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POCSO से बाहर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी: केरल हाई कोर्ट का फैसला; नाबालिग से संबंध बनाना अपराध

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तिरुवनपुरम11 मिनट पहले

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फोटो- सांकेतिक - दैनिक भास्कर
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फोटो- प्रतीकात्मक

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केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिमों के बीच शादी पॉक्सो एक्ट के दायरे से बाहर नहीं है। यानी पति अगर नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाता है तो उस पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सालू कुरियन थॉमस ने कहा कि व्यक्तिगत कानून में विवाह वैध होने के बावजूद यदि एक पक्ष अवयस्क है, तो इसे POCSO के तहत अपराध माना जाएगा।

पंजाब-हरियाणा और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से सहमति नहीं
जस्टिस थॉमस ने कहा कि वे पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं। किस कोर्ट ने एक मुस्लिम लड़की को 15 साल की हो चुकी है, उसे अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार दिया था, और पति की नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाने पर POCSO के तहत मामला दर्ज करने से छूट दी गई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि वे मोहम्मडन लॉ के तहत 17 साल की लड़की से शादी करने वाले मो. वसीम अहमद के मामले में दिए गए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से भी सहमति नहीं है, जिसके खिलाफ आपराधिक मामले को खारिज कर दिया गया था।

अब जानिए क्या है पूरा मामला
केरल हाईकोर्ट खालिदुर रहमान की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। रहमान पर 16 साल की एक लड़की ने लगाया यौन उत्पीडऩ का आरोप, जो उसकी पत्नी भी है। रहमान पर आरोप है कि उसने पश्चिम बंगाल के नाबालिग का अपहरण किया था। और उसके साथ रेप किया। रहमान ने अपने बचाव में कहा कि उसने नाबालिग लड़की से मुस्लिम कानून के तहत शादी की थी।

मुस्लिम पर्सनल लॉ उन लड़कियों को विवाह की अनुमति देता है जो यौवन को प्राप्त कर लेती हैं। ऐसे में उनके पतियों पर पॉक्सो एक्ट के दायित्व का मुकदमा नहीं चल सकता है।

बाल विवाह अभिशाप है
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि बाल विवाह को मानवाधिकार का उल्लंघन माना जाता है। यह समाज का अभिशाप है। ये बच्चे के विकास को अपनी पूरी क्षमता से समझौता करता है। साथ ही यह भी कहा कि “जब कोर्ट को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें यह पता लगाना चाहिए कि दो स्पष्ट रूप से परस्पर प्रतिरूप में से कौन सा सामान्य है और कौन विशेष है।

जब कोई कानून, नियम या व्यक्तिगत कानून का उलटा होता है तब वैधिक प्रावधान ही मान्य होंगे। और व्यक्तिगत कानून निरस्‍त होंगे।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

मुस्लिम लड़कियों की शादी की उम्र पर मचा बवाल

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ का एक और नियम के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत में बहस की तारीख बंधक हो गई है। इस बार परिवार है- मुस्लिम लड़कियों के निकाह की उम्र। 17 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 9 नवंबर 2022 की तारीख तय की है। इस मुद्दे से जुड़े सभी विद्यार्थियों के बारे में पढ़ें पूरी खबर…

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