज रहते हैं, यह सोच परिवर्तन

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीवाई चंद्रचूड ने देश में जजों के प्रति बर्ताव को लेकर चुटकी ली है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में CJI ने कहा कि हाई कोर्ट के जजों को जजों को सब-ऑर्डिनेट वरीयता की प्रवृत्ति बदलनी चाहिए। यह रचनाकारिता को देता है।

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कई जगह परंपरा है कि जब हाई कोर्ट जज या डिनर कर रहे होते हैं, तो डिस्ट्रिक्ट जज कायम रहेंगे। वे हाई कोर्ट के जज भोजन परोसने की कोशिश भी करते हैं। जब मैं जिलों की अदालत का दौरा करता था, तो अलग-अलग बयान देता था कि जब तक जज जज साथ नहीं बैठेंगे, तब तक खाना नहीं देंगे।

सब-ऑर्डिनेट की संस्कृति का विस्तार बढ़ा है
CJI चंद्रचूड ने कहा कि ऐसा लगता है कि सब-ऑर्डिनेट संस्कृति को हमने ही बढ़ावा दिया है। हम जिला न्यायालयों को संबंधित न्यायपालिका कहते हैं। मैं कहता हूं कि डिस्ट्रिक्ट जजों को सब-ऑर्डिनेट जजों के रूप में नहीं बुलाया जाता है। क्योंकि वे सब-ऑर्डिनेट नहीं हैं। इस सोच को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि IAS अधिकारी ऐसा नहीं करते।

गलती से डिस्टर्ब जज- हाई कोर्ट के जजों के सामने बैठने की हिम्मत नहीं करते
कई बार जब न्यायाधीशों को प्रत्यक्ष रूप से बुलाया जाता है, तो वे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के सामने देखने की हिम्मत नहीं दिखाते। जब अधिकतम न्याय से संपर्क होता है, तो नेटवर्क प्राधिकरण की सीमा पर संबंध मानते हैं। ऐसे उदाहरण हमारी रचनाकार कथन हैं। यह सब कुछ होगा।

आधुनिक ज्यूडिशियरी, इक्वल ज्यूडिशियरी की ओर बढ़ना होगा
हमें इस सोच को भिन्न आधुनिक न्यायशास्त्र, समान न्यायशास्त्र की ओर बढ़ाना होगा। यह जटिल गड़बड़ी न्यायिक व्यवस्था के तालमेल में सुधार करने से नहीं होगा। बल्कि हम सामान्य बनेंगे। हमें जिला न्यायपालिका में स्वाभिमान की भावना पैदा करनी पड़ेगी।

ज्यूडिशरी में भी युवा शामिल हो रहे हैं
सीजेआई ने कहा कि दूसरी तरफ युवा आईएएस अफसर अपने सीनियर की तरफ हीनभावना से नहीं देखते। दोनों के बीच बातचीत समानता की भावना से होती है। युवा अधिकारी समानता की भावना के साथ बोलते हैं। इससे पता चलता है कि भारत किस ओर जा रहा है। युवा स्पष्ट, दृढ़निश्चयी, आकांक्षी और आत्म सम्मान की भावना रखते हैं।

हमें प्राप्त है तो सबसे पहले जिला न्यायपालिका का चेहरा प्राप्त होगा
ज्यूडिशियरी में भी अब जनरेशन बदलाव आ रहा है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा युवा शामिल हो रहे हैं। पहले जब भी पुरानी पीढ़ी के लता जितने उनसे बात करते थे, तो हर दूसरे वाक्य में हां जी सर संभव थे। अब ज्यूडिशियरी में ज्यादा महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। अगर मुझे मिली है तो सबसे पहले जिला न्यायपालिका का चेहरा प्राप्त होगा।

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